Lumpy Virus: जालंधर में लंपी से 37 गायों की मौत, 3810 गायों में लक्षण, गोशालाओं का होगा निरीक्षण
डॉक्टरों ने बताया कि बीमारी बढ़ने का कारण बाहर से खरीदकर लाई जा रही गाएं हैं, जब तक बीमारी ठीक नहीं हो जाती, लोग गायों की खरीददारी बंद कर दें, अन्यथा घर में अन्य पशु भी लंपी की चपेट में आ सकते हैं।
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लंपी बीमारी ने पशु पालन विभाग की नींद उड़ा दी है। विभाग ने पशु चिकित्सक से कहा है कि शहरों की गोशालाओं के साथ गांवों में पशु पालकों के यहां निरीक्षण करें और देखें कितनी गाएं प्रभावित हैं। इनका उपचार कैसे चल रहा है और अगर मौतें हुई हैं तो उसके कारण क्या हैं? जिले में लंपी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और गांवों के साथ शहर की गोशालाओं में भी केस सामने आ रहे हैं।
अब तक जालंधर जिले में 3810 गायों में लंपी के लक्षण मिले हैं और 37 की मौत की पुष्टि हुई है। ये सोमवार की रिपार्ट है। मंगलवार को कितने पशु नए केस मिले इसकी रिपोर्ट देर शाम तक आएगी। पशुओं का इलाज कर रहे जिला पशु अस्पताल के डीडीएएच डॉ. जसपाल सिंह घुम्मन ने बताया कि वह लक्षण के हिसाब से सुबह और शाम को टीके लगा रहे हैं और डिटॉल से नहलाने की सलाह दे रहे हैं।
डॉक्टरों ने बताया कि बीमारी बढ़ने का कारण बाहर से खरीदकर लाई जा रही गाएं हैं, जब तक बीमारी ठीक नहीं हो जाती, लोग गायों की खरीददारी बंद कर दें, अन्यथा घर में अन्य पशु भी लंपी की चपेट में आ सकते हैं। डॉक्टरों के अनुसार लंपी से पीड़ित पशुओं ने खाना कम कर दिया है, जिससे मौतें बढ़ गई हैं, लोग पशुओं को किसी तरह से खिलाने की कोशिश करें।
हालत सुधरने में थोड़ा समय लगेगा, क्योंकि दवाएं कम हैं लेकिन जागरूक कर रहे हैं, ताकि अन्य पशुओं को प्रभावित होने से बचाया जा सके। वहीं गांवों के लोग देशी उपचार को तवज्जो दे रहे हैं। जब गांव वालों से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि लंपी की दवा तो है नहीं फिर टीके से अच्छा तो देसी इलाज है।
गांव में लोग फिटकरी पिला रहे हैं। धूनी दे रहे हैं और कई तरह के लेप बनाकर लगा रहे हैं। लोगों ने कहा कि देशी इलाज में फायदा हो रहा है, थोड़ा समय जरूर लग जाएगा पर हमारे पशु मरेंगे नहीं। हमारे पशु कुछ खा-पी नहीं रहे, सरकारी पशु अस्पतालों के चिकित्सक गारंटी लें कि हमारी गायों को कुछ नहीं होगा तो हम तैयार हैं, जब पशु अस्पतालों में इलाज के दौरान पशु मर रहे हैं तो हम देशी इलाज ही करेंगे।
एनिमल हसबेंडरी के ज्वाइंट डायरेक्टर राम मित्तल ने बताया कि हालात बिगड़ते जा रहे हैं, क्योंकि लोग बाहर से पशु खरीदने से परहेज नहीं कर रहे। ये बीमारी बाहर के पशु खरीदकर यहां लाने से फैली है और अब पंजाब में 38331 गायें स्किन की बीमारी लंपी से प्रभावित हैं। जिसमें 866 ने दम तोड़ दिया है। गांवों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है, जहां सरकारी इलाज नहीं मिल पा रहा और देसी तरीके से पशुओं की जान खतरे में डाल रहे हैं।