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जिस SDO को पीटा गया, उसे मंत्री अनिल विज ने किया सस्पेंड, जानिए मामला
नसीब सैनी/अमर उजाला, कैथल(हरियाणा)
Updated Sat, 12 May 2018 01:48 PM IST
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Haryana Minister Anil Vij
- फोटो : अमर उजाला
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जनस्वास्थ्य विभाग के जिस एसडीओ को ठेकेदार की लेबर को टेंकर न भेजने पर पीटा गया, उसे मंत्री अनिल विज ने सस्पेंड कर दिया। बिना किसी जांच और अपील के कष्ट निवारण समिति में विज ने अपना फरमान सुनाते हुए एसडीओ के खिलाफ केस दर्ज कराने के भी आदेश दिए। जब एसडीओ, अधीक्षण अभियंता और डीसी ने कहा कि शिकायत रंजिशन है, इसकी पहले जांच करा ली जाए तो मंत्री ने कहा कि आपको पता नहीं मैं कौन हूं? विज है मेरा नाम।
एसडीओ वेदपाल के अनुसार गत 8 मई को ठेकेदार की लेबर को पानी देने से इंकार करने पर उस पर गुहला कार्यालय में हमला कर दिया गया था। इस मामले में उसने नगर पालिका सचिव अशोक कुमार व दो अन्य के खिलाफ केस दर्ज करवाया था। घटना के बाद प्रेस कान्फ्रेंस कर उन्होंने इसके लिए एक विधायक को जिम्मेदार भी बताया था, जिसके कहने पर उन्होंने ठेकेदार की लेबर के लिए पानी का सरकारी टेंकर भेजने से मना कर दिया था।
इसके बाद 9 मई को विधायक कुलवंत बाजीगर के सोशल मीडिया पर तीन वीडियो वायरल हुए थे, जिसमें उन्होंने एसडीओ वेदपाल को मनोरोगी बताया था। दस मई को एक ऑडियो वायरल हुआ, जिसमें हमले का आरोपी नगर पालिका सचिव अशोक कुमार विधायक का नाम लेकर एसडीओ को धमकाते हुए जनस्वास्थ्य विभाग के कार्यालय को गिराने तक की धमकी देता सुना जा रहा है।
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विज नहीं माने
हमले के इस मामले में हो रही किरकिरी के बीच शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज लघु सचिवालय में कष्ट निवारण समिति की बैठक में पहुंचे। बैठक में भाजपा विधायक बाजीगर के हलके के गांव ककहेड़ी निवासी ठेकेदार दिग्विजय सिंह ने शिकायत की कि एसडीओ वेदपाल वर्क ऑर्डर काटने के नाम पर 20 प्रतिशत राशि मांग रहा है। यह सुनते ही विज ने कहा कि आप 20 प्रतिशत मांग रहे हो। एसडीओ को सस्पेंड किया जाए। इस पर वेदपाल ने कागज दिखाते हुए कहा कि शिकायतकर्ता गलत बोल रहा है और मेरे पास उसके खिलाफ सुबूत है। पहले आरोपों की जांच करा लें। अधीक्षक अभियंता एके पाहवा ने भी कहा कि आरोप रंजिशन लगाए जा रहे हैं, मामले की जांच होनी चाहिए। इस पर डीसी ने भी जांच की बात कही मगर विज नहीं माने।
ये तो औरंगजेब का राज हो गया : वेदपाल
एसडीओ वेदपाल की सुनवाई नहीं हुई तो उसने कहा कि साहब..ये तो औरंगजेब का राज हो गया। मामले की सीबीआई से जांच करवा लो..। इस पर नाराज विज ने कहा कि बाहर निकालो इसे और इसके खिलाफ केस भी दर्ज करवाकर शाम तक गिरफ्तार किया जाए। वेदपाल ने बताया कि पिछले दिनों उन पर जान लेने के उद्देश्य से हमला किया गया था। इसकी पुलिस को शिकायत दी तो विधायक ने इस ठेकेदार से शिकायत करवा दी। विधायक और ठेकेदार की काल डिटेल निकलवा लो। सब साबित हो जाएगा।
बड़े बोल : मेरा फैसला वापस नहीं होता
कष्ट निवारण समिति की बैठक के बाद लोक निर्माण विभाग विश्रामगृह में इंजीनियर्स डिप्लोमा एसोसिएशन मंत्री विज से मिली और एसडीओ के निलंबन के फैसले को वापस लेने की मांग की। मगर विज यह कह कर गाड़ी में बैठकर चले गए कि मेरा फैसला कभी वापस नहीं होता।
हकीकत : 24 घंटे में हुआ था फैसला वापस
