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धूम्रपान छोड़कर हुआ कोई भी कैंसर सैन्य सेवा के कारण माना जएगा : हाईकोर्ट

Mon, 06 Oct 2025 08:16 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 06 Oct 2025 08:16 PM IST
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Any cancer caused by quitting smoking will be considered as a result of military service: High Court
-एएफटी के फैसले को बरकरार रखते हुए हाईकोर्ट ने केंद्र की अपील खारिज की
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-एएफटी ने कैंसर को माना था सेवा के कारण, विशेष पारिवारिक पेंशन का दिया था आदेश
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अमर उजाला ब्यृूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि सैन्य कर्मियों में धूम्रपान से होने वाले कैंसर को छोड़कर सभी प्रकार के कैंसर सैन्य सेवा के कारण माने जाएंगे। कोर्ट ने कहा कि सामान्य कोशिकाओं का घातक ट्यूमर कोशिकाओं में परिवर्तन सैन्य कर्मियों की ओर से लंबे समय तक लगातार तनाव सहने के परिणामस्वरूप हो सकता है।
हाईकोर्ट ने आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल (एएफटी) चंडीगढ़ के 2019 के फैसले को बरकरार रखते हुए ये आदेश पारित किए जिसमें निर्देश दिया गया था कि कुमारी सलोचना वर्मा को 24 जून, 2009 को कैंसर के कारण उनके बेटे की मृत्यु के बाद विशेष पारिवारिक पेंशन दी जाए। केंद्र ने एएफटी के आदेश को चुनाैती देते हुए यह तर्क दिया था कि यह बीमारी न तो सैन्य सेवा के कारण थी और न ही इससे बढ़ी थी। मेडिकल बोर्ड के निष्कर्षों का हवाला देते हुए यह तर्क दिया था कि कैंसर एक दुर्लभ और आक्रामक स्थिति होने के कारण, सैन्य ड्यूटी के तनाव से जुड़ा नहीं हो सकता।
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यह स्वीकार नहीं किया जा सकता कि भर्ती के समय कैंसर का पता नहीं चला
केंद्र की याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि सैनिक छह साल से सेवा में था इसलिए यह स्वीकार नहीं किया जा सकता कि भर्ती के समय कैंसर का पता नहीं चला। चयन के समय कुमारी सलोचना वर्मा के बेटे की चिकित्सकीय जांच की गई और उसे हर तरह से स्वस्थ पाया गया था। उसके बेटे की ओर से सेना में छह साल सेवा देने के बाद ही वह रेट्रोपेरिटोनियल सार्कोमा विद वाइडस्प्रेड मेटास्टेसिस (कैंसर का एक प्रकार) से पीड़ित पाया गया। कोर्ट ने कहा कि इस अदालत में यह दिखाने के लिए कोई ठोस सबूत, सामग्री या विस्तृत मेडिकल रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया है कि यह बीमारी सैन्य सेवा के कारण नहीं है। केंद्र की याचिका खारिज करते हुए पीठ ने कहा कि बीमारी का कारण सैन्य सेवा ही है और मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट मृतक सैनिक की मां से विशेष पारिवारिक पेंशन का दावा करने का अधिकार नहीं छीन सकती।
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