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ऑनलाइन चुनाव को लेकर बार काउंसिल और एसोसिएशन आमने-सामने, हाईकोर्ट पहुंचा मामला
Wed, 16 Sep 2020 10:45 AM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Wed, 16 Sep 2020 10:45 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के चुनाव के मसले पर बार काउंसिल और बार एसोसिएशन आमने सामने हैं। 30 सितंबर को ऑनलाइन चुनाव करवाने के बार काउंसिल के निर्णय के खिलाफ अब बार एसोसिएशन ने आम बैठक बुलाकर चुनाव के बहिष्कार का एलान कर दिया है। साथ ही यह प्रस्ताव भी पारित कर दिया है कि इस साल एसोसिएशन के चुनाव नहीं होंगे और वर्तमान पदाधिकारी बने रहेंगे।
बैठक में उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन ने यह भी निर्णय लिया कि कि उच्च न्यायालय के जो वकील बार काउंसिल द्वारा गठित चुनाव कमेटी में शामिल हैं, वे इस कमेटी से अपना नाम वापस ले लें। जो नाम वापस नहीं लेगा उसके खिलाफ बार एसोसिएशन कार्रवाई कर सकती है क्योंकि बार काउंसिल द्वारा गठित चुनाव कमेटी अवैध है।
ऑनलाइन चुनाव की घोषणा के बाद से ही विरोध
गौरतलब है कि जब से इन चुनावों की घोषणा हुई है तब से कई स्तर पर इन ऑनलाइन चुनावों का विरोध हो रहा है। बार काउंसिल द्वारा जिस दिन इन चुनावों की घोषणा की गई थी उसके अगले ही दिन बार एसोसिएशन ने अपनी आपत्ति दर्ज करवा दी थी। बार एसोसिएशन ने कहा था कि चुनावों में पारदर्शिता और गुप्त मतदान सबसे महत्वपूर्ण होता है और ऑनलाइन चुनावों में इस पर कैसे ध्यान रखा जाएगा यह तय ही नहीं किया गया है।
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ऐसे में फ़िलहाल चुनाव की कोई जरूरत नहीं है। इसके बाद उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन की आम बैठक बुलाने का निर्णय लिया गया। मंगलवार को बार एसोसिएशन की आमसभा की बैठक में बड़ी संख्या में वकील शामिल हुए और चनाव के खिलाफ खुल कर विरोध दर्ज करवाया।
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बैठक में उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन ने यह भी निर्णय लिया कि कि उच्च न्यायालय के जो वकील बार काउंसिल द्वारा गठित चुनाव कमेटी में शामिल हैं, वे इस कमेटी से अपना नाम वापस ले लें। जो नाम वापस नहीं लेगा उसके खिलाफ बार एसोसिएशन कार्रवाई कर सकती है क्योंकि बार काउंसिल द्वारा गठित चुनाव कमेटी अवैध है।
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ऑनलाइन चुनाव की घोषणा के बाद से ही विरोध
गौरतलब है कि जब से इन चुनावों की घोषणा हुई है तब से कई स्तर पर इन ऑनलाइन चुनावों का विरोध हो रहा है। बार काउंसिल द्वारा जिस दिन इन चुनावों की घोषणा की गई थी उसके अगले ही दिन बार एसोसिएशन ने अपनी आपत्ति दर्ज करवा दी थी। बार एसोसिएशन ने कहा था कि चुनावों में पारदर्शिता और गुप्त मतदान सबसे महत्वपूर्ण होता है और ऑनलाइन चुनावों में इस पर कैसे ध्यान रखा जाएगा यह तय ही नहीं किया गया है।
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ऐसे में फ़िलहाल चुनाव की कोई जरूरत नहीं है। इसके बाद उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन की आम बैठक बुलाने का निर्णय लिया गया। मंगलवार को बार एसोसिएशन की आमसभा की बैठक में बड़ी संख्या में वकील शामिल हुए और चनाव के खिलाफ खुल कर विरोध दर्ज करवाया।
वकीलों ने ऑनलाइन चुनाव करवाने के खिलाफ दाखिल की याचिका
पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल द्वारा हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ की सभी बार एसोसिएशन के चुनाव ऑनलाइन करवाने के निर्णय को चुनौती देते हुए वकीलों ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की है। खंडपीठ बुधवार को याचिका पर सुनवाई करेगी।
इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय में 5 वकीलों ने याचिका दायर कर बताया है कि बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा ने 9 सितंबर को नोटिफिकेशन जारी कर उच्च न्यायालय के साथ ही चंडीगढ़ और पंजाब की सभी जिला और सब डिवीजन बार एसोसिएशन के चुनाव 30 सितंबर को और हरियाणा की सभी बार एसोसिएशन के चुनाव 1 अक्तूबर को करवाने का निर्णय लिया है।
याचिकाकर्ता वकीलों का कहना है कि बार काउसिंल ने यह निर्णय लेने से पहले किसी भी पक्ष से परामर्श तक नहीं किया। यह भी बताया गया है कि बार काउंसिल के कुछ सदस्यों ने जल्दबाजी में करवाए जाने वाले इन चुनावों का विरोध भी दर्ज करवा दिया है। जब एक ओर कोरोना महामारी के चलते अदालतें बंद हैं और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई हो रही है।
ऐसे में चुनाव करवाया जाना जरूरी नहीं है। लिहाजा चुनावों की इस नोटिफिकेशन को रद्द किया जाए।
इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय में 5 वकीलों ने याचिका दायर कर बताया है कि बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा ने 9 सितंबर को नोटिफिकेशन जारी कर उच्च न्यायालय के साथ ही चंडीगढ़ और पंजाब की सभी जिला और सब डिवीजन बार एसोसिएशन के चुनाव 30 सितंबर को और हरियाणा की सभी बार एसोसिएशन के चुनाव 1 अक्तूबर को करवाने का निर्णय लिया है।
याचिकाकर्ता वकीलों का कहना है कि बार काउसिंल ने यह निर्णय लेने से पहले किसी भी पक्ष से परामर्श तक नहीं किया। यह भी बताया गया है कि बार काउंसिल के कुछ सदस्यों ने जल्दबाजी में करवाए जाने वाले इन चुनावों का विरोध भी दर्ज करवा दिया है। जब एक ओर कोरोना महामारी के चलते अदालतें बंद हैं और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई हो रही है।
ऐसे में चुनाव करवाया जाना जरूरी नहीं है। लिहाजा चुनावों की इस नोटिफिकेशन को रद्द किया जाए।