एक मंत्री के कहने पर पिछले साल मार्च में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने झज्जर के तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. रमेश धनखड़ को सस्पेंड कर दिया था। लेकिन मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर के हस्तक्षेप के बाद 24 घंटे बाद ही डॉ. धनखड़ बहाल हो गए। डॉ. धनखड़ बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों सम्मानित हो चुके हैं।
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एसडीओ वेदपाल के अनुसार गत 8 मई को ठेकेदार की लेबर को पानी देने से इंकार करने पर उस पर गुहला कार्यालय में हमला कर दिया गया था। इस मामले में उसने नगर पालिका सचिव अशोक कुमार व दो अन्य के खिलाफ केस दर्ज करवाया था। घटना के बाद प्रेस कान्फ्रेंस कर उन्होंने इसके लिए एक विधायक को जिम्मेदार भी बताया था, जिसके कहने पर उन्होंने ठेकेदार की लेबर के लिए पानी का सरकारी टेंकर भेजने से मना कर दिया था।
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इसके बाद 9 मई को विधायक कुलवंत बाजीगर के सोशल मीडिया पर तीन वीडियो वायरल हुए थे, जिसमें उन्होंने एसडीओ वेदपाल को मनोरोगी बताया था। दस मई को एक ऑडियो वायरल हुआ, जिसमें हमले का आरोपी नगर पालिका सचिव अशोक कुमार विधायक का नाम लेकर एसडीओ को धमकाते हुए जनस्वास्थ्य विभाग के कार्यालय को गिराने तक की धमकी देता सुना जा रहा है।
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विज नहीं माने
हमले के इस मामले में हो रही किरकिरी के बीच शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज लघु सचिवालय में कष्ट निवारण समिति की बैठक में पहुंचे। बैठक में भाजपा विधायक बाजीगर के हलके के गांव ककहेड़ी निवासी ठेकेदार दिग्विजय सिंह ने शिकायत की कि एसडीओ वेदपाल वर्क ऑर्डर काटने के नाम पर 20 प्रतिशत राशि मांग रहा है। यह सुनते ही विज ने कहा कि आप 20 प्रतिशत मांग रहे हो। एसडीओ को सस्पेंड किया जाए। इस पर वेदपाल ने कागज दिखाते हुए कहा कि शिकायतकर्ता गलत बोल रहा है और मेरे पास उसके खिलाफ सुबूत है। पहले आरोपों की जांच करा लें। अधीक्षक अभियंता एके पाहवा ने भी कहा कि आरोप रंजिशन लगाए जा रहे हैं, मामले की जांच होनी चाहिए। इस पर डीसी ने भी जांच की बात कही मगर विज नहीं माने।
ये तो औरंगजेब का राज हो गया : वेदपाल
एसडीओ वेदपाल की सुनवाई नहीं हुई तो उसने कहा कि साहब..ये तो औरंगजेब का राज हो गया। मामले की सीबीआई से जांच करवा लो..। इस पर नाराज विज ने कहा कि बाहर निकालो इसे और इसके खिलाफ केस भी दर्ज करवाकर शाम तक गिरफ्तार किया जाए। वेदपाल ने बताया कि पिछले दिनों उन पर जान लेने के उद्देश्य से हमला किया गया था। इसकी पुलिस को शिकायत दी तो विधायक ने इस ठेकेदार से शिकायत करवा दी। विधायक और ठेकेदार की काल डिटेल निकलवा लो। सब साबित हो जाएगा।
बड़े बोल : मेरा फैसला वापस नहीं होता
कष्ट निवारण समिति की बैठक के बाद लोक निर्माण विभाग विश्रामगृह में इंजीनियर्स डिप्लोमा एसोसिएशन मंत्री विज से मिली और एसडीओ के निलंबन के फैसले को वापस लेने की मांग की। मगर विज यह कह कर गाड़ी में बैठकर चले गए कि मेरा फैसला कभी वापस नहीं होता।
हकीकत : 24 घंटे में हुआ था फैसला वापस
एक मंत्री के कहने पर पिछले साल मार्च में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने झज्जर के तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. रमेश धनखड़ को सस्पेंड कर दिया था। लेकिन मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर के हस्तक्षेप के बाद 24 घंटे बाद ही डॉ. धनखड़ बहाल हो गए। डॉ. धनखड़ बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों सम्मानित हो चुके हैं।