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Loksabha Election: सबका इम्तिहान लेती है हरियाणा की धरती... यहां की सियासी पिच ऐसी-दिग्गज भी खा चुके हैं मात
Fri, 29 Mar 2024 01:04 PM IST
निवेदिता वर्मा
सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 29 Mar 2024 01:04 PM IST
सार
हरियाणा की सियासी धरती का इतिहास कुछ अलग किस्म का है। यहां ताऊ देवीलाल तक लगातार तीन बार हार का सामना करना पड़ा। इनके अलावा राजनीति के पीएचडी कहे जाने वाले चौधरी भजन लाल को एक सेवानिवृत्त अधिकारी ने धूल चटा दी थी।
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हरियाणा लोकसभा चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सियासत में कुछ भी संभव है। कब जनता किसी सामान्य नेता पर मेहरबान हो जाए और उसे देश की सबसे बड़ी पंचायत में पहुंचा दे। ठीक इसके इसके उल्ट ऐसा भी है कि बड़े-बड़े दिग्गजों को करारी हार का सामना करना पड़ा।
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लोकसभा चुनाव की बात करें तो हरियाणा के मतदाताओं ने कई उलटफेर किए हैं। सबसे अधिक चौंकाने वाले परिणाम रोहतक और करनाल की धरती ने दिए हैं। रोहतक के मतदाता काफी मुखर हैं और जिसका साथ देते हैं तो खुलकर देते हैं और जिसका विरोध करते हैं वह भी आमने-सामने करते हैं। इसके विपरीत करनाल के मतदाता यहां की मिट्टी की तरह काफी नरम हैं और अपने इरादे जाहिर नहीं करते। सभी नेताओं को मान सम्मान पूरा देते हैं, लेकिन जब मत की बारी आती है को जोर का झटका धीरे से देते हैं। इसी उलटफेर के चक्कर में कई नेताओं का राजनीतिक कॅरियर ही खत्म हो या फिर उनके सामने खुद और अपने दल को बचाने की चुनौती खड़ी हो गई।
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जब गढ़ में मात खा गए हुड्डा
पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके बेटे दीपेंद्र हुड्डा को भी रोहतक की जनता हार का स्वाद चखा चुकी है। बेशक रोहतक हुड्डा परिवार का गढ़ रहा है, लेकिन अरविंद शर्मा ने 2019 में इस गढ़ को तोड़कर किला फतेह किया था और दीपेंद्र हुड्डा को हराया था। इसी प्रकार सोनीपत से भाजपा के रमेश कौशिक ने कांग्रेस के प्रत्याशी भूपेंद्र सिंह हुड्डा को करारी मात दी।
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तीन बार सीएम रहे भजन लाल की टूट गई थी पीएचडी
करनाल की धरती बड़े नेताओं को रास नहीं आती। करनाल लोकसभा के मतदाताओं के नाम राजनीति के पीएचडी कहे जाने वाले तीन बार के प्रदेश के सीएम रहे भजन लाल की डिग्री तोड़ने का रिकार्ड दर्ज है। साल 1999 के लोकसभा चुनाव में भजन लाल आईडी स्वामी से हार गए थे। इसके बाद भजन लाल राजनीति में उबर नहीं पाए। एक साल पहले ही 1998 के चुनाव में भजन लाल ने भाजपा नेता आईडी स्वामी को 52061 वोट से हराया था। वहीं, 1999 के लोकसभा चुनाव में उन्हीं आईडी स्वामी से वह 1,47,854 वोट से हार गए। इसके बाद आईडी स्वामी को केंद्र में गृह राज्यमंत्री के तौर पर पद नवाजा गया था और आम से खास हो गए थे।
सुषमा स्वराज और चिरंजीलाल शर्मा को भी दी पटखनी
करनाल की धरती की बात करें तो यहां भाजपा की दिग्गज नेता रहीं सुषमा स्वराज को भी लगातार तीन बार हार का सामना करना पड़ा। साल 1980, 1984 और 1989 में उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा। तमाम कोशिशों के बावजूद करनाल की जनता ने स्वराज को नहीं अपनाया। इसी कड़ी में चार दफा करनाल से जीत दर्ज करने वाले पंडित चिरंजी लाल को उनके अंतिम चुनाव 1996 में यहां की जनता ने पटखनी दी।
पहले उप प्रधानमंत्री बनाया, फिर तीन बार हराया
चौधरी देवीलाल 1989 में हुए लोकसभा चुनाव में राजस्थान के सीकर और हरियाणा के रोहतक दोनों से लड़े थे। वह दोनों सीटे जीते और लोकसभा पहुंचे। इसके साथ ही जनता दल सरकार में उन्हें उप प्रधानमंत्री बनाया गया। क्योंकि ताऊ देवीलाल को दोनों में से एक सीट छोड़नी थी तो उन्होंने रोहतक सीट छोड़ दी। राजनीतिक के पंडित मानते हैं कि यह ताऊ की सबसे बड़ी सियासी भूल थी और उन्हें इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ा।रोहतक की सीट छोड़ने के चलते यहां की जनता इतनी नाराज हुई कि इसके बाद तीन बार उन्हें इस सीट से 1991, 1996, और 1998 में हार का सामना करना पड़ा। खास बात ये रही उनको हराने वाले भूपेंद्र सिंह हुड्डा उनसे उम्र और राजनीतिक तर्जुबे में काफी कम थे। इसके बाद भूपेंद्र सिंह हुड्डा बड़े नेता के रूप में उभरे और हाईकमान ने 2005 में उनको प्रदेश की कमान सौंपी।
ढह गया था राव का किला
अहीरवाल सीट राव बीरेंद्र सिंह और उनके बेटे राव इंद्रजीत सिंह का अभेद्य किला रहा है, लेकिन यह किला भी साल 1999 को चुनावों में ढह गया था। कारगिल युद्ध में शहीद की पत्नी डॉ. सुधा यादव ने अहीरवाल के दिग्गज राव इंद्रजीत सिंह को 1 लाख 39 हजार से अधिक वोटों से हराकर करारी मात दी थी। सुधा को 56.49 फीसद वोट मिले थे, जबकि राव इंद्रजीत 37 फीसद वोट मिले थे। उस वक्त राव कांग्रेस में थे और भाजपा को उनके मुकाबले कोई मजबूत प्रत्याशी नहीं मिल रहा था। वर्ष 2014 में उन्होंने भाजपा का दामन पकड़ लिया था। इस बार के चुनाव में वे भाजपा से चुनाव लड़ रहे हैं। वर्ष 2009 के पहले गुड़गांव लोकसभा क्षेत्र महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा हुआ करता था।