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Chandigarh News: कनाडा में वर्क परमिट नियमों में सख्ती, हजारों प्रवासियों और छात्रों की राह कठिन
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-2026 तक वर्क परमिट में भारी कटौती की तैयारी, भारतीयों पर सबसे ज्यादा असर, स्पाउस ओपन वर्क परमिट भी सीमित होंगे
-- -अमर उजाला ब्यूरो
जालंधर। कनाडा सरकार ने इमिग्रेशन नीति में बड़ा बदलाव करते हुए वर्क परमिट नियमों को सख्त करने का फैसला लिया है। इस फैसले का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय छात्रों, अस्थायी विदेशी कामगारों और कनाडा में काम कर बसने का सपना देख रहे हजारों प्रवासियों पर पड़ेगा। नई नीति के तहत कई श्रेणियों में वर्क परमिट जारी करने की प्रक्रिया सीमित की जा रही है, जिससे आने वाले वर्षों में परमिट की कुल संख्या में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज होने की संभावना है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 तक जारी किए जाने वाले वर्क परमिट की संख्या में बड़ी कटौती की तैयारी है। जहां अब तक अनुमानित रूप से हर साल करीब 82 हजार वर्क परमिट जारी किए जा रहे थे। वहीं नई नीति के बाद यह संख्या घटकर लगभग 60 हजार तक सीमित हो सकती है। कनाडा के इमिग्रेशन विभाग का कहना है कि यह कदम श्रम बाजार, आवास व्यवस्था और सार्वजनिक सेवाओं पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए जरूरी हो गया है।
नई नीति का असर विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय छात्रों के जीवनसाथी और परिवारों पर पड़ेगा। सरकार अब स्पाउस ओपन वर्क परमिट की कुछ श्रेणियों पर भी सख्त सीमाएं लगाने की योजना बना रही है। इसके अलावा कम वेतन वाली नौकरियों और अस्थायी रोजगार के लिए वर्क परमिट हासिल करना पहले की तुलना में कहीं अधिक कठिन हो सकता है।
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नीति के पीछे सरकार की दलील
कनाडा सरकार का कहना है कि देश में तेजी से बढ़ती जनसंख्या, आवास संकट, रोजगार की बढ़ती प्रतिस्पर्धा और स्वास्थ्य व सामाजिक सेवाओं पर दबाव को देखते हुए इमिग्रेशन नीति में संतुलन जरूरी है। सरकार के मुताबिक नए नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी कामगारों को अस्थायी और असुरक्षित नौकरियों के बजाय स्थिर और दीर्घकालिक रोजगार के अवसर मिलें।
विशेषज्ञों और छात्रों में चिंता
सरकार के इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय छात्रों, मानवाधिकार संगठनों और इमिग्रेशन विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। वीजा एक्सपर्ट परविंदर सिंह का कहना है कि यह कदम कनाडा की वैश्विक छवि और विदेशी छात्रों की भविष्य की योजनाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। कई छात्र पढ़ाई के बाद वर्क परमिट और स्थायी निवास (पीआर) की उम्मीद से कनाडा जाते हैं, लेकिन नए नियमों से उनके अवसर सीमित हो सकते हैं।
भारतीयों के सामने बढ़ेगी चुनौती
कनाडा में रह रहे भारतीयों के लिए आने वाला समय और चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इमिग्रेशन, रिफ्यूजी एंड सिटीजनशिप कनाडा (आईआरसीसी) के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 के अंत तक करीब 10.53 लाख वर्क परमिट समाप्त हो चुके हैं, जबकि 2026 में 9.27 लाख और परमिट खत्म होने वाले हैं। अकेले 2026 की पहली तिमाही में 3.15 लाख लोगों के वीजा की अवधि समाप्त होगी। आशंका है कि 2026 के मध्य तक कनाडा में कम से कम 20 लाख लोग ऐसे होंगे, जिनके पास वैध दस्तावेज नहीं होंगे, जिनमें करीब आधे भारतीय और अधिकांश पंजाबी युवा हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कनाडा में पढ़ाई, काम और बसने की योजना बना रहे युवाओं को अब नई नीतियों और बदलते नियमों को ध्यान में रखकर ही भविष्य की रणनीति तय करनी होगी।
परमिट की स्थिति -2026 तक वर्क परमिट अनुमानित संख्या : 60,000
