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पक्षीशाला विवाद: पर्यावरण मंत्रालय ने काम रोकने के दिये निर्देश, कहा- नियमों के तहत नहीं हो रहा काम
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चंडीगढ़। नगर वन में बनाए जा रहे पक्षीशाला पर पर्यावरण मंत्रालय ने रोक लगाने केनिर्देश दिए हैं। इससे यूटी प्रशासन के वन एवं वन्यजीव विभाग को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि विभाग ने इस पक्षीशाला का काम लगभग पूरा कर लिया है। वन विभाग को भेजे पत्र में मंत्रालय ने कहा है कि परियोजना केलिए परिंदों की खरीद, इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने व शुरुआत करने की प्रक्रिया संदेह के घेरे में है। ये सब नियमों केतहत नहीं हो रहा है।
सेकंड इनिंग एसोसिएशन के प्रधान व आरटीआई एक्टिविस्ट आरके गर्ग ने एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया के सेक्रेटरी, यूटी प्रशासन के सलाहकार और पशु अधिकार कार्यकर्ता व पर्यावरणविद मेनका गांधी को इस संबंध में शिकायत भेजी थी। मेनका गांधी ने यूटी प्रशासक को पत्र लिखकर इस प्रोजेक्ट को अवैध बताया था और तुरंत प्रभाव से इस पर रोक लगाने की बात कही थी। उन्होंने पत्र में कहा था कि कोई भी व्यक्ति इस देश में परिंदों को बेच नहीं सकता। जो ऐसा कर रहे हैं, उन्हें लगातार पकड़ा व जेल भेजा जा रहा है। परिंदे बेचने वालों से ऐसे पक्षी खरीदना, जो दूसरे देशों से स्मगलिंग कर मंगाए जाते हैं, पूरी तरह अवैध है। शिकायत के बाद अब मिनिस्ट्री ऑफ एनवायरनमेंट, फॉरेस्ट एंड क्लाइमेट चेंज वाइल्डलाइफ डिवीजन ने मुख्य वन्यजीव वार्डन को पत्र लिखकर निर्देश दिए हैं कि सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी न मिलने तक पक्षीशाला बनाने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए। साथ ही आदेश दिए गए हैं कि विवादित प्रोजेक्ट के उद्घाटन करने से भी बचें। असिस्टेंट इंस्पेक्टर जनरल ऑफ फॉरेस्ट सुनील शर्मा की तरफ से यह पत्र जारी किया गया है।
गौरतलब है कि पक्षीशाला के लिए 40 दुर्लभ किस्म की 1500 विदेशी बर्ड्स खरीदी जानी हैं। 60 गुणा 40 मीटर के दो एरिया यानी 2400-2400 स्क्वायर मीटर एरिया इन बर्ड्स के लिए तय किया गया है। इसमें नेट लगे होंगे और यह नेट 60 मीटर ऊंचे होंगे। प्रोजेक्ट 3.35 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा है।
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काम लगभग पूरा, जल्द ही पक्षीशाला का होना था उद्घाटन
गर्ग ने अपनी शिकायत में बोर्ड को बताया था कि विभाग की ओर से सिटी फॉरेस्ट में पक्षीशाला तैयार किया जा रहा है, जिसमें 40 दुर्लभ प्रजातियों के 1500 से अधिक पक्षियों को रखा जाएगा। इन पक्षियों को ओपन मार्केट से खरीदा जा रहा है, इसलिए प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले दिल्ली और गुजरात के हाईकोर्ट के निर्देशों को सही तरीके से लागू किया जाए। उन्होंने बताया कि विभाग ने इसका काम लगभग पूरा कर लिया है और इसका उद्घाटन करने की तैयारी की जा रही थी। पूर्व प्रशासक का यह ड्रीम प्रोजेक्ट था। उन्हीं के कहने पर इसे शुरू किया गया था। इससे पहले मुख्य वन संरक्षक देवेेंद्र दलाई ने एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया को पत्र लिखकर कहा था कि प्रोजेक्ट को लेकर सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी ली गई है।
