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कैप्टन ने संभाला मुख्यमंत्री पद, उनके 9 सिपाहसलारों पर एक नजर
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 17 Mar 2017 09:19 AM IST
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Captain Amarinder Singh
- फोटो : अमर उजाला
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कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब के 26वें मुख्यमंत्री का पदभार संभाल लिया है। आइए एक नजर डालते हैं, उनकी कैबिनेट के सभी 9 मंत्रियों के प्रोफाइल पर।
बता दें कि पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की ऐतिहासिक जीत हुई। 117 में से 77 सीटें पार्टी के खाते में आईं। वहीं चुनाव में पार्टी को बेशक रिकॉड जीत मिली, लेकिन कई दिग्गज मैदान से बाहर हो गए हैं। चुनाव में शिअद भाजपा गठबंधन को 18 सीटें और आम आदमी पार्टी को 20 सीटें मिलीं।
कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब के 26वें मुख्यमंत्री बन गए हैं। वे दूसरी बार सीएम बने हैं। उन्होंने अपनी कैबिनेट में फिल्हाल 9 मंत्रियों को शामिल किया है। इनमें नवजोत सिद्धू और मनप्रीत बादल मुख्य हैं। दो महिलाओं को भी कैबिनेट में लिया गया है।
कैप्टन को कांग्रेस में राजीव गांधी कांग्रेस में लेकर आए। वे दोनों स्कूल के दोस्त थे। अमरिंदर सिंह पहली बार 1980 में लोकसभा चुनाव जीते। अमरिंदर सिंह 1999 से 2002 और 2010 से 2013 तक पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे और इस बीच 2002 से 2007 तक प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे।
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2017 में पंजाब चुनावों को ध्यान में रखते हुए 27 नवंबर 2015 को अमरिंदर सिंह को एक बार फिर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कमान सौंप दी गई। जिसका नतीजा रहा कि विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 77 सीटों के साथ ऐतिहाससिक जीत हासिल की।
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बता दें कि पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की ऐतिहासिक जीत हुई। 117 में से 77 सीटें पार्टी के खाते में आईं। वहीं चुनाव में पार्टी को बेशक रिकॉड जीत मिली, लेकिन कई दिग्गज मैदान से बाहर हो गए हैं। चुनाव में शिअद भाजपा गठबंधन को 18 सीटें और आम आदमी पार्टी को 20 सीटें मिलीं।
कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब के 26वें मुख्यमंत्री बन गए हैं। वे दूसरी बार सीएम बने हैं। उन्होंने अपनी कैबिनेट में फिल्हाल 9 मंत्रियों को शामिल किया है। इनमें नवजोत सिद्धू और मनप्रीत बादल मुख्य हैं। दो महिलाओं को भी कैबिनेट में लिया गया है।
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कैप्टन को कांग्रेस में राजीव गांधी कांग्रेस में लेकर आए। वे दोनों स्कूल के दोस्त थे। अमरिंदर सिंह पहली बार 1980 में लोकसभा चुनाव जीते। अमरिंदर सिंह 1999 से 2002 और 2010 से 2013 तक पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे और इस बीच 2002 से 2007 तक प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रहे।