-2025 में खत्म हुए वर्क परमिट : 10.53 लाख
-2026 में समाप्त होने वाले परमिट : 9.27 लाख
-2026 की पहली तिमाही में वीजा समाप्ति : 3.15 लाख
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जालंधर। कनाडा सरकार ने इमिग्रेशन नीति में बड़ा बदलाव करते हुए वर्क परमिट नियमों को सख्त करने का फैसला लिया है। इस फैसले का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय छात्रों, अस्थायी विदेशी कामगारों और कनाडा में काम कर बसने का सपना देख रहे हजारों प्रवासियों पर पड़ेगा। नई नीति के तहत कई श्रेणियों में वर्क परमिट जारी करने की प्रक्रिया सीमित की जा रही है, जिससे आने वाले वर्षों में परमिट की कुल संख्या में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज होने की संभावना है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 तक जारी किए जाने वाले वर्क परमिट की संख्या में बड़ी कटौती की तैयारी है। जहां अब तक अनुमानित रूप से हर साल करीब 82 हजार वर्क परमिट जारी किए जा रहे थे। वहीं नई नीति के बाद यह संख्या घटकर लगभग 60 हजार तक सीमित हो सकती है। कनाडा के इमिग्रेशन विभाग का कहना है कि यह कदम श्रम बाजार, आवास व्यवस्था और सार्वजनिक सेवाओं पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए जरूरी हो गया है।
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नई नीति का असर विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय छात्रों के जीवनसाथी और परिवारों पर पड़ेगा। सरकार अब स्पाउस ओपन वर्क परमिट की कुछ श्रेणियों पर भी सख्त सीमाएं लगाने की योजना बना रही है। इसके अलावा कम वेतन वाली नौकरियों और अस्थायी रोजगार के लिए वर्क परमिट हासिल करना पहले की तुलना में कहीं अधिक कठिन हो सकता है।
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नीति के पीछे सरकार की दलील
कनाडा सरकार का कहना है कि देश में तेजी से बढ़ती जनसंख्या, आवास संकट, रोजगार की बढ़ती प्रतिस्पर्धा और स्वास्थ्य व सामाजिक सेवाओं पर दबाव को देखते हुए इमिग्रेशन नीति में संतुलन जरूरी है। सरकार के मुताबिक नए नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी कामगारों को अस्थायी और असुरक्षित नौकरियों के बजाय स्थिर और दीर्घकालिक रोजगार के अवसर मिलें।
विशेषज्ञों और छात्रों में चिंता
सरकार के इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय छात्रों, मानवाधिकार संगठनों और इमिग्रेशन विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। वीजा एक्सपर्ट परविंदर सिंह का कहना है कि यह कदम कनाडा की वैश्विक छवि और विदेशी छात्रों की भविष्य की योजनाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। कई छात्र पढ़ाई के बाद वर्क परमिट और स्थायी निवास (पीआर) की उम्मीद से कनाडा जाते हैं, लेकिन नए नियमों से उनके अवसर सीमित हो सकते हैं।
भारतीयों के सामने बढ़ेगी चुनौती
कनाडा में रह रहे भारतीयों के लिए आने वाला समय और चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इमिग्रेशन, रिफ्यूजी एंड सिटीजनशिप कनाडा (आईआरसीसी) के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 के अंत तक करीब 10.53 लाख वर्क परमिट समाप्त हो चुके हैं, जबकि 2026 में 9.27 लाख और परमिट खत्म होने वाले हैं। अकेले 2026 की पहली तिमाही में 3.15 लाख लोगों के वीजा की अवधि समाप्त होगी। आशंका है कि 2026 के मध्य तक कनाडा में कम से कम 20 लाख लोग ऐसे होंगे, जिनके पास वैध दस्तावेज नहीं होंगे, जिनमें करीब आधे भारतीय और अधिकांश पंजाबी युवा हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कनाडा में पढ़ाई, काम और बसने की योजना बना रहे युवाओं को अब नई नीतियों और बदलते नियमों को ध्यान में रखकर ही भविष्य की रणनीति तय करनी होगी।
परमिट की स्थिति -2026 तक वर्क परमिट अनुमानित संख्या : 60,000
-2025 में खत्म हुए वर्क परमिट : 10.53 लाख
-2026 में समाप्त होने वाले परमिट : 9.27 लाख
-2026 की पहली तिमाही में वीजा समाप्ति : 3.15 लाख