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चंडीगढ़ में अपनी मर्जी से सिख बने 80 हिंदू, जानिए क्यों?

Tue, 27 Oct 2015 10:24 AM IST
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 27 Oct 2015 10:24 AM IST
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80 family become sikh from hindu in chandiharh

चंडीगढ़ में इंद्रजीत सहित करीब 80 हिंदू ऐसे हैं, जिन्होंने पिछले सात महीने के दौरान अपनी मर्जी से धर्म परिवर्तन कर सिख धर्म को अपनाया हैं। नेपाल के मूल निवासी इंद्रजीत तीन साल पहले लुधियाना से अपनी पत्नी का इलाज कराने पीजीआई पहुंचे थे।

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उनकी पत्नी को पैरालिसिस था। इलाज काफी लंबा चलना था, इसलिए वे पीजीआई में बने गुरुद्वारे में रुक गए। गुरुद्वारे में आने वाले हर मरीज को रहने का आसरा और खाने को लंगर मिलता है। इंद्रजीत भी गुरुद्वारे की कारसेवा में जुट गए। जो भी यहां आता, उनकी खूब सेवा करते।
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बदले में उनको व उनकी पत्नी को यहां पर रुकने का आसरा मिला। कुछ ही महीने पहले उसकी पत्नी अपने पैरों पर खड़ी होने लगीं। तीन साल तक गुरुद्वारे ने दंपति को रहना और खाना दिया। इससे प्रभावित होकर उन्होंने कुछ माह पहले अमृत छक कर सिख धर्म अपना लिया।
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अमर उजाला से बातचीत में लोगों ने बताया कि वे किसी के दबाव में बल्कि सेवाभाव, सम्मान और अंतरात्मा की आवाज सुनकर सिख बने हैं। गुरुद्वारे में सिर्फ हिंदू ही नहीं बल्कि मुस्लिम धर्म के भी लोग रहते हैं।

सहारनपुर से अपनी पत्नी अनीसा का इलाज कराने पहुंचे फैयाज अहमद ने बताया कि आज के जमाने में छत मिलना मुश्किल है। गुरुद्वारे में वे पिछले एक हफ्ते से रह रहे हैं, उन्हें न सिर्फ रहने को कमरा मिला बल्कि खाना और बिस्तर भी मिला है।

जो भी सेवा से प्रभावित होता है वह अमृत छक लेता है

80 family become sikh from hindu in chandiharh

राजेंद्र कुमार भी हिंदू थे। उनको स्पाइन में दिक्कत थी। वे इलाज के लिए पीजीआई आए और यहीं आकर बस गए। बाद में उन्होंने भी सिख धर्म अपना लिया।

गुरुद्वारा प्रतक दर्शन के प्रमुख बाबा तरसेम सिंह ने बताया कि गुरुद्वारे में रोजाना 800 से 1000 लोग आते हैं। कोई बिहार से आता है तो कोई यूपी से। कोई उत्तराखंड से तो कोई जम्मू-कश्मीर से।

ये सभी पीजीआई में इलाज कराने आते हैं, जिन्हें गंभीर बीमारी है और वे दूर प्रदेश से आए तो वे गुरुद्वारे में ही रुकते हैं। यहां ठहरने और खाने के लिए किसी को रोक-टोक नहीं है। जो यहां पर ठहरता है, उसे ब्रेक फास्ट से लेकर रात का खाना मिलता है।

सेवा के बाद छक लेते हैं अमृत: जो भी सेवा से प्रभावित होता है वह अमृत छक लेता है। कुछ तो ऐसे हैं, जो सिख धर्म अपनाकर वापस अपने घर चले गए तो कुछ ऐसे भी हैं, जिन्होंने गुरुद्वारे को ही बसेरा बना लिया है। गुरुद्वारे से अमृतपान के लिए आनंदपुर साहिब लेकर जाते हैं। बाबा तरसेम सिंह ने दावा किया कि गुरुकृपा से यहां पर ठहरने वाले मरीज भी ठीक होते हैं।

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