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जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान भीड़ और पुलिस के बीच हिंसक झड़प मामले में 19 युवक बरी

Sun, 21 Jul 2019 04:21 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा) Published by: ajay kumar Updated Sun, 21 Jul 2019 04:21 PM IST
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19 Accused are Acquitted In Rohtak By Court
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान फरवरी 2016 में शीला बाईपास पर भीड़ और पुलिस के बीच हिंसक झड़प के मामले में गिरफ्तार 19 आरोपी युवकों को कोर्ट ने शनिवार को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। हालांकि, पुलिस ने केस के अंदर एक युवक से तेजधार चाकू, दूसरे से लोहे के पाइप बरामद दर्शाए थे। 

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बचाव पक्ष के वकील का कहना है कि आरोपियों को संदेह का लाभ मिला है। बरी होने वाले युवकों में 9-9 लाखनमाजरा खंड के गांव खरैंटी व सांपला खंड के गांव कसरेंहटी और एक सोनीपत जिले के गांव बिलबिलान का रहने वाला है।
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मामले के अनुसार अर्बन एस्टेट थाने के एएसआई राजेश कुमार 21 फरवरी को ड्यूटी के चलते शीला बाईपास पर तैनात थे। साथ में सेना, पुलिस व जिला प्रशासन के अधिकारी भी थे। इसी बीच शीला बाईपास पर भीड़ जमा हो गई। कुछ युवक सोनीपत स्टैंड की तरफ से आ गए। लोगों के हाथों में लाठी, डंडे, जैली, चाकू, पेट्रोल बम भी थे।
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ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने चेतावनी दी, लेकिन भीड़ पर असर नहीं हुआ। इसके बाद आंसू गैस व टीयर गैस का प्रयोग किया गया, लेकिन भीड़ तितर-बितर नहीं हुई। इसी बीच भीड़ ने पुलिस पर हमला बोल दिया और आगजनी शुरू कर दी। पुलिस को हवाई फायरिंग करनी पड़ी। इसके चलते भीड़ इधर से उधर हो गई। 

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कसरेंहटी गांव निवासी मोहित, अमित, देवेंद्र, अन्य देवेंद्र, विक्रम, राजेश, मनोज, रणधीर व मंगल और खरेंटी गांव निवासी अशोक, विक्रम, राहुल, संदीप, सुनील, विशाल, सुमित, आशीष व जयदीप और सोनीपत जिले के गांव बिलबिलान निवासी राजेश को काबू किया। 

तलाशी के दौरान अशोक से लोहे का पाइप, विशाल से चाकू और संदीप, सुनील व राहुल से लकड़ी के बिंडे बरामद किए। पुलिस ने दर्ज एफआईआर में लिखा है कि भीड़ ने पेट्रोल बम का प्रयोग कर आगजनी करते हुए सरकारी ड्यूटी में बाधा डाली। इसके चलते आरोपियों को आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 186, 188, 436 व 25, 54 व 59 आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया था।

डीएसपी ने की जांच, आईपीसी की धारा 511 भी जोड़ी
आरोपियों की गिरफ्तार के बाद मामले की जांच पड़ताल में आईपीसी की धारा 353 जोड़ी गई। साथ ही डीएसपी विवेक चौधरी ने पड़ताल की। इसके बाद आगजनी के प्रयास का मामला भी पाया गया। साथ ही पुलिस ने धारा 511 भी केस के अंदर जोड़ दी। तीन साल से जिला अदालत में केस की सुनवाई चली।

पहले मामला एडीजे फखरुद्दीन की अदालत में चल रहा था। बाद में एडीजे रितु वाईके बहल की कोर्ट में केस आ गया। पुलिस अदालत में एफआईआर में दर्ज आरोपियों को साबित नहीं कर सकी। इसके चलते शनिवार को साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया।

मामले में पुलिस ने एक युवक से चाकू, एक से लोहे का पाइप व तीन से बिंडों की बरामदगी दर्शाई है, लेकिन जांच टीम कोर्ट में कोई ठोस सबूत नहीं दे सकी। इसके चलते संदेह का लाभ देते हुए अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया। -जितेंद्र हुड्डा, वकील बचाव पक्ष

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