Punjab politics: पंजाब में फिर होगा भाजपा-अकाली दल का गठबंधन, खाका तैयार, सुखबीर ने पार्टी नेताओं से की चर्चा
सूत्रों के मुताबिक सुनील जाखड़, तरुण चुघ व सुखबीर बादल के बीच तीन बैठक हो चुकी हैं। गठबंधन की सहमति बन गई है लेकिन विधानसभा सीटों के बंटवारे को लेकर भाजपा व अकाली दल ने इसको पेंडिंग रख दिया है और पूरा फोकस लोकसभा चुनाव पर की तैयारी पर है।
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पंजाब में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के बीच गठबंधन पर सहमति बन गई है। बस औपचारिक घोषणा होना बाकी है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ व प्रदेश के नवनियुक्त प्रधान सुनील जाखड़ ने भाजपा व शिअद को फिर करीब लाने में अहम भूमिका है।
सीटों के बंटवारे का खाका तैयार कर दिया गया है। ड्राफ्ट के मुताबिक शिअद आठ सीटों पर लोकसभा चुनाव लड़ेगा जबकि भाजपा पांच सीटों पर। बसपा के लिए अकाली दल अपने खाते से एक सीट छोड़े या दो, इसमें भाजपा दखल नहीं देगी। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दलों का महागठबंधन माना जा रहा है।
गठबंधन की अटकलों के बीच बुधवार को शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल ने चंडीगढ़ स्थित आवास पर पार्टी के वरिष्ठ व टकसाली नेताओं के साथ बैठक की। सूत्रों के अनुसार इस बैठक में गठबंधन के प्रस्तावित मसौदे पर चर्चा की गई है। गठबंधन के बाद शिअद किस भूमिका में रहेगा, इस पर भी मंथन हुआ।
सूत्रों के अनुसार भाजपा की ओर से सुखबीर बादल को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल करने की पेशकश की गई है। तय शर्त के मुताबिक शिअद से केंद्र में एक ही मंत्री बनेगा। हरसिमरत कौर बादल के कैबिनेट मंत्री बनने को लेकर पेच फंस गया है। भाजपा के आला नेताओं ने हरसिमरत के स्थान पर सुखबीर बादल को मंत्रिमंडल में लेने की सलाह दी है ताकि उनको पंजाब की अफसरशाही का पूरा प्रोटोकॉल मिल सके और वह लोकसभा चुनाव में राज्य की ब्यूरोक्रेसी पर दबदबा कायम रख सकें।
दरअसल, भाजपा अपने साथ छोटे दलों को जोड़ने में जुटी हुई है। पंजाब में भाजपा का अकाली दल के साथ गठबंधन भी उसी रणनीति का हिस्सा है। गठबंधन से अलग होकर सियासी जमीन खो चुके अकाली दल की चिंता कुछ और है। बीजेपी-अकाली के गठबंधन में इस अकाली दल की भूमिका पहले जैसी नहीं रहने वाली है।
पंजाब में अब परिस्थितियां बदली हुई हैं। पंजाब में अपना वजूद खोने के डर से अकाली दल को भाजपा के अनुसार सीटों के फॉर्मूले पर सहमति जतानी पड़ रही है। पता चला है कि पिछले तीन दिन से सुखबीर बादल दिल्ली में डेरा डाले थे और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ उनके साथ लगातार दिल्ली में मीटिंग कर रहे थे।
सूत्रों के मुताबिक सुनील जाखड़, तरुण चुघ व सुखबीर बादल के बीच तीन बैठक हो चुकी हैं। गठबंधन की सहमति बन गई है लेकिन विधानसभा सीटों के बंटवारे को लेकर भाजपा व अकाली दल ने इसको पेंडिंग रख दिया है और पूरा फोकस लोकसभा चुनाव पर की तैयारी पर है।
कृषि कानूनों के मुद्दे पर टूटा था गठबंधन
कृषि कानूनों के विरोध में शिअद ने सितंबर 2020 में भाजपा से गठबंधन तोड़ लिया था। माना जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के निधन के बाद से ही बीजेपी-अकाली गठबंधन की जमीन तैयार होने लगी थी। जालंधर उपचुनाव के नतीजों से और ज्यादा साफ हो गया कि दोनों दलों का एक दूसरे के बिना गुजारा नहीं हो सकता।
अकाली दल से हरसिमरत और उनके पति सुखबीर बादल ही लोकसभा सदस्य हैं। राज्यसभा में लंबे अरसे बाद अकाली दल का कोई सांसद नहीं है। हरसिमरत 2014 से मोदी सरकार में फूड प्रोसेसिंग मंत्रालय का जिम्मा संभाल रही थीं, तीन कृषि कानूनों को लेकर किसानों की मोदी सरकार के प्रति नाराजगी देखकर उन्होंने 2020 में मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। हालांकि इस इस्तीफे का कोई राजनीतिक फायदा उठाने में अकाली दल नाकाम रहा। 2022 के विधानसभा चुनाव में उसका अब तक का सबसे कमजोर प्रदर्शन रहा, जब उसके मात्र तीन विधायक ही जीतकर 117 सदस्यीय विधानसभा का हिस्सा बने। इसके बाद हुए दो लोकसभा उपचुनाव में भी अकाली दल को शिकस्त ही मिली।
शिअद की अहम बैठक आज
शिअद ने गुरुवार को चंडीगढ़ स्थित पार्टी मुख्यालय में ही सभी जिलों के प्रधानों, हलका इंचार्जों और सीनियर नेताओं की मीटिंग रखी है। शिअद के सीनियर नेता दलजीत सिंह चीमा ने बताया कि मीटिंग दोपहर 12 बजे होगी। इस दौरान मौजूदा राजनीतिक हालातों पर चर्चा होगी। साथ ही भविष्य की रणनीति तय की जाएगी।