ओपनिंग में ही अमित शाह की गुगली
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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने हरियाणा की राजनीति की पिच पर ओपनिंग में ही गुगली डाल कांग्रेस और इनेलो के कई बड़े नेताओं को भाजपा में शामिल करा विपक्ष में सेंध लगा दी है। शाह की इस गुगली ने दूसरे दलों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पहली रैली में बड़े नेताओं के भाजपा में शामिल होने से सूबे की सियासत गरमा गई है।
महेंद्रगढ़ में शाह की रैली को सफल बनाकर भाजपा ने दक्षिण हरियाणा में अपने बढ़ रहे जनाधार के संकेत दे दिए हैं। इस रैली के लिए लंबे समय से हरियाणा के अलावा दिल्ली में होमवर्क चल रहा था।
राज्य के नेताओं का लगातार दिल्ली में अमित शाह के साथ संपर्क करवाया जा रहा था। हालांकि भाजपा ने अमित शाह की मौजूदगी में वीरवार की रैली में अपना पहला दांव खेला है। अभी कई और खुलासे होने बाकी है।
अहीरवाल क्षेत्र से फूंका चुनावी बिगुल
प्रधानमंत्री मोदी की तर्ज पर अहीरवाल से चुनाव का बिगुल बजा कर अमित शाह ने बड़ा सियासी धमाल किया है। मोदी ने पहली रैली रेवाड़ी से की थी।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद अमित शाह ने वीरवार को महेंद्रगढ़ से चुनावी शंखनाद किया है। इस दौरान उन्होंने हरियाणा के दलितों के जख्मों पर भी मरहम लगाने का काम किया।
हरियाणा भाजपा को उम्मीद थी कि इस रैली में अमित शाह भाजपा- हजकां गठबंधन को लेकर स्थिति स्पष्ट कर देंगे। लेकिन उन्होंने यह गेंद कुलदीप के पाले में सरका दी है। शाह ने इशारों में ही गठबंधन तोड़ जाने का ठीकरा भी कुलदीप के सिर पर फोड़ा दिया।
भाजपा की नजर मुख्यमंत्री की सीट पर
हरियाणा में बीते विधानसभा चुनाव में हाशिये पर रहने वाली भाजपा की उम्मीदें अचानक दोगुनी हो गई हैं। मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद और राज्य में लोकसभा चुनाव में आशातीत सफलता के बाद अब भाजपा को हरियाणा के मुख्यमंत्री की सीट दिखाई दे रही है।
इस समय हरियाणा विधानसभा में भाजपा के दो विधायक, अनिल विज और कविता जैन हैं। जबकि कृष्णपाल गुर्जर सांसद बनने के बाद इस्तीफा दे चुके हैं। शाह की कोशिश है कि केंद्र में भाजपा को मजबूती दिलवाने केबाद अब हरियाणा फतेह किया जाए।
अब बीरेंद्र की रैली पर नजर, भाजपा मजबूत
अमित शाह की महेंद्रगढ़ रैली से उत्साहित भाजपाइयों को जींद रैली से भी बहुत उम्मीदें हैं। स्वतंत्रता दिवस के ठीक अगले दिन जींद की धरती पर होने वाली इस रैली में कांग्रेस के कद्दावर नेता बीरेंद्र सिंह भाजपा में शामिल होंगे। उनके साथ भी कुछ वर्तमान विधायक और पूर्व मंत्री भाजपा में शामिल होने के संकेत मिले हैं। मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व पर उंगली उठाते रहे बीरेंद्र सिंह को अपना कद दिखाने के लिए यह स्वर्णिम अवसर होगा।
कांग्रेस के टिकट पर अंबाला संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ने वाले राजकुमार वाल्मीकि का भाजपा में शामिल होना पार्टी को झटका दे गया है। हालांकि वाल्मीकि अंबाला से अपनी सीट नहीं निकाल सके, लेकिन उन्होंने अपनी हार का ठीकरा कांग्रेस की गुटबाजी पर फोड़ा था। उन्होंने कहा था कि कुमारी सैलजा पूरे चुनाव में उनके प्रचार के लिए ही नहीं पहुंची।
उधर, सोनीपत से पूर्व सांसद जितेंद्र मलिक ने इस बार लोकसभा चुनाव लड़ने की इच्छा ही नहीं जताई थी। उनके अचानक भाजपा में शामिल होने से पार्टी को सोनीपत में भी मजबूती मिलेगी।