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2017 में पंजाब चुनावों को ध्यान में रखते हुए 27 नवंबर 2015 को अमरिंदर सिंह को एक बार फिर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कमान सौंप दी गई। जिसका नतीजा रहा कि विधानसभा चुनाव में पार्टी ने 77 सीटों के साथ ऐतिहाससिक जीत हासिल की।
नवजोत सिंह सिद्धू (अमृतसर ईस्ट)
नवजोत सिंह सिद्धू
भाजपा का दामन छोड़कर कांग्रेस का हाथ थामने वाले पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू अमृतसर (ईस्ट) से चुनाव जीतकर आए हैं। सिद्धू ने अमृतसर ईस्ट से बीजेपी के उम्मीदवार राजेश हनी को 42 हजार 661 वोटों से हराया है।
सिद्धू 2004 में राजनीति में आए और छा गए। उन्होंने अमृतसर से पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा थी और कांग्रेस के आर एल भाटिया को 90 हजार वोटों से मात दी थी। ऐसे दिग्गज को हराया तो स्वभाविक था कि पंजाब की राजनीति में सिद्धू का कद एकाएक ही बड़ा हो गया।
2009 के लोकसभा चुनाव में वह दोबारा जीते। 2014 में बीजेपी ने उनका टिकट तो काटा, लेकिन राज्यसभा के रास्ते सिद्धू को संसद भेजना ही पड़ा। साल 2016 में उन्होंने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया। भाजपा भी छोड़ दी और कांग्रेस में पत्नी समेत शामिल हो गए।
पूरे दस साल सिद्धू अमृतसर से सांसद रहे और अब वे पंजाब की राजनीति के दिग्गज खिलाड़ी बन गए हैं। स्थापित नेता हैं। सिद्धू और उनकी पत्नी का अमृतसर क्षेत्र में खूब प्रभाव है। अब तो वे सत्ता में आने जा रहे हैं तो निश्चित ही पंजाब में बदलाव देखने को मिलेंगे।
सिद्धू 2004 में राजनीति में आए और छा गए। उन्होंने अमृतसर से पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा थी और कांग्रेस के आर एल भाटिया को 90 हजार वोटों से मात दी थी। ऐसे दिग्गज को हराया तो स्वभाविक था कि पंजाब की राजनीति में सिद्धू का कद एकाएक ही बड़ा हो गया।
2009 के लोकसभा चुनाव में वह दोबारा जीते। 2014 में बीजेपी ने उनका टिकट तो काटा, लेकिन राज्यसभा के रास्ते सिद्धू को संसद भेजना ही पड़ा। साल 2016 में उन्होंने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया। भाजपा भी छोड़ दी और कांग्रेस में पत्नी समेत शामिल हो गए।
पूरे दस साल सिद्धू अमृतसर से सांसद रहे और अब वे पंजाब की राजनीति के दिग्गज खिलाड़ी बन गए हैं। स्थापित नेता हैं। सिद्धू और उनकी पत्नी का अमृतसर क्षेत्र में खूब प्रभाव है। अब तो वे सत्ता में आने जा रहे हैं तो निश्चित ही पंजाब में बदलाव देखने को मिलेंगे।
मनप्रीत सिंह बादल
मनप्रीत बादल
मनप्रीत सिंह बादल बठिंडा शहरी सीट से विधयक बने हैं। अमरिंदर सिंह ने पहले ही एलान कर रखा है कि सरकार बनने पर मनप्रीत बादल को वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी दी जाएगी। मनप्रीत बादल परिवार से ताल्लुक रखते हैं और पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के भाई के बेटे हैं। सुखबीर बादल से मतभेद की वजह से अकाली दल छोड़कर मनप्रीत ने पहले अपनी पार्टी बनाई फिर कांग्रेस में शामिल हो गए थे। वे अब तक पांच बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं।
