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23 साल के सतिंदर का दिल 50 वर्षीय व्यक्ति में धड़का, हादसे के बाद युवक हो गया था ब्रेन डेड
Mon, 02 Sep 2019 02:37 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Mon, 02 Sep 2019 02:37 PM IST
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23 वर्षीय कुराली निवासी सतिंदर भले ही इस दुनिया में न हो, मगर उनका दिल 50 वर्षीय के एक व्यक्ति में धड़क रहा है। जिस व्यक्ति में सतिंदर का हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया है, वह मणिपुर का रहने वाला बताया जा रहा है। मरीज की हालत फिलहाल ठीक है। वह अच्छा रिस्पांस कर रहा है। फिलहाल उसे डाक्टरों की निगरानी में रखा गया है। पीजीआई का यह पांचवां हार्ट ट्रांसप्लांट है। सतिंदर के हार्ट के अलावा किडनी, लिवर और कोर्निया डोनेट किए गए हैं। किडनी और लिवर ट्रांसप्लांट कर दिए गए हैं, जबकि कोर्निया को सुरक्षित रख लिया गया है।
मैचिंग पेशेंट मिलते ही कोर्निया को भी ट्रांसप्लांट कर दिया जाएगा। पीजीआई की ओर से बताया गया है कि 23 वर्षीय सतिंदर 14 अगस्त की रात को बाइक से कहीं जा रहा था, तभी किसी अज्ञात वाहन ने उसे टक्कर मार दी। एक्सीडेंट में सतिंदर के सिर पर गंभीर चोट आई। पहले उसे लोकल हास्पिटल ले जाया गया, जहां से उसे दो दिन बाद पीजीआई रेफर कर दिया गया। करीब 15 दिन तक सतिंदर मौत से जूझता रहा लेकिन शनिवार शाम तीन बजे उसे ब्रेन डेथ घोषित कर दिया गया।
इस दौरान ट्रांसप्लांट को-आर्डिनेटर ने सतिंदर की फैमिली से आर्गन डोनेशन की बात की तो वे इसे लिए तैयार हो गए। सतिंदर के पिता बलविंदर सिंह का कहना है कि उनका बेटा भले ही पास न हो, मगर वह दूसरों के अंदर जिंदा रहेगा। वह घर पर सभी का चहेता था। सतिंदर का लिवर भी पीजीआई के एक मरीज में ट्रांसप्लांट हुआ है। पीजीआई का यह 50वां लिवर ट्रांसप्लांट है। पीजीआई ने सक्सेसफुल हार्ट ट्रांसप्लांट का श्रेय एनिस्थेसिस्ट, कार्डियोलाजिस्ट, कार्डियोवस्कुलर, ट्रांसप्लांट कोर्डिनेटर, टेक्निकल व नर्सिंग स्टाफ को दिया है।
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पीजीआई डायरेक्टर प्रोफेसर जगतराम का कहना है कि पीजीआई लगातार आर्गन डोनेशन व ट्रांसप्लांट में अपनी विशेषता बढ़ा रहा है। हार्ट ट्रांसप्लांट देश के कुछ चुनिंदा संस्थानों में ही हो रहे हैं।
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मैचिंग पेशेंट मिलते ही कोर्निया को भी ट्रांसप्लांट कर दिया जाएगा। पीजीआई की ओर से बताया गया है कि 23 वर्षीय सतिंदर 14 अगस्त की रात को बाइक से कहीं जा रहा था, तभी किसी अज्ञात वाहन ने उसे टक्कर मार दी। एक्सीडेंट में सतिंदर के सिर पर गंभीर चोट आई। पहले उसे लोकल हास्पिटल ले जाया गया, जहां से उसे दो दिन बाद पीजीआई रेफर कर दिया गया। करीब 15 दिन तक सतिंदर मौत से जूझता रहा लेकिन शनिवार शाम तीन बजे उसे ब्रेन डेथ घोषित कर दिया गया।
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इस दौरान ट्रांसप्लांट को-आर्डिनेटर ने सतिंदर की फैमिली से आर्गन डोनेशन की बात की तो वे इसे लिए तैयार हो गए। सतिंदर के पिता बलविंदर सिंह का कहना है कि उनका बेटा भले ही पास न हो, मगर वह दूसरों के अंदर जिंदा रहेगा। वह घर पर सभी का चहेता था। सतिंदर का लिवर भी पीजीआई के एक मरीज में ट्रांसप्लांट हुआ है। पीजीआई का यह 50वां लिवर ट्रांसप्लांट है। पीजीआई ने सक्सेसफुल हार्ट ट्रांसप्लांट का श्रेय एनिस्थेसिस्ट, कार्डियोलाजिस्ट, कार्डियोवस्कुलर, ट्रांसप्लांट कोर्डिनेटर, टेक्निकल व नर्सिंग स्टाफ को दिया है।
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पीजीआई डायरेक्टर प्रोफेसर जगतराम का कहना है कि पीजीआई लगातार आर्गन डोनेशन व ट्रांसप्लांट में अपनी विशेषता बढ़ा रहा है। हार्ट ट्रांसप्लांट देश के कुछ चुनिंदा संस्थानों में ही हो रहे हैं।