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140 साल पुराने रिकॉर्ड को मिलेगा नया जीवन, पीयू का डाटा होगा ऑनलाइन
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी 140 साल के रिकॉर्ड को ऑनलाइन करेगी। यह रिकॉर्ड लगातार धुंधला होता जा रहा है। कई के पेज फट रहे हैं तो कुछ पीले पड़ चुके हैं। इससे निजात पाने के लिए यह कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही आग आदि लगने पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि पीयू के पास पूरा डाटा ऑनलाइन फॉर्मेट में मौजूद रहेगा।
वर्ष 1882 में लाहौर से पंजाब विश्वविद्यालय शुरू हुआ था। उसके बाद 1956 में चंडीगढ़ कैंपस में शुरू हुआ। शुरू से लेकर आज तक का रिकॉर्ड पीयू के पास है। पुराना रिकॉर्ड होने के कारण उसकी हालत ठीक नहीं है। अलमारियों में रखा रखा रिकॉर्ड पीला पड़ रहा है। इस रिकॉर्ड को और नुकसान न हो, पीयू इसका डिजिटलीकरण करना चाहती है। इसकी योजना पांच साल पहले बनी थी, लेकिन इस पर समुचित काम नहीं हो पाया। इसके लिए अब एजेंसी का चयन होना है। सूत्रों का कहना है कि जो एजेंसी डिग्रियां ऑनलाइन कर रही हैं, उसी को रिकॉर्ड ऑनलाइन करने का जिम्मा दिया जा सकता है। लाखों फाइलें अपलोड होंगी। इसमें समय भी लगेगा। जानकारों का कहना है कि दो साल में यह पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन हो सकता है। इसके लिए पीयू को लाखों रुपये खर्च करने होंगे, लेकिन रिकॉर्ड पूरा सुरक्षित हो जाएगा। एक ही क्लिक में मनचाहे वर्ष का रिकॉर्ड अधिकारी देख सकेंगे और छात्रों को भी इसका लाभ मिल सकेगा। समय की बचत होगी।
यह रिकॉर्ड भी होंगे डिजिटलीकरण
पीयू से जुड़ी हस्तियों, पुराने अधिकारियों, गजट, किताबें, कैलेंडर, स्कैच आदि रिकॉर्ड का भी डिजिटलीकरण करना होगा। इस कार्य में भी छह माह से अधिक का समय एजेंसी को लग सकता है। सूत्रों का कहना है कि एजेंसी का चयन पीयू परीक्षा के बाद कर सकती है। अनुबंध होने के बाद ही इस कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा।
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डिग्रियां ऑनलाइन की जा रहीं
पंजाब विश्वविद्यालय ने डिग्रियां ऑनलाइन करने का काम तीन साल पहले शुरू कर दिया था। प्रारंभिक चरण में पीएचडी की डिग्रियां ऑनलाइन की गई थीं। उसके बाद 15 हजार से अधिक परास्नातक के विद्यार्थियों की डिग्रियां ऑनलाइन की गईं। फिलहाल इन डिग्रियों के ऑनलाइन का काम बंद है, क्योंकि पीयू सेमेस्टर परीक्षा में जुटी है। परीक्षा के बाद फिर से इस पर काम शुरू होगा। पीयू का कहना है कि पहले चरण में सभी परास्नातक की डिग्रियां ऑनलाइन कर दी जाएंगी। उसके बाद स्नातक के विद्यार्थियों की डिग्रियां ली जाएंगी। इस कार्य में कुछ समय लगेगा, लेकिन बाद में सब कार्य आसान हो जाएंगे।
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वर्ष 1882 में लाहौर से पंजाब विश्वविद्यालय शुरू हुआ था। उसके बाद 1956 में चंडीगढ़ कैंपस में शुरू हुआ। शुरू से लेकर आज तक का रिकॉर्ड पीयू के पास है। पुराना रिकॉर्ड होने के कारण उसकी हालत ठीक नहीं है। अलमारियों में रखा रखा रिकॉर्ड पीला पड़ रहा है। इस रिकॉर्ड को और नुकसान न हो, पीयू इसका डिजिटलीकरण करना चाहती है। इसकी योजना पांच साल पहले बनी थी, लेकिन इस पर समुचित काम नहीं हो पाया। इसके लिए अब एजेंसी का चयन होना है। सूत्रों का कहना है कि जो एजेंसी डिग्रियां ऑनलाइन कर रही हैं, उसी को रिकॉर्ड ऑनलाइन करने का जिम्मा दिया जा सकता है। लाखों फाइलें अपलोड होंगी। इसमें समय भी लगेगा। जानकारों का कहना है कि दो साल में यह पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन हो सकता है। इसके लिए पीयू को लाखों रुपये खर्च करने होंगे, लेकिन रिकॉर्ड पूरा सुरक्षित हो जाएगा। एक ही क्लिक में मनचाहे वर्ष का रिकॉर्ड अधिकारी देख सकेंगे और छात्रों को भी इसका लाभ मिल सकेगा। समय की बचत होगी।
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यह रिकॉर्ड भी होंगे डिजिटलीकरण
पीयू से जुड़ी हस्तियों, पुराने अधिकारियों, गजट, किताबें, कैलेंडर, स्कैच आदि रिकॉर्ड का भी डिजिटलीकरण करना होगा। इस कार्य में भी छह माह से अधिक का समय एजेंसी को लग सकता है। सूत्रों का कहना है कि एजेंसी का चयन पीयू परीक्षा के बाद कर सकती है। अनुबंध होने के बाद ही इस कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा।
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डिग्रियां ऑनलाइन की जा रहीं
पंजाब विश्वविद्यालय ने डिग्रियां ऑनलाइन करने का काम तीन साल पहले शुरू कर दिया था। प्रारंभिक चरण में पीएचडी की डिग्रियां ऑनलाइन की गई थीं। उसके बाद 15 हजार से अधिक परास्नातक के विद्यार्थियों की डिग्रियां ऑनलाइन की गईं। फिलहाल इन डिग्रियों के ऑनलाइन का काम बंद है, क्योंकि पीयू सेमेस्टर परीक्षा में जुटी है। परीक्षा के बाद फिर से इस पर काम शुरू होगा। पीयू का कहना है कि पहले चरण में सभी परास्नातक की डिग्रियां ऑनलाइन कर दी जाएंगी। उसके बाद स्नातक के विद्यार्थियों की डिग्रियां ली जाएंगी। इस कार्य में कुछ समय लगेगा, लेकिन बाद में सब कार्य आसान हो जाएंगे।