Punjab News: सुखबीर बादल को अदालत से झटका, चार्जशीट की कॉपी दिखाने की मांग करने वाली याचिका रद्द
कोटकपूरा गोलीकांड केस में एडीजीपी एलके यादव की अगुवाई वाली पंजाब पुलिस की एसआईटी ने पिछले माह 24 फरवरी को फरीदकोट के जेएमआईसी अजयपाल सिंह की अदालत में करीब सात हजार पेज की चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें सुखबीर सिंह बादल, प्रकाश सिंह बादल के अलावा तत्कालीन डीजीपी सुमेध सिंह सैनी समेत छह पुलिस अधिकारियों को नामजद किया गया है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कोटकपूरा गोलीकांड केस में चार्जशीट सुखबीर सिंह बादल को फरीदकोट की जेएमआईसी अजयपाल सिंह की अदालत से झटका लगा है। अदालत ने चार्जशीट दिखाने की अपील वाली उनकी याचिका को रद्द कर दिया। चार्जशीट दाखिल होने के बाद सुखबीर सिंह बादल व उनके पिता पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने जिला अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी। इस पर 14 मार्च मंगलवार को सुनवाई होगी। जमानत की पैरवी करने के लिए सुखबीर सिंह बादल ने अपने वकील के माध्यम से चार्जशीट की कॉपी दिखाने का आग्रह किया था लेकिन इस पर एसआईटी ने विरोध जताया। इसके बाद अदालत ने याचिका रद्द कर दी।
कोटकपूरा गोलीकांड केस में एडीजीपी एलके यादव की अगुवाई वाली पंजाब पुलिस की एसआईटी ने पिछले माह 24 फरवरी को फरीदकोट के जेएमआईसी अजयपाल सिंह की अदालत में करीब सात हजार पेज की चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें सुखबीर सिंह बादल, प्रकाश सिंह बादल के अलावा तत्कालीन डीजीपी सुमेध सिंह सैनी समेत छह पुलिस अधिकारियों को नामजद किया गया है। इस चार्जशीट के आधार पर अदालत ने सभी आरोपियों को नोटिस जारी करके उन्हें 23 मार्च को अदालत में पेश होकर पक्ष रखने का आदेश दिया था।
एसएसपी सुखमंदर मान ने दाखिल की जमानत याचिका
उधर, इसी केस में चार्जशीट फरीदकोट के तत्कालीन एसएसपी सुखमंदर सिंह मान ने सोमवार को जिला अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की और उनकी याचिका पर भी अतिरिक्त जिला व सेशंस जज राजीव कालड़ा की अदालत में 14 मार्च को सुनवाई होगी। चूंकि तत्कालीन एसएसपी मान को एसआईटी ने कोटकपूरा गोलीकांड से जुड़ी दोनों एफआईआर में नामजद किया है, ऐसे में उन्होंने जिला अदालत में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की हैं। मालूम हो कि इनमें से एक केस घटना वाले दिन 14 अक्तूबर 2015 को पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर दर्ज किया था, जबकि एक केस 7 अगस्त 2018 को पुलिस के खिलाफ दर्ज हुआ था। दोनों केसों की पड़ताल के बाद दायर चार्जशीट में अभी तक प्रदर्शनकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।