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Chandigarh News: जीएमएसएच-16 में हाजिरी की मशीनें खुद गैरहाजिर
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चंडीगढ़। जनता के पैसे से स्वास्थ्य विभाग ने कर्मचारियों की बायोमीट्रिक हाजिरी के लिए उपकरण तो खरीद लिए लेकिन लंबे समय तक उनका इस्तेमाल नहीं हुआ। जीएमएसएच-16 में खरीदे गए 20 फिंगरप्रिंट स्कैनरों में से 19 करीब दो साल तक स्टोर में पड़े रहे। इस दौरान सरकारी धन उपकरणों में फंसा रहा। मामले का खुलासा ऑडिट रिपोर्ट की जांच में हुआ है।
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार अस्पताल में 2021-22 में 20 फिंगरप्रिंट स्कैनर खरीदे गए थे। ये स्कैनर अस्पताल को मई 2023 को मिले। इनमें से सिर्फ एक स्कैनर का इस्तेमाल किया गया जबकि बाकी 19 मशीनें 18 मार्च 2025 तक स्टोर में पड़ी रहीं। इसके अगले दिन यानी 19 मार्च 2025 को इन्हें आईटी सेल को जारी किया गया। एक अन्य स्कैनर मई 2023 में प्रशासनिक ब्लॉक को दिया गया था। फिंगरप्रिंट स्कैनर का इस्तेमाल कर्मचारियों की बायोमीट्रिक हाजिरी दर्ज करने के लिए किया जाता है। कर्मचारी मशीन पर उंगली लगाकर उपस्थिति दर्ज करते हैं और इसका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होता है।
जरूरत पर सवाल, वारंटी का भी नहीं मिला पूरा लाभ
ऑडिट के अनुसार स्कैनरों के लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं होने से सरकारी धन उपकरणों में अटका रहा। वहीं, मशीनों के लंबे समय तक स्टोर में पड़े रहने के कारण उनकी वारंटी अवधि का भी पूरा लाभ नहीं मिल सका। ऑडिट ने इसे खरीद से पहले वास्तविक जरूरत का पर्याप्त आकलन नहीं किए जाने का संकेत माना है। रिपोर्ट में इसे जरूरत से अधिक खरीद और सार्वजनिक खरीद नियमों के विपरीत बताया गया है। लंबे समय तक उपकरणों का इस्तेमाल नहीं होने से उनसे मिलने वाला संभावित लाभ भी नहीं मिल सका।
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ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार अस्पताल में 2021-22 में 20 फिंगरप्रिंट स्कैनर खरीदे गए थे। ये स्कैनर अस्पताल को मई 2023 को मिले। इनमें से सिर्फ एक स्कैनर का इस्तेमाल किया गया जबकि बाकी 19 मशीनें 18 मार्च 2025 तक स्टोर में पड़ी रहीं। इसके अगले दिन यानी 19 मार्च 2025 को इन्हें आईटी सेल को जारी किया गया। एक अन्य स्कैनर मई 2023 में प्रशासनिक ब्लॉक को दिया गया था। फिंगरप्रिंट स्कैनर का इस्तेमाल कर्मचारियों की बायोमीट्रिक हाजिरी दर्ज करने के लिए किया जाता है। कर्मचारी मशीन पर उंगली लगाकर उपस्थिति दर्ज करते हैं और इसका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होता है।
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जरूरत पर सवाल, वारंटी का भी नहीं मिला पूरा लाभ
ऑडिट के अनुसार स्कैनरों के लंबे समय तक इस्तेमाल नहीं होने से सरकारी धन उपकरणों में अटका रहा। वहीं, मशीनों के लंबे समय तक स्टोर में पड़े रहने के कारण उनकी वारंटी अवधि का भी पूरा लाभ नहीं मिल सका। ऑडिट ने इसे खरीद से पहले वास्तविक जरूरत का पर्याप्त आकलन नहीं किए जाने का संकेत माना है। रिपोर्ट में इसे जरूरत से अधिक खरीद और सार्वजनिक खरीद नियमों के विपरीत बताया गया है। लंबे समय तक उपकरणों का इस्तेमाल नहीं होने से उनसे मिलने वाला संभावित लाभ भी नहीं मिल सका।
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