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कारोबार जगत से जुड़े एक्सपर्ट बोले- संकट है... सरकार साथ दे तो फिर खड़ी हो जाएगी इंडस्ट्री

Thu, 11 Jun 2020 12:09 PM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 11 Jun 2020 12:09 PM IST
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Amar Ujala Webinar on Corona and Lockdown Effect on Chandigarh Industry
वेबिनार ज्वॉइन करते कारोबारी - फोटो : अमर उजाला
कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित कारोबार की दुनिया हुई है। करोड़ों के नुकसान के साथ इन पर निर्भर लोगों के जीवनयापन का संकट खड़ा हो गया है। दोबारा से पैर जमाने के लिए उद्यमियों को नए सिरे से शुरुआत करनी होगी, जो आसान नहीं है। सरकार के सहयोग के बिना यह असंभव है। सरकार ने लाखों-करोड़ों के पैकेज की घोषणा की लेकिन उद्योगों को फायदा नहीं हुआ।
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आखिर सरकार को क्या कदम उठाने चाहिए? भविष्य के लिए उद्यमियों को क्या बदलाव करने होंगे? ऐसे कई सारे मुद्दों पर अमर उजाला ने बुधवार को एक वेबिनार के जरिए कारोबार जगत से जुड़े विशेषज्ञों से बातचीत की। टाइ चंडीगढ़ के प्रेसिडेंट व ग्रेसेल टेक्नोलॉजी के सीईओ मुनीष जौहर ने बताया कि अभी सबसे बड़ी दिक्कत उन लोगों को आने वाली है जो किराए पर जगह लेकर बिजनेस कर रहे हैं। लॉकडाउन में पूरा कारोबार ठप रहा। ऐसे में दो से तीन महीने का किराया खड़ा हो गया है।
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मोल-भाव चल रहा है, लेकिन बात नहीं बनने वाली। इसके लिए सरकार को कनाडा की तरह सहयोग करना होगा। कनाडा ने प्रभावित बिजनेसमैन का 75 फीसदी किराया देने का फैसला लिया है। लॉकडाउन पीरियड में हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकार का  सहयोग मिल जाए तो इंडस्ट्री फिर से खड़ी हो जाएगी। युवा उद्यमी कौशल सिंह ने कहा कि यदि सरकार सचमुच उद्योगों की मदद करना चाहती है तो प्रभावित तीन महीने के बिजली के फिक्स चार्ज और लोन का ब्याज माफ कर देना चाहिए।
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रवैया बदलने की जरूरत है

युवा उद्यमी सिद्धांत दास ने कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन को बिजनेस के प्रति रवैया बदलने की जरूरत है। कई लोग अपना बिजनेस बढ़ाना चाहते हैं, लेकिन बायलॉज की दुहाई देकर उनके कदम रोक दिए जाते हैं। समय के साथ बायलॉज में बदलाव करने चाहिए। बिजनेस बढ़ेगा तो रोजगार के साथ रेवन्यू भी बढ़ेगा मगर प्रशासन अपने रवैया को बदल नहीं पा रहा।

वहीं, मानव व्यवहार को करीब से देखने वाले पंजाब यूनिवर्सिटी के सोशियोलॉजी डिपार्टमेंट के पीएचडी स्कॉलर दीपक जुगरान ने कहा कि मौजूदा माहौल से ग्राहक पैनिक हैं। यह वक्त उनमें विश्वास बढ़ाने का है। उन्हें लगना चाहिए कि वह यदि रेस्टोरेंट या किसी दुकान में जाएंगे तो उन्हें सुरक्षित माहौल मिलेगा। संकट का समय है। ऐसे में उद्यमियों को भी उम्मीद रखनी चाहिए।

सिटी हार्ट ग्रुप आफ होटल्स के डायरेक्टर बलदेव नारंग ने बताया कि पर्यटन गतिविधियां खत्म होने से होटल इंडस्ट्री लगभग खत्म हो चुकी है। अभी कोई रोशनी की किरण भी नहीं दिखाई दे रही। यदि सरकार ने जल्द ही राहत नहीं दी तो होटल इंडस्ट्री से जुड़े लोग सड़क पर आ जाएंगे।

लव फॉर मैथ डॉट कॉम के फाउंडर करण सिंगला ने बताया कि लॉकडाउन में एजुकेशन से जुड़े स्टार्टअप का कारोबार बढ़ा है, मगर सरकार का सपोर्ट भी चाहिए होगा क्योंकि कई ऐसे बच्चे हैं, जो वाई-फाई और मोबाइल व लैपटॉप खरीदने में असमर्थ हैं।

