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चंडीगढ़: 1857 की क्रांति में मारे गए सैनिकों के अवशेषों की जांच के लिए अमेरिका और इंग्लैंड तैयार

Thu, 21 Oct 2021 02:02 PM IST
प्रमोद कुमार सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: प्रमोद कुमार Updated Thu, 21 Oct 2021 02:02 PM IST
सार

पीयू चंडीगढ़ की कोशिशों रंग लाई हैं। यूनिवर्सिटी के अनुरोध के बाद 1857 की क्रांति में मारे गए सैनिकों के अवशेषों की जांच के लिए अमेरिका और इंग्लैंड तैयार हो गए हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर यूके में सैनिकों के 100 दांतों की जांच होगी। इनकी कार्बन डेटिंग की जाएगी ताकि सैनिकों की मौत का समय क्या था, पता चल सके।

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After the efforts of PU Chandigarh America and England ready to investigate the remains of soldiers killed in the 1857 revolution
अमृतसर के अजनाला में मिले सैनिकों के अवशेष। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के लिए अच्छी खबर है। 1857 की क्रांति में मारे गए सैनिकों के अवशेषों की जांच के लिए अमेरिका व इंग्लैंड की प्रयोगशालाएं तैयार हो गई हैं। इसके लिए पीयू को मामूली रकम चुकानी होगी। बाकी खर्च प्रयोगशालाएं ही वहन करेंगी। अवशेषों की जांच के बाद साफ हो जाएगा कि मारे गए सैनिक मूलत: किन क्षेत्रों के रहने वाले थे और उनकी मौत किस समय हुई। इसके अलावा कई और चौंकाने वाले खुलासे भी होंगे। बता दें कि कोरोना महामारी के चलते विदेशी प्रयोगशालाओं में इन अवशेषों की जांच नहीं हो पा रही थी, क्योंकि अमेरिका से लेकर यूके तक की प्रयोगशालाएं अपने यहां के शोध नमूनों की ही जांच कर पा रही थीं।
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200 साल पुराना माना जा रहा डीएनए
इस शोध पर काम कर रहे पीयू के डॉ. जेएस सहरावत ने अमेरिका और यूके की प्रयोगशालाओं से संपर्क साधा था। कई बार वेबिनार किया। आखिर में प्रयोगशालाओं के संचालकों ने जांच के लिए हामी भर दी। यूएसए स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ ओकलामा 200 साल पुराने डीएनए की जांच करेगी। इसे प्राचीन डीएनए भी कहते हैं। भारत में प्राचीन डीएनए की जांच की कोई लैब नहीं हैं। इसी तरह यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर यूके में सैनिकों के 100 दांतों की जांच होगी। इनकी कार्बन डेटिंग की जाएगी ताकि सैनिकों की मौत का समय क्या था, पता चल सके।
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स्टेबल आइसोटोप की होगी जांच
इसके साथ ही स्टेबल आइसोटोप नामक जांच भी होगी। इससे सैनिक किन क्षेत्रों के रहने वाले थे, उसकी भौगोलिक स्थिति का पता चलेगा। इससे पहले इटली, हंगरी, पुर्तगाल आदि जगहों पर भी इन जांचों के लिए वैज्ञानिकों ने संपर्क साधा गया था, जिसमें सफलता नहीं मिल पाई थी। वैज्ञानिकों का कहना है कि विदेशी प्रयोगशालाएं इस जांच पर लाखों रुपये खर्च करेंगी।


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ये है गुमनाम सैनिकों की दास्तान
1857 की क्रांति में मारे गए 282 गुमनाम सैनिकों के अवशेष अजनाला (अमृतसर) में एक कुएं से बरामद हुए थे। इन अवशेषों की जांच का जिम्मा पंजाब विश्वविद्यालय के एंथ्रोपोलॉजी विभाग को मिला था। लगभग सात साल से इस पर शोध चल रहा है। कई खुलासे शोध के जरिये हो चुके हैं और कई होने बाकी हैं। वैज्ञानिकों का मकसद है कि सैनिकों को न्याय मिले और वह अपने घरों तक पहुंचे ताकि उनका अंतिम संस्कार हो सके।

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सैनिकों के अवशेषों की जांच के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ ओकलामा यूएसए और यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर यूके तैयार हो गई हैं। अधिकांश खर्च ये विश्वविद्यालय खुद वहन करेंगे। कुछ खर्च प्रोजेक्ट से भेजा जाएगा। जल्द जांच रिपोर्ट सामने आएगी और चौंकाने वाले खुलासे होंगे।
-डॉ. जेएस सहरावत, प्रधान वैज्ञानिक, एंथ्रोपोलॉजी विभाग, पीयू
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