लॉकडाउन के छह माह बाद चंडीगढ़ की 1800 फैक्ट्रियां प्रभावित, आधा रह गया काम
कोरोना वायरस के चलते चंडीगढ़ के उद्योगों की कमर टूट चुकी है। अधिकांश उद्योग अपनी क्षमता से 50 फीसदी कम काम कर रहे हैं। उद्योगपतियों का मानना है कि अभी मांग और पूर्ति में काफी अंतर है। इस वजह से उद्योग जगत भी संकट में है। शहर में एमएसएमई में रजिस्टर्ड करीब 1800 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट हैं और करीब 600 आईटी व कंसलटेंट कंपनियां है, लेकिन 25 मार्च के बाद से से ये सब कछुए की चाल चल रहे हैं।
उद्योगपतियों के अनुसार, लॉकडाउन से जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई में कई साल निकल जाएंगे। वर्तमान स्थिति में लगभग सभी उद्योग शुरू तो हो गए लेकिन उनके पास अभी नए ऑर्डर ही नहीं है। खेती-किसानी से जुड़े उद्योगों की स्थिति ठीक है। ट्रैक्टर और इसके पार्ट्स बनाने वाले उद्योगों के पास मांग कम है।
फार्मा इंड्रस्टीज को अधिक परेशानी नहीं है लेकिन शहर का फास्टनर उद्योग बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। केमिकल, फर्नीचर, फूड, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो पार्ट्स, इंडस्ट्रियल केमिकल सहित तमाम इंडस्ट्री लॉकडाउन के दौरान भारी नुकसान झेल चुकी हैं, जो अब धीरे-धीरे संभलने की कोशिश कर रही हैं। उद्योगपतियों ने कहा कि केंद्र सरकार ने एमएसएमई के लिए पैकेज दिया लेकिन उसका कोई खास लाभ नहीं हुआ।
इसलिए नहीं मिल रहे आर्डर
चंडीगढ़ में बनने वाला सामान दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े राज्यों में जाता है लेकिन यही राज्य कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित थे। नए ऑर्डर नहीं मिल रहे, जो पुराने ऑर्डर थे, कंपनियां वह सामान उठा नहीं रही थीं, क्योंकि आगे मार्केट में डिमांड नहीं थी। रॉ मैटेरियल समय पर नहीं पहुंच रहा था। ट्रांसपोर्टेशन की चिंताएं काफी ज्यादा बढ़ गईं थीं। इससे इंडस्ट्रीज की चेन पूरी तरह से बिगड़ गई।
कामगारों की कमी भी उद्योगपतियों को झेलनी पड़ी, क्योंकि ज्यादातर मजदूर अपने घर की ओर जा चुके थे। यही नहीं, कामगारों को काम पर लेने से पहले उनका कोरोना संक्रमण जांच कराना, जांच का खर्च प्रशासन की ओर से न उठाना, सैनिटाइजर खरीदना, कर्मचारियों को मास्क देना, शारीरिक दूरी के मानक को बनाए रखने के लिए मशीनरी उपकरण शिफ्टिग में समय व पैसे खर्च होने की बंदिशों से भी व्यापारी काफी परेशान हैं।
डिमांड नहीं, इसलिए उत्पादन कम
बाजार में डिमांड नहीं है, इसलिए उत्पादन काफी कम हो गया है। शहर के उद्योगपति बहुत परेशान हैं। इज ऑफ डूइंग बिजनेस की रैंकिंग ने भी इसकी पुष्टि की है। उद्योग अब धीरे-धीरे गति पकड़ रहे हैं। - नवीन मंगलानी, प्रेसिडेंट, चैंबर ऑफ चंडीगढ़ इंडस्ट्रीज
बाजार में मांग ही नहीं है
शहर में ऐसी कोई भी फैक्ट्री नहीं है, जिसे कोरोना वायरस की वजह से नुकसान नहीं हुआ हो। बाजार में मांग घटी है, जिसकी वजह से उत्पादन कम है। लोग इन दिनों खर्च करने से बच रहे हैं। लॉकडाउन के पहले से ही शहर के व्यापारी घर बैठे हुए हैं। केंद्र सरकार ने राहत पैकेज का एलान तो किया लेकिन जमीनी स्तर पर उसका कुछ खास लाभ देखने को नहीं मिला। - एमपीएस चावला, प्रेसिडेंट, चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल एसोसिएशन