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कैडेट पद्मा नामगेल पहुंचे एवरेस्ट: 20 किलो भार के साथ सुखना लेक पर लगाते थे दाैड़, लाश के सिर पर रख बढ़े आगे
Wed, 25 Jun 2025 10:10 AM IST
निवेदिता वर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 25 Jun 2025 10:10 AM IST
सार
पद्मा नामगेल लेह लद्दाख के रहने वाले हैं और डीएवी कॉलेज में बीएससी कंप्यूटर साइंस के स्टूडेंट हैं। उनके पिता ड्राइवर और उनकी मां हाउस वाइफ हैं।
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डीएवी कॉलेज के कैडेट पद्मा नामगेल का सम्मान
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चंडीगढ़ सेक्टर 10 के डीएवी कॉलेज के कैडेट पद्मा नामगेल ने माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करके उपलब्धि हासिल की है। कॉलेज की प्रबंधन समिति ने पद्मा नामगेल को 25 हजार रुपये की राशि देकर सम्मानित किया है।
पूर्व प्रिंसिपल आरसी. जीवन, वरिष्ठ उपाध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रीतमपाल और प्रिंसिपल मोना नारंग ने उन्हें यह राशि भेंट की। उनके सम्मान में आयोजित समारोह में सुबेदार मेजर डॉ. एसएम करण सिंह ने भी कैडेट को सम्मानित किया। कैडेट नामगेल ने मई 2025 में दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर चढ़कर विजय प्राप्त की।
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पद्मा ने बताया कि इस उपलब्धि को हासिल करने के लिए वह दो साल से अपने घर नहीं गए। एनसीसी ने उन्हें यह मौका दिया। ऐसी कामयाबी हासिल करने वाले वह चंडीगढ़ के पहले एनसीसी कैडेट और लेह लद्दाख के माउंट एवरेस्ट पर जाने वाले पहले पुरुष बन गए हैं।
उन्होंने बताया कि वह डेढ़ महीने तक डीएवी कालेज से सुखना लेकर तक रोजाना 20 किलो भार लेकर दौड़ते थे। इसके अलावा पैरों पर भी वेट बांधते थे। उन्हें माउंट एवरेस्ट तक पहुचंने में 45 दिन लगे। रास्ते में उन्होंने जब पहली लाश देखी तो वह बहुत डर गए थे, लेकिन उन्हें पहले ही तैयार किया गया था कि डरना नहीं है। उन्हें कई बार शव के सिर पर पैर रखकर गुजरना पड़ा। रास्ता बहुत कम था और ट्रैफिक ज्यादा था। हर समय गिरने का डर सताता था, नीचे खाई थी। पानी की कमी थी और शरीर पूरा डिहाइड्रेट हो रहा था, लेकिन उन्होंने हौसला नहीं छोड़ा।
18 मई को जब वह सुबह 4 बजे माउंट एवरेस्ट पर पहुंचे तो बीते 2 साल का संघर्ष भूल गए। वह 8848.86 मीटर ऊंचाई पर थे। वह डिफेंस में जाने का सपना रखते हैं। उन्होंने कहा कि उनके दो सेमेस्टर की पढ़ाई का नुकसान हुआ है, वह पीयू से विनती कर रहे है कि उन्हें एग्जाम देने का मौका मिले, ताकि वह अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें।
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पूर्व प्रिंसिपल आरसी. जीवन, वरिष्ठ उपाध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रीतमपाल और प्रिंसिपल मोना नारंग ने उन्हें यह राशि भेंट की। उनके सम्मान में आयोजित समारोह में सुबेदार मेजर डॉ. एसएम करण सिंह ने भी कैडेट को सम्मानित किया। कैडेट नामगेल ने मई 2025 में दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर चढ़कर विजय प्राप्त की।
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पद्मा ने बताया कि इस उपलब्धि को हासिल करने के लिए वह दो साल से अपने घर नहीं गए। एनसीसी ने उन्हें यह मौका दिया। ऐसी कामयाबी हासिल करने वाले वह चंडीगढ़ के पहले एनसीसी कैडेट और लेह लद्दाख के माउंट एवरेस्ट पर जाने वाले पहले पुरुष बन गए हैं।
उन्होंने बताया कि वह डेढ़ महीने तक डीएवी कालेज से सुखना लेकर तक रोजाना 20 किलो भार लेकर दौड़ते थे। इसके अलावा पैरों पर भी वेट बांधते थे। उन्हें माउंट एवरेस्ट तक पहुचंने में 45 दिन लगे। रास्ते में उन्होंने जब पहली लाश देखी तो वह बहुत डर गए थे, लेकिन उन्हें पहले ही तैयार किया गया था कि डरना नहीं है। उन्हें कई बार शव के सिर पर पैर रखकर गुजरना पड़ा। रास्ता बहुत कम था और ट्रैफिक ज्यादा था। हर समय गिरने का डर सताता था, नीचे खाई थी। पानी की कमी थी और शरीर पूरा डिहाइड्रेट हो रहा था, लेकिन उन्होंने हौसला नहीं छोड़ा।
18 मई को जब वह सुबह 4 बजे माउंट एवरेस्ट पर पहुंचे तो बीते 2 साल का संघर्ष भूल गए। वह 8848.86 मीटर ऊंचाई पर थे। वह डिफेंस में जाने का सपना रखते हैं। उन्होंने कहा कि उनके दो सेमेस्टर की पढ़ाई का नुकसान हुआ है, वह पीयू से विनती कर रहे है कि उन्हें एग्जाम देने का मौका मिले, ताकि वह अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें।