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Chandigarh News: 11 को एजेंडा पास, 16 को विज्ञापन, 21 को नीलामी... 33 एकड़ जमीन लीज पर देने में जल्दबाजी पर उठे सवाल
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चंडीगढ़। नगर निगम चार गांव की करीब 33 एकड़ सरकारी जमीन को लीज पर देने जा रहा है। 11 जून को ही सदन में यह एजेंडा पास हुआ था और पांच दिन बाद ही रविवार को विज्ञापन भी जारी कर दिया गया। 21 को सेक्टर-17 स्थित नगर निगम कार्यालय में नीलामी रखी गई है। इस जल्दबाजी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सीनियर डिप्टी मेयर ने प्रशासक को शिकायत दी है। उन्होंने कहा है कि सैकड़ों करोड़ के जमीन को हड़पने की तैयारी है। आप और कांग्रेस के कुछ पार्षद भी विरोध में खड़े हैं।
11 जून को सदन में एजेंडा पास हुआ था कि चार गांव की करीब 33 एकड़ की सरकारी जमीन की नीलामी की जाएगी। पहले एक साल के लिए लीज पर दी जाएगी, जिसे पांच साल के लिए बढ़ाया जा सकेगा। ये जमीन चाहर तर्फ बुड़ैल, खुड्डा लाहौरा, खुड्डा अलीशेर, डड्डूमाजरा में है। निगम आयुक्त ने सदन को बताया था कि इन जमीनों के आसपास पहले से खेती हो रही है। इन जमीनों के लिए मास्टर प्लान के अनुसार प्लानिंग हो रही है। इस बीच कोई अतिक्रमण न कर ले, इसलिए लीज पर देने का फैसला हुआ है। निगम की तरफ से बताया गया है कि जमीन की लोकेशन के हिसाब से रेट तय किए गए हैं और जब भी आर्किटेक्ट ऑफिस से प्लानिंग आएगी, जमीन को वापस ले लिया जाएगा। हालांकि कब तक प्लानिंग आएगी, यह तय नहीं है। इसलिए भी कई पार्षद सवाल उठा रहे हैं कि यह जमीन लंबे समय के लिए निगम के हाथ से चली जाएगी। सदन के अंदर मेयर कुलदीप कुमार, आम आदमी पार्टी के सभी उपस्थित पार्षद और कांग्रेस के जसबीर बंटी को छोड़ अन्य सभी पार्षद जमीन को लीज पर देने के पक्ष में खड़े नजर आए। उन्होंने ने ही एजेंडा को पास भी किया। पार्षद बंटी ने सवाल उठाया था। कहा कि वह इसके पक्ष में नहीं है, क्योंकि जिसे भी जमीन दी जाएगी वो इसे दबा लेगा।
सीनियर डिप्टी मेयर ने प्रशासक को दी शिकायत, बोले- जमीन को हड़पने की तैयारी
शहर के सीनियर डिप्टी मेयर कुलजीत सिंह संधू ने प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित और सलाहकार को शिकायत दी है। उन्होंने कहा है कि भाजपा के पार्षदों को बाहर कर 11 जून को 33 एकड़ की सरकारी जमीन को लीज पर देने का एजेंडा पास हुआ। इस पर तुरंत रोक लगानी चाहिए। जमीन को निजी हाथों को देने में जिस तरह से जल्दबाजी की जा रही है, उससे संदेह पैदा हो रहा है। उन्होंने पूरे मामले की जांच की मांग की है। कहा है कि यह जमीन सैकड़ों करोड़ रुपये की है जिससे आप और कांग्रेस के पार्षद हड़पने की तैयारी कर रहे हैं।
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पूर्व मेयर अनूप गुप्ता बोले- मिनट्स पास नहीं, इतनी जल्दबाजी क्यों
नगर निगम की तरफ से की जा रही जल्दबाजी पर सवाल उठने लगे हैंं। पूर्व मेयर अनूप गुप्ता ने कहा कि अभी सदन की बैठक को हुए हफ्ता भी नहीं हुआ है। बैठक के मिनट्स को मंजूरी भी नहीं दी गई है। फिर इससे पहले ही जमीन को लीज पर देने के लिए इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह गंभीर मामला है। एजेंडे को पास करने से पहले भाजपा के पार्षदों को बाहर निकालना और फिर बैठक के मिनट्स का भी इंतजार न करना, ये संदेह पैदा करता है। गुप्ता ने कहा कि लाखों रुपये लगाकर पहले जमीनों की फेंसिंग की गई और अब कौड़ियों के दाम निजी हाथों में सौंपा जा रहा है, यह नहीं होना चाहिए।
आप-कांग्रेस के पार्षदों ने भी उठाए सवाल
आप पार्षद जसबीर लाडी ने भी जमीन को लीज पर देने को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह गलत है। अभी बैठक के मिनट्स ऑफ मीटिंग को भी मंजूरी नहीं दी गई है। ऐसे में 21 जून को नीलामी कैसे रखी जा सकती है। कांग्रेस के पार्षद जसबीर बंटी ने कहा कि वह पार्टी के नेताओं से चर्चा कर रहे हैं कि जमीनों की नीलामी में इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है। बंटी ने कहा कि उन्होंने सदन में भी इस प्रस्ताव का विरोध किया था। इन जमीनों पर कब्जे हो जाएंगे, जिसे छुड़ाना बहुत मुश्किल हो जाएगा।
