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सावधान रहिए! ठग कस्टमर केयर बनकर जाल में फंसा रहे हैं

Mon, 05 Apr 2021 02:23 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Mon, 05 Apr 2021 02:23 AM IST
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be vigilant Thugs are getting entangled in the trap by becoming customer care
चंडीगढ़। अगर आप इंटरनेट से किसी कंपनी का हेल्पलाइन नंबर निकालकर कस्टमर केयर को कॉल करने जा रहे हैं, तो जरा सावधान हो जाइए, क्योंकि शातिर ठग कोई न कोई लुभावना लालच या फिर आपके काम को पूरा करवाने का भरोसा जताकर बैंक खाते से लाखों रुपये की चपत लगा सकते हैं। चंडीगढ़ साइबर सेल को जनवरी 2021 से अब तक 32 शिकायतें मिल चुकी हैं।
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साइबर सेल के आंकड़ों के मुताबिक, हर तीसरे दिन औसतन एक शहरवासी इन ठगों के जंजाल में फंस रहा है। ये ठग किसी भी हाई प्रोफाइल कंपनी, बैंक/वॉलेट, गैस एजेंसी समेत अन्य कंपनियों का एक फर्जी अकाउंट बनाकर वेबसाइट पर अपलोड कर देते हैं। इस हेल्पलाइन में कस्टमर केयर के नंबर सहित अन्य कई जानकारियां होती हैं, जिसे देखकर कोई भी चकमा खा सकता है।
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खुद को कंपनी का कस्टमर केयर बताकर ग्राहक के मोबाइल पर एक फार्म या फिर लिंक को भेजकर इसे भरने को कहता है। जैसे ही फार्म में बैंक से जुड़ी जानकारी व अन्य जानकारियां भरने के बाद सबमिट किया जाता है, तभी ठगों का खेल शुरू हो जाता है और देखते ही देखते आपके मेहनत की कमाई पर चपत लग जाती है। कई बार लुभावनी स्कीम बताकर ओटीपी पूछकर बड़ी ठगी की जाती है।
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साइबर पुलिस ने वेबसाइट से कई नंबरों को हटाया
पंजाब यूनिवर्सिटी की पीएचडी की छात्रा ने एजेंसी में सिलिंडर वापस करने के लिए गैस एजेंसी का गूगल से नंबर निकालकर संपर्क किया था। इसके बाद उनसे 20 रुपये का फार्म भरवाकर एक लाख रुपये की चपत लगा गई थी। वहीं सेक्टर-16 निवासी एक डॉक्टर को गैस सब्सिडी का लालच देकर उनके बैंक खाते से हजारों रुपये निकाल लिए थे। लगातार शिकायतें मिलने पर साइबर पुलिस ने इंटरनेट से गैस एजेंसी के अलावा कई वेबसाइट पर चल रहे फर्जी नंबर को डिलीट करवाया है। हालांकि अभी भी कई नंबर है, जो लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं।

इन तरीकों को अपनाकर ठगी से बच सकते हैं
साइबर सेल विशेषज्ञ राजेश राणा का मानना है कि साइबर अपराध की बढ़ती वजह आबादी में 95 प्रतिशत लोगों के पास स्मार्ट मोबाइल फोन और कुछ हद तक लोगों में जागरूकता की कमी होना है। कुछ बातों को ध्यान में रखकर खुद के अलावा दूसरों को भी ठगों से बचाया जा सकता है-
1. बैंक/वॉलेट, गैस एजेंसी, ई-कॉमर्स, एंबुलेंस, बैंक आदि की आधिकारिक वेबसाइट के हेल्पलाइन नंबर्स पर ही कॉल करें।
2. गूगल पर सर्च करने पर आने वाला पहला ऑप्शन अक्सर फर्जी होता है। उस नंबर की जांच आधिकारिक वेबसाइट से जरूर करें।
3. अधिकतर बड़ी कंपनियों के हेल्पलाइन नंबर्स टोल फ्री होते हैं और इन नंबर की शुरुआत अक्सर 1800 से होती है।
4. हेल्पलाइन नंबर्स कभी भी आपसे बैंक खाते से संबंधित जानकारी नहीं मांगता। अगर कोई मांगता है, तो फोन काट दें।
5. आपकी सहायता के लिए अगर कोई मोबाइल पर लिंक भेजता है तो उसे क्लिक करने से बचें। साथ ही ओटीपी कोड किसी के साथ साझा न करें।
6. आपको एनी डेस्क, क्विक सपोर्ट, एयर ड्रॉयड आदि एप डाउनलोड करने को कहा जाए तो मना करें, क्योंकि इन एप से मोबाइल कंट्रोल हो सकता है।
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