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Chandigarh News: तीन कानून बनने से बदलीं धाराएं और कड़ी सजा का हुआ प्रावधान
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चंडीगढ़। भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू करने वाला चंडीगढ़ देशभर का सबसे पहला यूटी शहर है। इन तीन कानूनों के तहत ई साक्ष्य एप- ई समन, न्याय श्रुति, न्याय सेतु ऐसे स्तंभ हैं, जिनसे घटनास्थल से लेकर अदालती कार्यवाही तक की सारी प्रक्रिया बदल गई है। नए कानूनों के बदलने से न केवल कार्यवाही की प्रक्रिया व धारा बदली है बल्कि सजा भी पहले से कड़ी हो गई है।
दरअसल, एक जुलाई 2024 को देशभर में तीन नए कानून लागू हुए थे, जिनमें अपराधियों के लिए अब पहले से कहीं अधिक कड़ी सजा का प्रावधान है। नए कानून लागू होने के बाद भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत दर्ज होने वाले मुकदमे अब भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत ही दर्ज किए जा रहे हैं। कई संज्ञेय अपराधों में पहले कम सजा का प्रावधान था लेकिन बीएनएस के बाद कड़ी सजा का प्रावधान किया गया। आईपीसी में पहले 511 धाराएं थीं लेकिन भारतीय न्याय संहिता में 358 धाराएं बनाकर उनका क्रम भी बदला गया। सीआरपीसी (दंड प्रक्रिया संहिता) को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में बदला गया। सीआरपीसी में पहले 484 धाराएं थीं, जबकि नए कानून में 531 धाराएं हैं। भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 को अब भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 के नाम से जाना जाता है। पुराने अधिनियम में 167 प्रावधान थे, जबकि इसमें नए 170 प्रावधान हो गए हैं।
इनमें डिजिटल साक्ष्यों का महत्व बढ़ाया गया। तीन कानूनों के तहत आम आदमी अब कहीं से भी एफआईआर दर्ज करा सकता है। इसके अलावा जीरो एफआईआर को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 173 के जरिए कानूनी मान्यता दी गई। तीन नए कानून लागू होने के बाद मुकदमों को वापस लेना आसान नहीं है। अगर कोई एफआईआर रद्द की जाती है तो शिकायतकर्ता अदालत में अपना पक्ष निष्पक्ष रख सकता है। केस दर्ज करवाने वाले पीड़ित को सुनवाई का मौके दिए बिना केस वापस लेने की सहमति अदालत में नहीं है। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य में वीडियो और फोटो इत्यादि को नए कानून में जगह दी गई है। मारपीट की छोटी घटनाओं, गाली-गलौज या छोटे अपराध में जमानत टूटने के मामले में वारंटी को हथकड़ी लगाए बगैर पुलिस थाने ले जाएगी। शर्त यह रहेगी कि आरोपी का पुराना आपराधिक इतिहास न हो। इसी तरह से आपराधिक मुकदमों में अब तारीख पर तारीख वाला हिसाब-किताब नहीं चलेगा। तीन वर्ष में मुकदमे का निस्तारण करने की बाध्यता नए कानून में है।
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दुष्कर्म पीड़िता किसी भी जगह दर्ज करवा सकती है बयान
तीन कानूनों के तहत दुष्कर्म पीड़िता अब अपनी सुविधानुसार किसी भी जगह पर अपने बयान पुलिस के पास दर्ज करा सकती है। इसके लिए उसे थाने जाने की जरूरत नहीं पड़ती बल्कि पुलिस भी पीड़िता की ओर से बताई गई जगह पर जाकर उसका बयान दर्ज करती है। उस दौरान पीड़िता के अभिभावक और महिला पुलिस की मौजूदगी अनिवार्य होती है। बयानों की बाकायदा अब ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाती है। उसे ई-साक्ष्य के रूप में क्लाउड पर अपलोड किया जाता है ताकि पीड़िता भी बाद में अपने बयानों से न मुकर सकें। दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के मामलों में पुलिस को दो महीने में जांच पूरी करने का प्रावधान है।