वर्जन-
केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की एक टीम ने पक्षीशाला की साइट का निरीक्षण किया है। टीम के सदस्यों ने पक्षीशाला के काम पर संतुष्टि जताई है। इसमें किसी भी प्रकार के नियमों की अवहेलना नहीं की गई है। - देवेंद्र दलाई, मुख्य वन संरक्षक
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सेकंड इनिंग एसोसिएशन के प्रधान व आरटीआई एक्टिविस्ट आरके गर्ग ने एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया के सेक्रेटरी, यूटी प्रशासन के सलाहकार और पशु अधिकार कार्यकर्ता व पर्यावरणविद मेनका गांधी को इस संबंध में शिकायत भेजी थी। मेनका गांधी ने यूटी प्रशासक को पत्र लिखकर इस प्रोजेक्ट को अवैध बताया था और तुरंत प्रभाव से इस पर रोक लगाने की बात कही थी। उन्होंने पत्र में कहा था कि कोई भी व्यक्ति इस देश में परिंदों को बेच नहीं सकता। जो ऐसा कर रहे हैं, उन्हें लगातार पकड़ा व जेल भेजा जा रहा है। परिंदे बेचने वालों से ऐसे पक्षी खरीदना, जो दूसरे देशों से स्मगलिंग कर मंगाए जाते हैं, पूरी तरह अवैध है। शिकायत के बाद अब मिनिस्ट्री ऑफ एनवायरनमेंट, फॉरेस्ट एंड क्लाइमेट चेंज वाइल्डलाइफ डिवीजन ने मुख्य वन्यजीव वार्डन को पत्र लिखकर निर्देश दिए हैं कि सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी न मिलने तक पक्षीशाला बनाने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए। साथ ही आदेश दिए गए हैं कि विवादित प्रोजेक्ट के उद्घाटन करने से भी बचें। असिस्टेंट इंस्पेक्टर जनरल ऑफ फॉरेस्ट सुनील शर्मा की तरफ से यह पत्र जारी किया गया है।
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गौरतलब है कि पक्षीशाला के लिए 40 दुर्लभ किस्म की 1500 विदेशी बर्ड्स खरीदी जानी हैं। 60 गुणा 40 मीटर के दो एरिया यानी 2400-2400 स्क्वायर मीटर एरिया इन बर्ड्स के लिए तय किया गया है। इसमें नेट लगे होंगे और यह नेट 60 मीटर ऊंचे होंगे। प्रोजेक्ट 3.35 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा है।
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काम लगभग पूरा, जल्द ही पक्षीशाला का होना था उद्घाटन
गर्ग ने अपनी शिकायत में बोर्ड को बताया था कि विभाग की ओर से सिटी फॉरेस्ट में पक्षीशाला तैयार किया जा रहा है, जिसमें 40 दुर्लभ प्रजातियों के 1500 से अधिक पक्षियों को रखा जाएगा। इन पक्षियों को ओपन मार्केट से खरीदा जा रहा है, इसलिए प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले दिल्ली और गुजरात के हाईकोर्ट के निर्देशों को सही तरीके से लागू किया जाए। उन्होंने बताया कि विभाग ने इसका काम लगभग पूरा कर लिया है और इसका उद्घाटन करने की तैयारी की जा रही थी। पूर्व प्रशासक का यह ड्रीम प्रोजेक्ट था। उन्हीं के कहने पर इसे शुरू किया गया था। इससे पहले मुख्य वन संरक्षक देवेेंद्र दलाई ने एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया को पत्र लिखकर कहा था कि प्रोजेक्ट को लेकर सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी ली गई है।
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केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की एक टीम ने पक्षीशाला की साइट का निरीक्षण किया है। टीम के सदस्यों ने पक्षीशाला के काम पर संतुष्टि जताई है। इसमें किसी भी प्रकार के नियमों की अवहेलना नहीं की गई है। - देवेंद्र दलाई, मुख्य वन संरक्षक