चंडीगढ़: दो नवंबर से 9वीं से 12वीं के सभी विद्यार्थियों को बुलाया जाएगा स्कूल, एसओपी तैयार
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शिक्षा विभाग ने दो नवंबर से स्कूलों को खोलने के लिए पूरी तैयारी कर ली है। स्कूलों में विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए दिशानिर्देश, विद्यार्थियों को कैसे पढ़ाया जाएगा, कैसे कक्षाओं में बैठाया जाएगा इत्यादि को लेकर एसओपी भी तैयार कर ली गई है। अगले हफ्ते तक शिक्षा विभाग स्कूलों को एसओपी भेज देगा। दो नवंबर से केवल नौवीं से बारहवीं तक के ही सभी विद्यार्थियों को बुलाया जाएगा। ये विद्यार्थी अपने अभिभावकों की लिखित अनुमति के साथ ही स्कूल आएंगे।
शिक्षा निदेशक रूबिन्दरजीत सिंह बराड़ ने बताया कि हमने दो नवंबर से सभी सरकारी स्कूलों को खोलने को लेकर तैयारी कर ली है। नौवीं से बारहवीं तक के सभी विद्यार्थियों को स्कूल बुलाया जाएगा। सरकारी स्कूलों में सामाजिक दूरी के साथ बैठाने के हिसाब से पर्याप्त कमरे हैं। एक कक्षा में 15 विद्यार्थियों को बैठाया जाएगा। जिन स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या ज्यादा है, उन्हें दो शिफ्ट में चलाया जाएगा। इसके साथ स्कूलों में 100 प्रतिशत स्टाफ को बुलाया जाएगा।
आरएस बराड़ ने बताया कि वर्तमान में सरकारी स्कूलों में रोजाना 1500-1600 विद्यार्थी स्कूल आ रहे हैं। अगर दो नवंबर के बाद नौंवी से बारहवीं के विद्यार्थियों की तरफ से अच्छी प्रतिक्रिया मिलती है तो हम अन्य कक्षाओं के लिए भी उसके अनुसार योजना बनाएंगे।
ग्रामीण इलाके के सरकारी स्कूलों में 50 प्रतिशत के करीब विद्यार्थी आ रहे स्कूल
जीएमएसएसएस कैंबवाला के स्कूल में 12वीं में 134 में से 35 के करीब विद्यार्थी और दसवीं में 70 में से 16 के करीब विद्यार्थी आ रहे हैं। वहीं 12वीं में 70 प्रतिशत और दसवीं में 60 प्रतिशत अभिभावकों ने स्कूल भेजने के लिए हामी भरी है। जीएमएसएसएस धनास में 12वीं आर्ट्स में 50 विद्यार्थी और दसवीं में लगभग 30 विद्यार्थी स्कूल आ रहे हैं। 11वीं की शुरुआती कक्षाओं में भी 24 के करीब विद्यार्थी स्कूल पहुंच रहे हैं। शहर के अन्य ग्रामीण स्कूलों में भी विद्यार्थियों की स्कूलों में उपस्थिति का अनुपात लगभग यही है।
शहर के मुख्य सेक्टरों और प्राइवेट स्कूलों में न के बराबर विद्यार्थी आ रहे स्कूल
जीजीएमएसएसएस-18 में 9वीं से बारहवीं तक कुल 10 से 15 विद्यार्थी स्कूल आ रहे हैं। वहीं नौंवी से बारहवीं तक के विद्यार्थियों को स्कूल भेजने के लिए भी 17 प्रतिशत अभिभावकों ने ही हामी भरी थी। जीएमएसएसएस-20 डी और जीएमएसएसएस-22 में भी 4 से 10 विद्यार्थी ही स्कूल पहुंच रहे हैं।
भवन विद्यालय सेक्टर-27 में कोई भी विद्यार्थी स्कूल नहीं आ रहा है जबकि 9 प्रतिशत अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए हामी भरी थी। सेंट जोंस-26 में भी कोई विद्यार्थी स्कूल नहीं आ रहा है। यहां 10 प्रतिशत से भी कम अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए अनुमति दी थी। सेंट स्टीफन-45 में पिछले एक हफ्ते में नौवीं और दसवीं में कुल 7 से 10 विद्यार्थी ही स्कूल आए हैं। कुल 5 प्रतिशत अभिभावकों ने ही बच्चों को स्कूल भेजने के लिए हामी भरी है।
स्कूल खोलने को लेकर निजी स्कूलों का पक्ष
सेंट स्टीफन-45 के प्राचार्य लुइस लोपेज ने बताया कि अगर प्रशासन स्कूल खोलने के लिए बोलता है तो स्कूल तैयार हैं, लेकिन अभिभावक राजी नहीं हैं। हम एक दिन में 33 प्रतिशत विद्यार्थियों की रेगुलर कक्षा सामाजिक दूरी के साथ लगवा सकते हैं। वहीं हमने अप्रैल तक के सिलेबस के ऑनलाइन शिक्षण की भी तैयारी कर ली है।
भवन विद्यालय-27 की प्राचार्य विनीता अरोड़ा ने बताया कि सभी विद्यार्थी ऑनलाइन शिक्षण ले रहे हैं। हमारे स्कूल में ऑनलाइन शिक्षण को लेकर विद्यार्थियों की तरफ से कोई शिकायत नहीं आई है। अभिभावक बच्चों को स्कूलों भेजने के लिए तैयार नहीं हैं। सेंट जोंस-26 की प्राचार्य कविता दास ने बताया कि सभी विद्यार्थी ऑनलाइन शिक्षण ले रहे हैं। वे केवल प्रैक्टिकल परीक्षा के लिए ही स्कूल आ रहे हैं। हमने पूरा सिलेबस भी ऑनलाइन शिक्षण के हिसाब से तैयार कर लिया है।