भारतीय न्याय संहिता में क्या है बदलाव
-भारतीय न्याय संहिता में 20 नए अपराध जोड़े गए हैं।
-ऑर्गेनाइज्ड क्राइम, हिट एंड रन, मॉब लिंचिंग पर सजा का प्रावधान।
-डॉक्यूमेंट में इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल रिकॉर्ड
-आईपीसी में मौजूद 19 प्रावधानों को हटाया गया
-33 अपराधों में कारावास की सजा बढ़ाई गई
-83 अपराधों में जुर्माने की सजा बढ़ाई गई
-छह अपराधों में सामुदायिक सेवा की सजा का प्रावधान किया गया
गंभीर अपराध: नाबालिग से रेप के दोषी को उम्रकैद या फांसी
ट्रायल के मामले: आरोपी को गिरफ्तार करने पर परिवार को जानकारी देनी होगी, हालांकि पहले यह जरूरी नहीं था
-रेप की धारा 375, 376 को अब 63 व 69 में बदला गया
-किसी भी केस में 90 दिन में क्या हुआ, पुलिस की ओर से पीड़ित को इसकी जानकारी देना जरूरी है
-हत्या की धारा 302 को 101 में बदला गया
-आरोपी का 90 दिनों में कोर्ट में पेश होने बगैर शुरू हो सकेगा ट्रायल
-गंभीर मामलों में आधी सजा काटने के बाद रिहाई का प्रावधान
-गैंगरेप के दोषी को 20 साल -ट्रायल कोर्ट को 3 साल में देना होगा फैसला या जिंदा रहने तक जेल
-फैसले बाद 7 दिन में कोर्ट को देनी होगी सजा
-मॉब लिंचिंग में फांसी की सजा
महिला संबंधित अपराध की धाराएं
आईपीसी-बीएनएस
354-74
354ए-75
354बी-76
354सी-77
354डी-78
509-79
चोरी संबंधी अपराध
379-303(2)
411-317(2)
457-331(4)
380-305
लूट संबंधी अपराध
392-309(4)
393-309(5)
394-309(6)
हत्या-आत्महत्या संबंधी अपराध
302-103(1)
304(बी)-80(2)
306-108
307-109
304-105
308-110
धोखाधड़़ी संबंधी अपराध
419-319(2)
420-318(4)
466-337
467-338
468-336(3)
471-340(2)
फोटो 01: कानून लोगो
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दरअसल, एक जुलाई 2024 को देशभर में तीन नए कानून लागू हुए थे, जिनमें अपराधियों के लिए अब पहले से कहीं अधिक कड़ी सजा का प्रावधान है। नए कानून लागू होने के बाद भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत दर्ज होने वाले मुकदमे अब भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत ही दर्ज किए जा रहे हैं। कई संज्ञेय अपराधों में पहले कम सजा का प्रावधान था लेकिन बीएनएस के बाद कड़ी सजा का प्रावधान किया गया। आईपीसी में पहले 511 धाराएं थीं लेकिन भारतीय न्याय संहिता में 358 धाराएं बनाकर उनका क्रम भी बदला गया। सीआरपीसी (दंड प्रक्रिया संहिता) को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में बदला गया। सीआरपीसी में पहले 484 धाराएं थीं, जबकि नए कानून में 531 धाराएं हैं। भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 को अब भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 के नाम से जाना जाता है। पुराने अधिनियम में 167 प्रावधान थे, जबकि इसमें नए 170 प्रावधान हो गए हैं।