गांव आरक्षित मूल्य (प्रति वर्ष)
चाहर तर्फ बुड़ैल 30,000 प्रति एकड़
खुड्डा लाहौरा 25,000 प्रति एकड़
खुड्डा अलीशेर 35,000 प्रति एकड़
डड्डूमाजरा 30,000 प्रति एकड़
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11 जून को सदन में एजेंडा पास हुआ था कि चार गांव की करीब 33 एकड़ की सरकारी जमीन की नीलामी की जाएगी। पहले एक साल के लिए लीज पर दी जाएगी, जिसे पांच साल के लिए बढ़ाया जा सकेगा। ये जमीन चाहर तर्फ बुड़ैल, खुड्डा लाहौरा, खुड्डा अलीशेर, डड्डूमाजरा में है। निगम आयुक्त ने सदन को बताया था कि इन जमीनों के आसपास पहले से खेती हो रही है। इन जमीनों के लिए मास्टर प्लान के अनुसार प्लानिंग हो रही है। इस बीच कोई अतिक्रमण न कर ले, इसलिए लीज पर देने का फैसला हुआ है। निगम की तरफ से बताया गया है कि जमीन की लोकेशन के हिसाब से रेट तय किए गए हैं और जब भी आर्किटेक्ट ऑफिस से प्लानिंग आएगी, जमीन को वापस ले लिया जाएगा। हालांकि कब तक प्लानिंग आएगी, यह तय नहीं है। इसलिए भी कई पार्षद सवाल उठा रहे हैं कि यह जमीन लंबे समय के लिए निगम के हाथ से चली जाएगी। सदन के अंदर मेयर कुलदीप कुमार, आम आदमी पार्टी के सभी उपस्थित पार्षद और कांग्रेस के जसबीर बंटी को छोड़ अन्य सभी पार्षद जमीन को लीज पर देने के पक्ष में खड़े नजर आए। उन्होंने ने ही एजेंडा को पास भी किया। पार्षद बंटी ने सवाल उठाया था। कहा कि वह इसके पक्ष में नहीं है, क्योंकि जिसे भी जमीन दी जाएगी वो इसे दबा लेगा।
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सीनियर डिप्टी मेयर ने प्रशासक को दी शिकायत, बोले- जमीन को हड़पने की तैयारी
शहर के सीनियर डिप्टी मेयर कुलजीत सिंह संधू ने प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित और सलाहकार को शिकायत दी है। उन्होंने कहा है कि भाजपा के पार्षदों को बाहर कर 11 जून को 33 एकड़ की सरकारी जमीन को लीज पर देने का एजेंडा पास हुआ। इस पर तुरंत रोक लगानी चाहिए। जमीन को निजी हाथों को देने में जिस तरह से जल्दबाजी की जा रही है, उससे संदेह पैदा हो रहा है। उन्होंने पूरे मामले की जांच की मांग की है। कहा है कि यह जमीन सैकड़ों करोड़ रुपये की है जिससे आप और कांग्रेस के पार्षद हड़पने की तैयारी कर रहे हैं।
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पूर्व मेयर अनूप गुप्ता बोले- मिनट्स पास नहीं, इतनी जल्दबाजी क्यों
नगर निगम की तरफ से की जा रही जल्दबाजी पर सवाल उठने लगे हैंं। पूर्व मेयर अनूप गुप्ता ने कहा कि अभी सदन की बैठक को हुए हफ्ता भी नहीं हुआ है। बैठक के मिनट्स को मंजूरी भी नहीं दी गई है। फिर इससे पहले ही जमीन को लीज पर देने के लिए इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह गंभीर मामला है। एजेंडे को पास करने से पहले भाजपा के पार्षदों को बाहर निकालना और फिर बैठक के मिनट्स का भी इंतजार न करना, ये संदेह पैदा करता है। गुप्ता ने कहा कि लाखों रुपये लगाकर पहले जमीनों की फेंसिंग की गई और अब कौड़ियों के दाम निजी हाथों में सौंपा जा रहा है, यह नहीं होना चाहिए।
आप-कांग्रेस के पार्षदों ने भी उठाए सवाल
आप पार्षद जसबीर लाडी ने भी जमीन को लीज पर देने को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह गलत है। अभी बैठक के मिनट्स ऑफ मीटिंग को भी मंजूरी नहीं दी गई है। ऐसे में 21 जून को नीलामी कैसे रखी जा सकती है। कांग्रेस के पार्षद जसबीर बंटी ने कहा कि वह पार्टी के नेताओं से चर्चा कर रहे हैं कि जमीनों की नीलामी में इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है। बंटी ने कहा कि उन्होंने सदन में भी इस प्रस्ताव का विरोध किया था। इन जमीनों पर कब्जे हो जाएंगे, जिसे छुड़ाना बहुत मुश्किल हो जाएगा।
गांव आरक्षित मूल्य (प्रति वर्ष)
चाहर तर्फ बुड़ैल 30,000 प्रति एकड़
खुड्डा लाहौरा 25,000 प्रति एकड़
खुड्डा अलीशेर 35,000 प्रति एकड़
डड्डूमाजरा 30,000 प्रति एकड़