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हुड्डा ने सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर उठाए सवाल, बोले- किसान कर्जदार हो रहा गिरदावरी अभी तक नहीं हुई
Tue, 17 Mar 2020 10:43 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Tue, 17 Mar 2020 10:43 PM IST
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भूपेंद्र सिंह हुड्डा
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हरियाणा के पूर्व सीएम एवं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने हरियाणा सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि वित्तीय कुप्रबंधन की वजह से वर्तमान सरकार ने प्रदेश को कर्ज में डुबा दिया है। पत्रकारों से बातचीत में हुड्डा ने कहा कि हरियाणा में हर बच्चा 80 हजार का कर्ज लेकर पैदा होता है।
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हमारी मांग है कि सरकार लगातार बढ़ रहे कर्ज पर श्वेत पत्र जारी करे और बताए कि उसने इतना रुपया कहां खर्च किया। 2014 में जब बीजेपी सत्ता में आई थी तो उसने पिछली सरकारों के कर्ज पर खूब हायतौबा मचाई थी। यही नहीं बीजेपी से पहले की तमाम सरकारों ने जो 60,300 करोड़ का कर्ज लिया था, उस पर बीजेपी श्वेतपत्र लाई थी। जबकि हमारी सरकार के दौरान सैकड़ों बड़े प्रोजेक्ट, मेट्रो, रेलवे लाइन, एम्स, आईआईटी, आईआईएम, मेडिकल कॉलेज, पॉवर प्लांट्स, न्यूक्लियर प्लांट, सैकड़ों बड़े उद्योग स्थापित हुए। लेकिन बीजेपी राज में ऐसा कोई संस्थान, निवेश या उद्योग हरियाणा में नहीं लगा। बावजूद इसके बीजेपी सरकार ने बेतहाशा कर्ज लिया।
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हुड्डा ने प्रदेश सरकार को नसीहत दी कि पगड़ी गिरवी रखकर कर्ज नहीं लेना चाहिए। सरकार को वक्त रहते लगातार बढ़ते रेवेन्यू डेफिसिट और फिसिकल डेफिसिट को कंट्रोल करना चाहिए। उन्होंने किसानों के मुद्दों पर भी सरकार को घेरा। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की नीतियों और कुदरत की मार से किसान लगातार कर्जदार होता जा रहा है।
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ओलावृष्टि और बेमौसमी बारिश से हुए नुकसान का सरकार जल्द से जल्द मुआवजा दे। सरकार को एकड़ नहीं, बल्कि नुकसान का आंकलन करके उसके समर्थन मूल्य के बराबर प्रति क्विंटल के हिसाब से मुआवजा देना चाहिए। क्योंकि किसानों की तैयार फसल बर्बाद हुई है। पिछले दिनों हुए नुकसान की अब तक गिरदावरी नहीं हुई थी कि फिर 3 दिन की बारिश ने नुकसान को बढ़ा दिया।
गेहूं, सरसों, चना और सब्जियों की खेती को सौ फीसदी तक नुकसान झेलना पड़ा है। दूसरों के लिए अन्न उगाने वाला किसान आज ख़ुद दाने-दाने का मोहताज हो गया है। इसलिए सरकार को फौरन किसानों की मदद के लिए आगे आना चाहिए।