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हाईकोर्ट का अहम फैसला: तलाक लिए बिना अलग रह रही महिला करवा सकती है गर्भपात, पति की मंजूरी जरूरी नहीं

Tue, 14 Jan 2025 08:57 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो Updated Tue, 14 Jan 2025 08:57 PM IST
सार

याची महिला ने 18 हफ्ते का गर्भ गिराने की अनुमति मांगी थी। महिला दहेज प्रताड़ना के कारण अपने पति से अलग रहती है। हाईकोर्ट ने कई तथ्यों को मद्देनजर रख महिला को गर्भपात की अनुमति दी। 

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woman living separately without divorce get abortion without consent of husband: High Court
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि तलाक लिए बिना अपने पति से अलग रह रही महिला पति की सहमति के बिना भी गर्भ समाप्त कर सकती है। महिला ने अपने पति की सहमति के बिना अपना 18 सप्ताह का गर्भ समाप्त करने के मोहाली के फोर्टिस अस्पताल को निर्देश देने की मांग की थी। याची ने बताया कि गर्भपात के लिए निर्धारित अवधि से अधिक का गर्भ नहीं होने के कारण उसकी गर्भावस्था चिकित्सकीय रूप से समाप्त की जा सकती है। 
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याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि महिला को कम दहेज लाने के कारण उसके ससुराल वालों द्वारा क्रूरता का सामना करना पड़ा और उसके पति ने भी उसके साथ दुर्व्यवहार किया। उसने अपने निजी क्षणों को गुप्त रूप से रिकॉर्ड करने के लिए दो बार अपने बेडरूम में एक पोर्टेबल कैमरा भी लगाया। कथित क्रूरता के कारण महिला अलग रहने लगी और प्रस्तुत किया कि उसकी अवांछित गर्भावस्था को जारी रखने से उसके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान होगा। 
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हाईकोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता घरेलू हिंसा के कारण अपने पति से अलग हो गई, लेकिन कानूनी रूप से तलाक नहीं हुआ है, फिर भी वह वैवाहिक स्थिति में परिवर्तन के आधार पर अपने पति की सहमति के बिना गर्भावस्था को समाप्त करने के लिए पात्र है। हाईकोर्ट ने कहा कि अवांछित गर्भधारण के लिए मजबूर होने पर, एक महिला को महत्वपूर्ण शारीरिक और भावनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। बच्चे के जन्म के बाद भी ऐसी गर्भावस्था के परिणामों से निपटना याचिकाकर्ता पर अतिरिक्त बोझ डालता है। इससे जीवन में अन्य अवसरों जैसे कि रोजगार और अपने परिवार की आय में योगदान करने की उसकी क्षमता प्रभावित होती है।
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 उपरोक्त के आलोक में, न्यायालय ने याचिका को स्वीकार कर लिया और याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि आदेश से तीन दिनों के भीतर संबंधित सीएमओ से संपर्क करे। यद्यपि याचिकाकर्ता विधवा या तलाकशुदा के दायरे में नहीं आती है, तथापि, चूंकि उसने कानूनी रूप से तलाक लिए बिना अपने पति से अलग रहने का निर्णय लिया है, इसलिए वह गर्भ समाप्त करने के लिए पात्र है।
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