{"_id":"6aaf5053c07c0e6b8d079c38","slug":"questions-raised-over-paperless-initiative-paper-worth-lakhs-purchased-in-haryana-even-after-10-years-2026-09-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"पेपरलेस योजना पर सवाल: 10 साल बाद भी हरियाणा में लाखों के कागज खरीदे गए, आरटीआई में खुलासा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पेपरलेस योजना पर सवाल: 10 साल बाद भी हरियाणा में लाखों के कागज खरीदे गए, आरटीआई में खुलासा
Sun, 20 Sep 2026 08:47 AM IST
Naveen
कुलदीप शुक्ला, चंडीगढ़
कुलदीप शुक्ला, चंडीगढ़
Published by: Naveen
Updated Sun, 20 Sep 2026 08:47 AM IST
सार
ई-ऑफिस का उद्देश्य सरकारी फाइलों और कार्यालयी कामकाज को डिजिटल बनाकर कागज पर निर्भरता घटाना था। लेकिन निदेशालय की शाखाओं में लगातार खरीद से सवाल उठता है कि व्यवस्था कितनी शाखाओं में लागू हुई और कितना काम अब भी कागज पर हो रहा है।
विज्ञापन
मंत्री गौरव गौतम।
- फोटो : संवाद
विस्तार
हरियाणा के औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग को पेपरलेस बनाने की योजना पर 26 लाख रुपये खर्च करने का दावा किया गया था, लेकिन दस साल पहले ई-ऑफिस लागू करने की घोषणा के बाद भी 14 जून 2026 तक कागज और स्टेशनरी की खरीद के लिए तकरीबन 26 लाख रुपये के भुगतान दर्ज हैं।
विज्ञापन
25 मई 2016 को जारी हरियाणा सरकार ने औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग को राज्य का पहला पेपरलेस विभाग बनाने की योजना बताई थी। ई-ऑफिस व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से लागू होनी थी। पहले चरण में मुख्यमंत्री कार्यालय, औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री, विभाग के प्रधान सचिव, निदेशालय और पंचकूला, कैथल, रोहतक व अंबाला शहर के सरकारी आईटीआई शामिल किए गए थे। बाद में इसे प्रदेश के सभी आईटीआई तक विस्तार देने और छह महीने में पूरी तरह चालू करने का लक्ष्य था।
विज्ञापन
इस तरह तैयारी में 26 लाख खर्च
उस समय विभाग के पास 143 सरकारी और 115 निजी आईटीआई का नेटवर्क था। चार हजार से अधिक कर्मचारी कार्यरत थे। नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर और एनआईसी सर्विसेज इंक को सॉफ्टवेयर, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता की जिम्मेदारी दी गई थी। विभाग ने सॉफ्टवेयर व विशेषज्ञता के लिए नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर सर्विसेज इंकॉर्पोरेटेड (एनआईसीएसआई) को 26 लाख रुपये जमा करवाए थे। हरियाणा राज्य डेटा सेंटर ने सर्वर उपलब्ध कराया था। आरटीआई में निदेशालय की विभिन्न शाखाओं के लिए ए-4, लीगल, फोटोकॉपी और अन्य स्टेशनरी कागज की खरीद की गई है।
विज्ञापन
साल-दर-साल कागज की खरीद
साल - राशि(लाख)
2016 - 5,15,230
2017 - 1,50,700
2018 - 54,714
2019 - 1,45,100
2020-23 - 1,25,050
2024 - 5,03,155
2025 - 4,69,150
14 जून 2026 तक 5,37,343 रुपये का खर्च
पेपरलेस व्यवस्था पर सवाल
ई-ऑफिस का उद्देश्य सरकारी फाइलों और कार्यालयी कामकाज को डिजिटल बनाकर कागज पर निर्भरता घटाना था। लेकिन निदेशालय की शाखाओं में लगातार खरीद से सवाल उठता है कि व्यवस्था कितनी शाखाओं में लागू हुई और कितना काम अब भी कागज पर हो रहा है। खरीद अपने आप में ई-ऑफिस के विफल होने का प्रमाण नहीं है, क्योंकि कुछ कामों में कागज की जरूरत बनी रह सकती है।
अधिकारी के अनुसार
ई-ऑफिस में पेपर की खरीद को लेकर विभागीय स्तर पर 15 दिन में जानकारी मांगी गई है। अगर ई-ऑफिस प्रणाली लागू करने में कोई खामियां मिलती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एक्शन लूंगा। -गौरव गौतम, मंत्री, युवा सशक्तीकरण एवं उद्यमिता।