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छतबीड़ जू हादसाः प्रशासन की लापरवाही आई सामने, अभी भी इन चार सवालों के नहीं मिले जवाब

Tue, 22 Jan 2019 09:46 AM IST
ajay kumar दीपक शाही, अमर उजाला, जीरकपुर (पंजाब)
दीपक शाही, अमर उजाला, जीरकपुर (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Tue, 22 Jan 2019 09:46 AM IST
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a man killed by lions in chhatbir zoo zirakpur, questions raised on zoo care takers
यहां होनी थी गार्ड की तैनाती लेकिन नदारद दिखे

छतबीड़ जू के बाहरी छोर (घग्गर डैम) पर सुरक्षा के माकूल प्रबंध नहीं हैं। इसके चलते एक अज्ञात युवक को लायन सफारी के शेर युवराज और शेरनी शिल्पा ने मार गिराया। देखा जाए तो इसमें जू प्रशासन की लापरवाही है। क्योंकि किन परिस्थितियों और कैसे लायन सफारी में अज्ञात युवक दाखिल हुआ यह अलग मसला है। 

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सवाल यह है कि जिस लायन सफारी में हजारों की तादात में रोजाना पूरे उत्तर भारत से पर्यटक वन्य प्राणियों को देखने आते हैं, उसकी नींव इतनी कमजोर है कि कोई भी व्यक्ति आसानी से जू के लायन सफारी में दाखिल हो सकता है। इस ओर जू प्रशासन का ध्यान क्यों नहीं गया। 
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कमरा है तो बाहरी छोर पर गार्ड की तैनाती क्यों नहीं? 
जू के बाहरी छोर की दीवार की तरफ सुनसान एरिया है। यहां के घग्गर डैम को लोगों ने पिकनिक स्पॉट बना रखा है। इस एरिया में पुलिस की गश्त भी बढ़ाई जानी चाहिए। वहीं जू प्रशासन ने बाहरी छोर पर गार्ड की तैनाती होती तो कोई भी व्यक्ति लायन सफारी में दाखिल नहीं होता। अगर जू में सुरक्षा का इतना पुख्ता प्रबंध है तो बाहर क्यों नहीं है। जबकि बाहरी दीवार की तरफ गार्ड के बैठने के लिए बाकायदा एक कमरा भी बनाया गया है, जो अब बदहाल पड़ा है। इस एरिया में एक सिक्योरिटी गेट भी लगा होना चाहिए।

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एक ऐसा एरिया भी यहां कोई भी हो जाए आसानी से दाखिल 

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छतबीड़ जू

घग्गर नदी के डैम के सामने छतबीड़ जू की दीवार का करीब चार से पांच मीटर एरिया ऐसा है, जहां से कोई भी फुर्तीला व्यक्ति एक से दो मिनट के अंदर एक पांव दीवार पर रख लोहे की एंगल के बीच बने गैप को रास्ता बना आसानी से लायन सफारी में दाखिल हो जाए। यहां तो जानवर भी सुरक्षित नहीं हैं, कोई व्यक्ति की तो दूर की बात है। इस एरिया में खुले में लायन सफारी के बाहर और भीतर दर्जनों मोर भी घूमते रहते हैं। 

मिट्टी के चलते दीवार की ऊंचाई हो गई कम 
छतबीड़ जू के पीछे की दीवार की ऊंचाई घग्गर नदी की मिट्टी के चलते कम हो गई है। इस एरिया में कच्चा बांध है, बारिश के समय यहां की मिट्टी छतबीड़ जू की दीवार की तरह खाई होने के चलते पानी के साथ आसानी से बहकर चली जाती है, जिसके चलते लायन सफारी की दीवार के कुछ एरिया की ऊंचाई आठ फुट से महज साढे़ तीन और ढाई फुट की रह गई है।      

लायन सफारी की दीवार ईंट की क्यों नहीं बनाई?
छतबीड़ जू के लायन सफारी और डियर सफारी के वन्य प्राणियों को बाहर से कोई भी व्यक्ति आसानी से देख सकता है। यहां खुल में मोर घूमते हैं, इनकी सुरक्षा का क्या प्रबंध है। सबसे हैरानी की बात तो यह है कि दीवार का कुछ हिस्सा पूरा ईंटों से बना है, जहां जरूरी है, लायन सफारी एरिया में वहां जू प्रशासन ने छोटी ईंट युक्त दीवार बनाकर लोहे की तार से बना एंगल लगा दिया है।

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आसानी से कोई भी हो सकता दाखिल

 इसका कुछ एरिया ग्रीन कलर के मैट से ढका है और आधे से ज्यादा एरिया खुला है। इसके चलते जू के वन्य प्राणियों को लोग आसानी से बाहर से भी देख पाते हैं। जू प्रशासन को ऐसा बंदोबस्त करना चाहिए कि जू के अंदर के वन्य प्राणियों को कोई देख न सके। आखिरकार जू के वन्य प्राणियों की सुरक्षा का सवाल है, अगर बाहर से कुछ नहीं दिखता तो व्यक्ति लायन सफारी के अंदर दाखिल न होता।

छतबीड़ जू का जोड़...
छतबीड़ जू में इतना बड़ा हादसा होने के बाद भी किसी गार्ड की तैनाती लायन सफारी के पीछे की दीवार की तरफ नहीं की गई है। अगर ऐसे ही हालत रहे तो कच्चे पुल से नीचे उतरकर कोई भी तीन फुट की ऊंची दीवार के पास खड़े होकर जालियों के रास्ते लायन सफारी के वन्य प्राणियों और खुले में घूम रहे मोरों को निशाना बना सकता है और रस्सी में बांधकर उन्हें बाहर खींच सकता है। यह सुरक्षा में पूरी तरह से चूक है। 

कुछ अनसुलझे सवाल        
- दोनों युवक छतबीड़ जू की पीछे की दीवार के तरफ से किस मंशा से गए थे।
- जिस युवक को शेर और शेरनी ने मारा है, वह लोकल हैं, या दूसरे राज्यों के। अगर लोकल हैं, तो उनकी शिनाख्त के लिए कोई अबतक सामने क्यों नहीं आया।  
- अगर दूसरे राज्यों से हैं तो मृतक के पास से पुलिस को कोई दस्तावेज और कागजात क्यों नहीं बरामद हुए।  
- क्या वह बिना पैसों के चंडीगढ़ के छतबीड़ जू में आए थे।

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