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इनमें डिजिटल साक्ष्यों का महत्व बढ़ाया गया। तीन कानूनों के तहत आम आदमी अब कहीं से भी एफआईआर दर्ज करा सकता है। इसके अलावा जीरो एफआईआर को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 173 के जरिए कानूनी मान्यता दी गई। तीन नए कानून लागू होने के बाद मुकदमों को वापस लेना आसान नहीं है। अगर कोई एफआईआर रद्द की जाती है तो शिकायतकर्ता अदालत में अपना पक्ष निष्पक्ष रख सकता है। केस दर्ज करवाने वाले पीड़ित को सुनवाई का मौके दिए बिना केस वापस लेने की सहमति अदालत में नहीं है। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य में वीडियो और फोटो इत्यादि को नए कानून में जगह दी गई है। मारपीट की छोटी घटनाओं, गाली-गलौज या छोटे अपराध में जमानत टूटने के मामले में वारंटी को हथकड़ी लगाए बगैर पुलिस थाने ले जाएगी। शर्त यह रहेगी कि आरोपी का पुराना आपराधिक इतिहास न हो। इसी तरह से आपराधिक मुकदमों में अब तारीख पर तारीख वाला हिसाब-किताब नहीं चलेगा। तीन वर्ष में मुकदमे का निस्तारण करने की बाध्यता नए कानून में है।
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दुष्कर्म पीड़िता किसी भी जगह दर्ज करवा सकती है बयान
तीन कानूनों के तहत दुष्कर्म पीड़िता अब अपनी सुविधानुसार किसी भी जगह पर अपने बयान पुलिस के पास दर्ज करा सकती है। इसके लिए उसे थाने जाने की जरूरत नहीं पड़ती बल्कि पुलिस भी पीड़िता की ओर से बताई गई जगह पर जाकर उसका बयान दर्ज करती है। उस दौरान पीड़िता के अभिभावक और महिला पुलिस की मौजूदगी अनिवार्य होती है। बयानों की बाकायदा अब ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाती है। उसे ई-साक्ष्य के रूप में क्लाउड पर अपलोड किया जाता है ताकि पीड़िता भी बाद में अपने बयानों से न मुकर सकें। दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के मामलों में पुलिस को दो महीने में जांच पूरी करने का प्रावधान है।
भारतीय न्याय संहिता में क्या है बदलाव
-भारतीय न्याय संहिता में 20 नए अपराध जोड़े गए हैं।
-ऑर्गेनाइज्ड क्राइम, हिट एंड रन, मॉब लिंचिंग पर सजा का प्रावधान।
-डॉक्यूमेंट में इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल रिकॉर्ड
-आईपीसी में मौजूद 19 प्रावधानों को हटाया गया
-33 अपराधों में कारावास की सजा बढ़ाई गई
-83 अपराधों में जुर्माने की सजा बढ़ाई गई
-छह अपराधों में सामुदायिक सेवा की सजा का प्रावधान किया गया
गंभीर अपराध: नाबालिग से रेप के दोषी को उम्रकैद या फांसी
ट्रायल के मामले: आरोपी को गिरफ्तार करने पर परिवार को जानकारी देनी होगी, हालांकि पहले यह जरूरी नहीं था
-रेप की धारा 375, 376 को अब 63 व 69 में बदला गया
-किसी भी केस में 90 दिन में क्या हुआ, पुलिस की ओर से पीड़ित को इसकी जानकारी देना जरूरी है
-हत्या की धारा 302 को 101 में बदला गया
-आरोपी का 90 दिनों में कोर्ट में पेश होने बगैर शुरू हो सकेगा ट्रायल
-गंभीर मामलों में आधी सजा काटने के बाद रिहाई का प्रावधान
-गैंगरेप के दोषी को 20 साल -ट्रायल कोर्ट को 3 साल में देना होगा फैसला या जिंदा रहने तक जेल
-फैसले बाद 7 दिन में कोर्ट को देनी होगी सजा
-मॉब लिंचिंग में फांसी की सजा
महिला संबंधित अपराध की धाराएं
आईपीसी-बीएनएस
354-74
354ए-75
354बी-76
354सी-77
354डी-78
509-79
चोरी संबंधी अपराध
379-303(2)
411-317(2)
457-331(4)
380-305
लूट संबंधी अपराध
392-309(4)
393-309(5)
394-309(6)
हत्या-आत्महत्या संबंधी अपराध
302-103(1)
304(बी)-80(2)
306-108
307-109
304-105
308-110
धोखाधड़़ी संबंधी अपराध
419-319(2)
420-318(4)
466-337
467-338
468-336(3)
471-340(2)
फोटो 01: कानून लोगो