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चंडीगढ़ः सिख इतिहास से छेड़छाड़ के खिलाफ शिरोमणि अकाली दल का एलान- ए-जंग

Tue, 30 Oct 2018 09:15 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 30 Oct 2018 09:15 AM IST
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Akali Dal's core committee meeting in Chandigarh
sukhbir badal

अंदरूनी बगावत से जूझ रहे शिरोमणि अकाली दल ने सिख इतिहास से छेड़छाड़ को मुद्दा बना कर सरकार के खिलाफ जंग का एलान किया है। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की बारहवीं की इतिहास की किताब में आपत्तिजनक गलतियों को लेकर पार्टी राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ेगी। एक नवंबर को श्री अकालतख्त साहिब पर मत्था टेकने के बाद आंदोलन का बिगुल फूंका जाएगा। 

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यह फैसला सोमवार को हुई पार्टी की कोर कमेटी की बैठक में लिया गया। प्रधान सुखबीर बादल की अगुवाई में हुई बैठक में पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल और एसजीपीसी प्रधान गोबिंद सिंह लोंगोवाल भी शामिल हुए। बाद में प्रेस कांफ्रेंस में सुखबीर ने कहा कि कांग्रेस और राज्य सरकार को खालसा पंथ से माफी मांगने के लिए मजबूर किया जाएगा। पार्टी इतना जोरदार आंदोलन छेड़ेगी कि इनके किले हिला देगी। अमृतसर में अरदास के बाद ही आंदोलन के रणनीति का खुलासा किया जाएगा। 
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सिख इतिहास की किताबों में श्री गुरु अर्जुन देव जी, गुरु हरगोबिंद जी, गुरु तेग बहादुर जी और गुरु गोबिंद सिंह जी के संबंध में आपत्तिजनक गलतियां की गई हैं। महान गुरुओं के प्रति किए गए इस गलती के लिए सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह तुरंत खालसा पंथ से माफी मांगें। ऐसी आपत्तिजनक सामग्री तैयार के लिए जिम्मेदार लोगों को डिसमिस कर उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए। 
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आपत्तिजनक सामग्री वाली किताबों को प्रतिबंधित किया जाए। उनकी जगह दशकों से प्रयोग हो रहीं पुरानी किताबें लगाई जाएं। अगर ऐसा नहीं हुआ तो कांग्रेस सरकार खालसा पंथ का सामना करने को तैयार रहे। सरकार को झुका लेने तक आंदोलन जारी रहेगा। इससे पहले कोर कमेटी की मीटिंग के दौरान पूर्व शिक्षामंत्री डॉ. दलजीत चीमा ने इतिहास की किताब के आपत्तिजनक अंश पढ़ कर सुनाए।

 सुखबीर ने कहा कि यह हैरानी की बात है कि पहले भी इतिहास की किताब में बेहद गलतियां थीं। सरकार को उन्हें सुधारने पर मजबूर किया गया। उसके बाद भी सिख इतिहास, परंपराओं और विरसे पर हमला किया गया। इससे साफ है कि कांग्रेस गुरु साहिबान और खालसा पंथ के इतिहास को मिटाने की साजिश कर रही है। मीटिंग में सभी प्रमुख नेता मौजूद थे।


ये गलतियां हैं किताब में
पूर्व शिक्षामंत्री डॉ. दलजीत चीमा ने दावा किया कि किताब में बेहद अपमानजनक गलतियां हैं। इसमें दावा किया गया है कि श्री गुरु अर्जुन देव शहीद नहीं हुए थे, मुगलों ने सिर्फ उन्हें जुर्माना लगाया था। यह भी लिखा है कि गुरु ने आपराधिक तत्वों को सरपरस्ती दी। श्री गुरु हरगोबिंद राय जी के लिए लिखा है कि उनकी मुगलों से शत्रुता कोई आदर्श या धार्मिक मामलों को लेकर नहीं थी। बल्कि, वह शिकारी थे और कुत्तों का शिकार करते थे। किताब में यह भी लिखा है कि श्री गुरु गोबिंद सिंह जी चमकौर की ऐतिहासिक लड़ाई से बिना किसी को बताए चले गए थे।

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