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Chandigarh News: सामूहिक दुष्कर्म के आरोपी की डीएनए रिपोर्ट का नहीं हुआ मिलान, हाईकोर्ट से जमानत
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-नूंह में हुआ था मामला दर्ज, पीड़िता ने आरोपी को पहचानने से किया था इनकार
-जिला अदालत ने इन तथ्यों को नजर अंदाज करने किया था जमानत देने से इन्कार
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। 2020 में नूंह में हुए सामूहिक दुष्कर्म के आरोपी को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने डीएनए टेस्ट का हवाला देते हुए जमानत दे दी है। इस मामले में पीड़िता पहले ही आरोपी को पहचानने से इन्कार कर चुकी है। करने के आरोपित एक व्यक्ति को जमानत दे दी है। हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए आरोपी ने बताया कि उसने पीड़िता के साथ कोई गलत काम नहीं किया था और पीड़िता खुद उसे पहचानने से इन्कार कर चुकी है लेकिन मामले की प्रकृति को गंभीर बताते हुए ट्रायल कोर्ट ने जमानत से इन्कार कर दिया था। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि सभी गवाहों के बयान ट्रायल कोर्ट में तीन महीने पहले दर्ज किए गए थे और केवल डीएनए विश्लेषक की रिपोर्ट का इंतजार था। अब कि डीएनए विश्लेषक की रिपोर्ट भी प्राप्त हो गई है जो याचिकाकर्ता से मेल नहीं खाती है। याचिकाकर्ता एक वर्ष आठ माह से हिरासत में है। अभियोजन के अनुसार पांच लोगों ने मिल कर पीड़िता से दुष्कर्म किया था लेकिन याची के डीएनए के मिलान न होने व उसकी हिरासत की लंबी अवधि उसे नियमित जमानत के लिए पात्र बनाती है। ऐसे में हाईकोर्ट ने याची की नियमित जमानत याचिका को मंजूर करते हुए उसे जमानत दे दी।
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-जिला अदालत ने इन तथ्यों को नजर अंदाज करने किया था जमानत देने से इन्कार
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। 2020 में नूंह में हुए सामूहिक दुष्कर्म के आरोपी को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने डीएनए टेस्ट का हवाला देते हुए जमानत दे दी है। इस मामले में पीड़िता पहले ही आरोपी को पहचानने से इन्कार कर चुकी है। करने के आरोपित एक व्यक्ति को जमानत दे दी है। हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए आरोपी ने बताया कि उसने पीड़िता के साथ कोई गलत काम नहीं किया था और पीड़िता खुद उसे पहचानने से इन्कार कर चुकी है लेकिन मामले की प्रकृति को गंभीर बताते हुए ट्रायल कोर्ट ने जमानत से इन्कार कर दिया था। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि सभी गवाहों के बयान ट्रायल कोर्ट में तीन महीने पहले दर्ज किए गए थे और केवल डीएनए विश्लेषक की रिपोर्ट का इंतजार था। अब कि डीएनए विश्लेषक की रिपोर्ट भी प्राप्त हो गई है जो याचिकाकर्ता से मेल नहीं खाती है। याचिकाकर्ता एक वर्ष आठ माह से हिरासत में है। अभियोजन के अनुसार पांच लोगों ने मिल कर पीड़िता से दुष्कर्म किया था लेकिन याची के डीएनए के मिलान न होने व उसकी हिरासत की लंबी अवधि उसे नियमित जमानत के लिए पात्र बनाती है। ऐसे में हाईकोर्ट ने याची की नियमित जमानत याचिका को मंजूर करते हुए उसे जमानत दे दी।