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Amritpal Singh: अमृतपाल पर नया खुलासा, जम्मू-कश्मीर से बनवाए गए थे हथियारों के अवैध लाइसेंस, पूर्व सैनिकों...

Mon, 03 Apr 2023 10:35 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़ Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 03 Apr 2023 10:35 AM IST
सार

18 मार्च से फरार वारिस पंजाब दे प्रमुख और कट्टरपंथी अमृतपाल सिंह  अभी तक फरार है।  अमृतपाल के सुरक्षा गार्डों के लाइसेंस भी अभी तक रद्द नहीं किए गए हैं। सीबीआई को संदेह है कि जेएंडके या यूटी से लाइसेंस बनवाए गए हैं।
 

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Amritpal Singh new update License of Amritpal singh security guards not canceled
अमृतपाल सिंह। - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

खालिस्तान समर्थकों के खिलाफ अभियान के बीच यह तथ्य उजागर हुआ है कि जम्मू-कश्मीर में कट्टरपंथी अमृतपाल सिंह के सुरक्षा गार्डों के हथियारों के लाइसेंस आज तक रद्द नहीं किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार भगोड़े अमृतपाल के दो निजी सुरक्षा अधिकारी- 19वीं सिख रेजिमेंट के वरिंदर सिंह और 23वीं सशस्त्र पंजाब रेजिमेंट के तलविंदर सिंह, जोकि सेना से रिटायर हैं, ने अपने लाइसेंस पड़ोस के केंद्र शासित प्रदेश के जिलों से या तो रिन्यू करवाए हैं या नए बनवा लिए हैं। 
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अधिकारियों का कहना है कि पंजाब के एडीजीपी (इंटेलिजेंस) द्वारा गत 12 जनवरी को, अमृतपाल के खिलाफ शुरू किए गए अभियान से करीब छह हफ्ते पहले, संबंधित जिला उपायुक्तों को पत्र भेजे जाने के बावजूद, अमृतपाल के ये सुरक्षा गार्ड खुले तौर पर हथियारों का प्रदर्शन करते रहे और इनके लाइसेंस अब तक रद्द नहीं किए गए।
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गौरतलब है कि शस्त्र अधिनियम की धारा 17 (3) (बी) के तहत, लाइसेंसिंग प्राधिकरण के पास सार्वजनिक सुरक्षा के लिए आवश्यक होने पर लाइसेंस को निरस्त या निलंबित करने का अधिकार होता है। अमृतसर जिले के कोट धर्मचंद कलां के तलविंदर सिंह और असम में कैद वरिंदर सिंह उर्फ फौजी दोनों के शस्त्र लाइसेंस क्रमशः रामबन और किश्तवाड़ जिलों के उपायुक्तों द्वारा रद्द कर दिए गए थे। इस साल 9 मार्च को लाइसेंस रद्द करने के आदेश के अनुसार, वरिंदर सिंह का लाइसेंस 24 जुलाई 2017 से रिन्यू नहीं हुआ था।
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जम्मू-कश्मीर से जारी होते रहे हथियारों के अवैध लाइसेंस
अधिकारियों ने बताया कि जम्मू-कश्मीर से समय-समय पर हथियारों के नकली लाइसेंस जारी करने के मामले सामने आते रहे हैं और सीबीआई ऐसे मामलों की जांच कर रही है। 16 अक्टूबर, 2018 को सीबीआई ने जम्मू-कश्मीर के 22 जिलों में 2012 से 2016 के बीच 2.78 लाख शस्त्र लाइसेंस जारी करने में हुई धांधली को लेकर एफआईआर का पहला सेट दर्ज किया था। 

सामने आई कुछ हथियार डीलरों की भूमिका 

दिसंबर 2019 में, सीबीआई ने श्रीनगर, जम्मू, गुरुग्राम और नोएडा में कुपवाड़ा, बारामूला, उधमपुर, किश्तवाड़, शोपियां, राजौरी, डोडा और पुलवामा के तत्कालीन जिला कलेक्टरों और मजिस्ट्रेटों के करीब दर्जन परिसरों पर छापे मारे थे। सीबीआई के प्रवक्ता आरसी जोशी ने एक लिखित बयान में कहा कि जांच और दस्तावेजों की छानबीन में कुछ हथियार डीलरों की भूमिका सामने आई, जिन्होंने संबंधित जिलों के तत्कालीन डीएम और एडीएम के साथ मिलकर, अयोग्य व्यक्तियों को कथित रूप से हथियारों के अवैध लाइसेंस जारी कराए थे। 

जिनको लाइसेंस दिए गए, वे उन स्थानों के निवासी नहीं थे, जिन पतों के आधार पर लाइसेंस जारी किए गए थे। सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि लोक सेवकों ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर जम्मू-कश्मीर के अनिवासियों को नियमों का उल्लंघन करते हुए शस्त्र लाइसेंस जारी किए और रिश्वत ली।

नशेड़ी और पूर्व सैनिक लेकर बना रहा था संगठन
18 मार्च को पंजाब पुलिस द्वारा वारिस पंजाब दे संगठन पर कार्रवाई शुरू करने के बाद से कट्टरपंथी अमृतपाल सिंह फरार है। हालांकि उसके कई सहयोगियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि हाल ही में हथियारों के लाइसेंस रद्द करने से सीबीआई को अब पंजाब पुलिस द्वारा एनएसए के तहत गिरफ्तार किए गए कुछ आरोपियों से पूछताछ करने की अनुमति मिल जाएगी। 

 

पूर्व सैन्यकर्मी दे रहे थे नए रंगरूटों को हथियारों का प्रशिक्षण

अमृतपाल सिंह एक सशस्त्र गिरोह की स्थापना के लिए पूर्व सैनिकों और नशा करने वालों की भर्ती कर रहा था, जिसे आसानी से आतंकवादी समूह में बदला जा सकता था। पूर्व सैन्यकर्मी नए रंगरूटों को हथियारों का प्रशिक्षण दे रहे थे। पिछले साल अगस्त में दुबई से लौटने से पहले ही, अमृतपाल ने तलविंदर सिंह और वरिंदर सिंह को अपने सहयोगी के रूप में चुन लिया था। 

आतंकवादी दिलावर के नक्शे कदम पर चलने के लिए प्रेरित और प्रशिक्षित थे

अमृतपाल के सात निजी सुरक्षा अधिकारी युवा थे, जो पुनर्वास के लिए उसके नशामुक्ति केंद्र में शामिल हुए थे, लेकिन बंदूक की संस्कृति को अपनाने और मारे गए आतंकवादी दिलावर सिंह के नक्शे कदम पर चलने के लिए प्रेरित और प्रशिक्षित थे, जिसने खुद को उड़ाकर पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या कर दी थी।

अधिकारियों ने कहा कि पूर्व सैनिकों पर ध्यान केंद्रित करना खालिस्तान समर्थक अमृतपाल के लिए फायदेमंद था, क्योंकि उनके पास पहले से ही हथियार थे और जो उसके संगठन को कानून से बचने में मदद कर सकते थे।

यह भी पढ़ें: Amritpal Singh: अब साथ नहीं अमृतपाल और पपलप्रीत, 29 मार्च को बदला अपना रास्ता, एप से साथियों के संपर्क में
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