एक समय अकाली दल में मनप्रीत बादल(55) की अच्छी खासी हनक थी। वह 1995 से 2012 तक अकाली दल से एमएलए थे। 2007-10 तक बादल सरकार के वित्तमंत्री रहे। 2010 में मतभेद के चलते उनको मंत्री पद से हटा दिया गया। अक्टूबर 2010 में उनको पार्टी से निकाल दिया गया। उसके बाद उन्होंने पीपुल्स पार्टी ऑफ पंजाब (पीपीपी) का गठन किया और 2012 के चुनाव में अन्य छोटे दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ा।
हालांकि उनकी पार्टी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा और वह खुद अपनी दो सीटों से हार गए. पार्टी का भी कहीं खाता नहीं खुल सका। उसके बाद 2014 के चुनाव में मनप्रीत ने सुखबीर सिंह बादल की पत्नी हरसिमरत कौर के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता हासिल नहीं कर सके। उसके बाद पिछले साल जनवरी में उनकी पार्टी का कांग्रेस में विलय हो गया। वह अब तक पंजाब की गिद्दरबाहा सीट से चुनाव लड़ते रहे हैं।
एक समय अकाली दल में मनप्रीत बादल(55) की अच्छी खासी हनक थी। वह 1995 से 2012 तक अकाली दल से एमएलए थे। 2007-10 तक बादल सरकार के वित्तमंत्री रहे। 2010 में मतभेद के चलते उनको मंत्री पद से हटा दिया गया। अक्टूबर 2010 में उनको पार्टी से निकाल दिया गया। उसके बाद उन्होंने पीपुल्स पार्टी ऑफ पंजाब (पीपीपी) का गठन किया और 2012 के चुनाव में अन्य छोटे दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ा।
हालांकि उनकी पार्टी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा और वह खुद अपनी दो सीटों से हार गए. पार्टी का भी कहीं खाता नहीं खुल सका। उसके बाद 2014 के चुनाव में मनप्रीत ने सुखबीर सिंह बादल की पत्नी हरसिमरत कौर के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता हासिल नहीं कर सके। उसके बाद पिछले साल जनवरी में उनकी पार्टी का कांग्रेस में विलय हो गया। वह अब तक पंजाब की गिद्दरबाहा सीट से चुनाव लड़ते रहे हैं।
ये रहे अन्य मंत्री
पंजाब की नई सरकार ने शपथ ली
ब्रह्मा मोहिंदर सिंह
पटियाला देहाती सीट से ब्रह्म मोहिंद्रा लगातार छठी बार विधायक चुने गए हैं। उनकी गिनती पंजाब के वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं में होती है। वह बेअंत सिंह की सरकार के वक्त भी मंत्री रह चुके हैं। मोहिंद्रा 2002 से लेकर 2007 के दौरान कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार के वक्त वह कई बोर्डों के चेयरमैन भी रह चुके हैं। कैप्टन ने इन्हें कैबिनेट में शामिल किया है।
चरणजीत सिंह चन्नी
दलित समुदाय से आने वाले चन्नी पिछली विधानसभा में पंजाब कांग्रेस विधायक दल के नेता रह चुके हैं। चमकौर साहिब विधानसभा से चरणजीत चन्नी लगातार तीसरी बार विधायक निर्वाचित हुए हैं। अब उन्हें कैबिनेट में शामिल किया गया है।
साधु सिंह धर्मसोत
साधु सिंह धर्मसोत पार्टी के दलित चेहरा हैं और नाभा से विधायक हैं। जब दस साल तक कांग्रेस पंजाब की सत्ता से बाहर रही, तब भी साधु सिंह धर्मसोत चुनाव जीतते रहे। उन्हें कैप्टन अमरिंदर सिंह के बेहद नजदीकी माने जाते हैं।
राणा गुरजीत सिंह
राणा गुरजीत कपूरथला से कांग्रेस के विधायक हैं और अमरिंदर सिंह के करीबी माने जाते हैं। राणा गुरजीत पंजाब के बड़े कारोबारी हैं। राणा गुरजीत सिंह जालंधर से सांसद भी रह चुके हैं। राणा गुरजीत सिंह लगातार कैप्टन कैंप से ही जुड़े रहे हैं। वह काफी वरिष्ठ नेता हैं।