भारत सरकार स्टार्टअप को एमएसएमई के दायरे में लाए

टाइ चंडीगढ़ के प्रेसिडेंट व ग्रेसेल टेक्नोलॉजी के सीईओ मुनीष जौहर ने बताया कि भारत में करीब 50 हजार स्टार्टअप हैं, जो कोरोना की वजह से आर्थिक तंगी झेल रहे हैं। सरकार का पूरा फोकस एमएसएमई पर है। टाई पैन इंडिया ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर मांग की है कि स्टार्टअप को एमएमएमई के दायरे में लाया जाए। इससे स्टार्टअप को संजीवनी मिलेगी, जो आत्मनिर्भर व रोजगार के क्षेत्र में फायदेमंद साबित होगा।

चंडीगढ़ प्रशासन पंजाब के वित्तमंत्री की तरह ले सीधे फीडबैक
युवा उद्यमी सिद्धांत दास ने बताया कि कोरोना संकट में पंजाब के वित्तमंत्री मनप्रीत बादल व्यापारियों के पास जाकर सीधे मिलकर उनसे फीडबैक ले रहे थे। इससे उन्हें उद्योगों की जमीनी हकीकत का पता है। चंडीगढ़ प्रशासन को भी कुछ इस तरह की पहल करनी होगी, जिससे बिजनेस कम्युनिटी के लोग अपनी समस्या व सुझाव बता पाएं। एक अन्य सुझाव देते हुए उन्होंने कहा कि अधिकारियों की सैलरी रेवन्यू जेनरेट से जोड़ देनी चाहिए। इससे उनमें मोटिवेशन आएगी और सरकारी अड़चनें भी जल्दी दूर होंगी।

तीन माह के बिजली बिल पर फिक्स चार्ज हटा ले प्रशासन
युवा उद्यमी कौशल सिंह ने कहा कि जिस व्यापारी वर्ग से सरकार सहयोग चाह रही है, उसे भी सहयोग की जरूरत है। सरकार औद्योगिक और वाणिज्यिक संस्थानों से तीन माह के लिए बिजली बिल पर फिक्स चार्ज हटा ले। वास्तविक खपत पर बिजली बिल जारी हों। अगले तीन महीने तक ब्याज में पूर्ण छूट दी जाए। अगले तीन महीने तक कर्मचारियों का पीएफ और ईएसआई का खर्च सरकार वहन करे। वित्तीय वर्ष 2020-2021 के लिए सभी व्यापारिक संपत्तियों पर संपत्ति कर आधा कर दिया जाए।

बिजनेसमैन को छोटे टारगेट फिक्स करने होंगे

पंजाब यूनिवर्सिटी के सोशियोलॉजी डिपार्टमेंट के पीएचडी स्कॉलर दीपक जुगरान ने बताया कि बिजनेसमैन को जीरो डिफेक्ट, जीरो इफेक्ट की नीति को अपनाना होगा। ऐसे टारगेट फिक्स करने होंगे, जिन्हें पूरा किया जा सके। ग्राहकों के बदलावों पर बारीकी से नजर रखनी होगी और उन्हीं के मुताबिक उद्योगों में बदलाव लाने होंगे। अर्थव्यवस्था के 200 सालों के आकलन करें तो पता चलता है कि समय-समय पर पुरानी अर्थव्यवस्था नया रूप धारण करती है। इस स्थिति में संयम और धैर्य रखने की जरूरत है।

देश की अर्थव्यवस्था संभालनी है तो सरकार हमारी मदद करे
सिटी हार्ट ग्रुप आफ होटल्स के डायरेक्टर बलदेव नारंग ने जब तक कोरोना नहीं जाएगा, तब तक होटल इंडस्ट्री नहीं चल पाएगी। हमें कोरोना से बचना है, देश की अर्थव्यवस्था के साथ स्टाफ को भी संभालना है। यह सब सरकार के सहयोग के बिना संभव नहीं है। हमें तो आगे भी कोई उम्मीद भी नहीं दिख रही है। सरकार की सहायता के बिना आगे नहीं बढ़ सकते। सरकार को किराए, प्रापर्टी टैक्स, बिजली बिल, जीएसटी, टीडीएस में राहत देनी होगी।

ऑनलाइन एजुकेशन का बिजनेस बढ़ा, फायदे भी
लव फॉर मैथ डॉट कॉम के फाउंडर करण सिंगला ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान ऑनलाइन एजुकेशन इंडस्ट्री को काफी फायदा मिला है। कोरोना की वजह से जब सबकुछ ठप हो गया था तो ऑनलाइन प्लेटफार्म के जरिए बच्चों की पढ़ाई जारी रही। स्टार्टअप शुरू करने वाले नौजवानों को नया प्लेटफार्म मिला। बच्चों को पढ़ाई का नया विकल्प मिला। हालांकि अभी टीचर और स्टूडेंट्स इसके प्रति फ्रेंडली नहीं है। यहां पर सरकार को पहल करनी चाहिए थी कि वह ऑनलाइन एजुकेशन इंडस्ट्री के साथ मिलकर ट्रेनिंग आयोजित करवाए।
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