बेटी तुझे सलाम: बिन आंखों के नूरी ने जीते 15 गोल्ड
मेरी तबीयत से तो कभी इमान से, जमाना खौफ खाता है मेरी उड़ान से। सौ निशाने साधकर लौटगा, तीर निकलेगा जब मेरी कमान से। किसी शायर की ये पंक्तियां खन्ना की बलविंदर कौर नूरी पर ठीक बैठती हैं।
एथलीट नूरी का जन्म लुधियाना में मोहिंदर सिंह और प्रकाश कौर के घर हुआ। 18 साल की उम्र में पायलट बनने के सपने संजोए नूरी घर की छत से गिर गई। सिर में गहरी चोट लगी और आंखों की रोशनी चली गई।
नूरी की आंखों के इलाज के लिए उसे कई जगह दिखाया गया। घर के हालात इतने अच्छे नहीं थे कि उसकी आंखों के इलाज का खर्च उठाया जा सके, लेकिन उसने अपनी कमजोरी से खुद ही निपटने का फैसला कर लिया।
नूरी बताती है कि उसने घर से भाग कर लुधियाना के बीआरटीसी सेंटर में दाखिला लिया। यहीं से उसने कंप्यूटर ऑपरेटर का डिप्लोमा करके साबित किया कि जिंदगी में मुकाम अभी और भी बाकी हैं।
शॉटपुट में 15 गोल्ड मेडल जीते
नूरी चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज में मास्टर ऑफ सोशोलॉजी की स्टूडेंट है। नूरी ने बताया कि उसने बिना कोच के साइकिल पार्ट्स के साथ शॉटपुट की प्रेक्टिस करनी शुरू की। इसके बाद शॉटपुट में 15 गोल्ड मेडल जीते। इसके अलावा 4 सिल्वर, दो ब्रांज भी उसकी कड़ी मेहनत का नतीजा है।
नूरी ने साल 2014 में दुबई में हुई पैरा ओलंपिक चैंपियनशिप में शॉटपुट में ब्रांज मेडल हालिस किया। नूरी अपनी कैटगरी में पंजाब की पहली सीनियर वुमन है। जिसने ये सम्मान हासिल किया है।