पटियाला देहाती सीट से ब्रह्म मोहिंद्रा लगातार छठी बार विधायक चुने गए हैं। उनकी गिनती पंजाब के वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं में होती है। वह बेअंत सिंह की सरकार के वक्त भी मंत्री रह चुके हैं। मोहिंद्रा 2002 से लेकर 2007 के दौरान कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार के वक्त वह कई बोर्डों के चेयरमैन भी रह चुके हैं। कैप्टन ने इन्हें कैबिनेट में शामिल किया है।
चरणजीत सिंह चन्नी
दलित समुदाय से आने वाले चन्नी पिछली विधानसभा में पंजाब कांग्रेस विधायक दल के नेता रह चुके हैं। चमकौर साहिब विधानसभा से चरणजीत चन्नी लगातार तीसरी बार विधायक निर्वाचित हुए हैं। अब उन्हें कैबिनेट में शामिल किया गया है।
साधु सिंह धर्मसोत
साधु सिंह धर्मसोत पार्टी के दलित चेहरा हैं और नाभा से विधायक हैं। जब दस साल तक कांग्रेस पंजाब की सत्ता से बाहर रही, तब भी साधु सिंह धर्मसोत चुनाव जीतते रहे। उन्हें कैप्टन अमरिंदर सिंह के बेहद नजदीकी माने जाते हैं।
राणा गुरजीत सिंह
राणा गुरजीत कपूरथला से कांग्रेस के विधायक हैं और अमरिंदर सिंह के करीबी माने जाते हैं। राणा गुरजीत पंजाब के बड़े कारोबारी हैं। राणा गुरजीत सिंह जालंधर से सांसद भी रह चुके हैं। राणा गुरजीत सिंह लगातार कैप्टन कैंप से ही जुड़े रहे हैं। वह काफी वरिष्ठ नेता हैं।
दो महिला मंत्री भी कैबिनेट में शामिल
पंजाब की नई सरकार ने शपथ ली
- फोटो : File Photo
तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा
बाजवा पंजाब में कांग्रेस का जटसिख चेहरा हैं। वह लगातार पांचवीं बार विधायक बने हैं। बाजवा फतेहगढ़ चूड़ियां इलाके से चुनाव जीते हैं। उन्हें भी कैप्टन अमरिंदर सिंह का नजदीकी माना जाता है। इन्होंने अकाली दल के बड़े नेता निर्मल सिंह कहलों को लगातार दूसरी बार चुनाव में हराया है। बाजवा पंजाब के माझा इलाके से आते हैं।
रजिया सुल्ताना
2002 में कैप्टन सरकार के वक्त रजिया सुल्ताना मुख्य संसदीय सचिव थीं। वह मुस्लिम समुदाय से पंजाब कांग्रेस की एकमात्र बड़ी नेता हैं। वह कैप्टन अमरिंदर सिंह के नजदीकी आईपीएस अफसर मोहम्मद मुस्तफा की पत्नी हैं। पिछली बार चुनाव हार गई थीं, लेकिन इस बार मलेरकोटला से विधायक बनी हैं।
अरुणा चौधरी
अरुणा लगातार तीसरी बार जीतकर विधानसभा पहुंची हैं। अरुणा पंजाब के माझा इलाके की दीनानगर सीट से विधायक हैं। महिला कोटे में इन्हें राज्य मंत्री का पद दिया जा रहा है।
बाजवा पंजाब में कांग्रेस का जटसिख चेहरा हैं। वह लगातार पांचवीं बार विधायक बने हैं। बाजवा फतेहगढ़ चूड़ियां इलाके से चुनाव जीते हैं। उन्हें भी कैप्टन अमरिंदर सिंह का नजदीकी माना जाता है। इन्होंने अकाली दल के बड़े नेता निर्मल सिंह कहलों को लगातार दूसरी बार चुनाव में हराया है। बाजवा पंजाब के माझा इलाके से आते हैं।
रजिया सुल्ताना
2002 में कैप्टन सरकार के वक्त रजिया सुल्ताना मुख्य संसदीय सचिव थीं। वह मुस्लिम समुदाय से पंजाब कांग्रेस की एकमात्र बड़ी नेता हैं। वह कैप्टन अमरिंदर सिंह के नजदीकी आईपीएस अफसर मोहम्मद मुस्तफा की पत्नी हैं। पिछली बार चुनाव हार गई थीं, लेकिन इस बार मलेरकोटला से विधायक बनी हैं।
अरुणा चौधरी
अरुणा लगातार तीसरी बार जीतकर विधानसभा पहुंची हैं। अरुणा पंजाब के माझा इलाके की दीनानगर सीट से विधायक हैं। महिला कोटे में इन्हें राज्य मंत्री का पद दिया जा रहा है।