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Chandigarh: बाजार में बिक रही सब्जियों और फलों में मात्रा से अधिक लेड! सेक्टर 26 मंडी से लिए गए सैंपल

Thu, 27 Jul 2023 02:04 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो Updated Thu, 27 Jul 2023 02:04 AM IST
सार

सेक्टर-26 की मंडी से लिए गए नमूनों में से शिमला मिर्च, करेला, मटर और मौसमी में लेड पाया गया है। मंडी में शिमला मिर्च हिमाचल से, करेला उत्तर प्रदेश, पंजाब व हिमाचल से, मटर लाहौर स्पीति, श्रीनगर व जम्मू-कश्मीर से और मौसमी की आवक दिल्ली से हो रही है।

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Level of lead in vegetables and fruits sold in Chandigarh found to be higher than quantity
vegetable - फोटो : amar ujala

विस्तार

चंडीगढ़ में बिकने वाली सब्जियों और फलों में लेड (सीसा) का स्तर मात्रा से अधिक पाया गया है। स्वास्थ्य विभाग के खाद्य सुरक्षा सेल की ओर से सेक्टर-26 की सब्जी और फल मंडी से लिए गए नमूनों की जांच में इसकी पुष्टि हुई है। नमूनों की जांच इंटरस्टेलर टेस्टिंग सेंटर (आईटीसी) प्राइवेट लिमिटेड पंचकूला और पंजाब बायो टेक्नोलॉजी इनक्यूबेटर (पीपीटीआई) कृषि एवं खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला मोहाली में हुई है। 
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जांच के दौरान सेक्टर-26 की मंडी से लिए गए नमूनों में से शिमला मिर्च, करेला, मटर और मौसमी में लेड पाया गया है। मंडी में शिमला मिर्च हिमाचल से, करेला उत्तर प्रदेश, पंजाब व हिमाचल से, मटर लाहौर स्पीति, श्रीनगर व जम्मू-कश्मीर से और मौसमी की आवक दिल्ली से हो रही है। फलों व सब्जियों में लेड जैसे घातक रासायनिक तत्व की पुष्टि के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच प्रक्रिया तेज कर दी है। 
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लिए गए 60 नमूने
मंडी में बुधवार को भी सब्जियों और फलों का नमूना लिया गया। यह क्रम पिछले दो दिनों से जारी है। अब तक 60 नमूने लिए जा चुके हैं। ऐसी स्थिति में हानिकारक तत्वों वाले फलों और सब्जियों की आपूर्ति करने वाले प्रदेशों को भी इसकी सूचना दी जाएगी। बता दें कि भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के मुताबिक खाद्य पदार्थों में लेड (सीसा) की अधिकतम मात्रा 2.5 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए। अगर इससे अधिक है तो खतरनाक की श्रेणी में आता है।

स्वास्थ्य सचिव की पहल
लोगों की सेहत को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग के निर्देश पर यह जांच शुरू की गई है। स्वास्थ्य सचिव के मुताबिक खाद्य सामग्रियों के साथ फलों और सब्जियों की जांच भी जरूरी है क्योंकि कई बार हमें पता ही नहीं चलता और हानिकारक तत्व शरीर में पहुंच जाते हैं और गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग को इसकी जिम्मेदारी दी गई है।


गंभीर बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं
वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन के एडवाइजर व आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. रमणीक सिंह बेदी का कहना है कि यदि मानव रक्त में 80 माइक्रोग्राम या उससे ज्यादा सीसा (लेड) मौजूद हो तो बेचैनी, दौरे की समस्या होने के साथ मौत तक का खतरा बढ़ जाता है। इससे कम सीसा की मौजूदगी भी मानव स्वास्थ्य, खासकर गुर्दे और खून के कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है।

गर्भ में पल रहे बच्चे की रोक देता है वृद्धि
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. गुंजन बवेजा ने बताया कि यह गर्भ में पल रहे बच्चे को भी नुकसान कर सकता है क्योंकि एक बार जब लेड रक्त प्रवाह में प्रवेश कर जाता है, तो यह सीधे बच्चों के मस्तिष्क में चला जाता है। गर्भावस्था के दौरान यह भ्रूण में स्थानांतरित हो सकता है, जिससे बच्चे का जन्म के समय कम वजन और वृद्धि की स्थिति धीमी हो सकती है। लेड विषाक्तता बच्चों एवं वयस्कों में एनीमिया और विभिन्न बीमारियों का कारण बन सकती है, जो न्यूरोलॉजिकल, अस्थि-पंजर और न्यूरोमस्क्यूलर सिस्टम को प्रभावित करती है।
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