मंगल 12 अप्रैल को मेष राशि में प्रवेश कर रहा है और सूर्य 13 अप्रैल को इस राशि में पहुंच रहा है। इन दोनों ग्रहों से पहले केतु और शुक्र इस राशि में मौजूद हैं। मंगल और मेष के इस राशि में आ जाने से चतुर्ग्रही योग बनेगा।
'पण्डित जयगोविंद शास्त्री' बताते हैं कि मेष राशि में इस तरह की चतुर्ग्रही योग का निर्माण लगभग 18 वर्षों बाद होने जा रहा है। मंगल इस राशि में आते ही अपने घर में होगा और सूर्य अपनी उच्च राशि में। इस ग्रह योग से कई रोचक तथा अप्रत्याशित परिणाम सामने आ सकते हैं।
केतु इस राशि में 18 वर्षों के बाद आया है। सूर्य, मंगल और केतु ये तीनों अग्नि तत्व के कारक और पाप नाशक ग्रह हैं। शुक्र के साथ इनका योग पृथ्वी वासियों को सूखे एवं अग्निकांड का भय दिलाने वाला साबित हो सकता है।
फलित ज्योतिष के अनुसार कार्य व्यापार की दृष्टि से यह योग कुछेक राशियों के जातकों को छोड़कर सभी के लिए वरदान की तरह है, लेकिन मेष और तुला राशि वालों को क्रोध एवं आवेश पर नियंत्रण रखना होगा।
शेयर बाज़ार में ट्रेडिंग के दृष्टिकोण से यह योग रीयलस्टेट, पावर, मेटल्स ज्वलनशील पदार्थों और इन्फ्रा के सेक्टर्स के लिए वरदान की तरह रहेगा। अग्नितत्व की अन्य राशियों सिंह एवं धनु के लिए भी कमोवेश ऐसा ही रहेगा किन्तु स्वास्थ्य और स्वभाव पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ेगा।
पृथ्वी तत्व की राशियों वृष, कन्या और मकर के लिए यह चतुर्ग्रही एवं अंगारक योग भागदौड़, षड्यंत्र का शिकार और मानसिक परेशानी बढाने वाला रहेगा।
इस राशि के जातकों को इस अवधि में शीघ्रता से दूसरों पर विश्वास नहीं करना चाहिए अन्यया आर्थिक हानि की प्रबल संभावना रहेगी। जल तत्व की राशियों कर्क, वृश्चिक एवं मीन के लिए यह योग पद एवं गरिमा बढ़ाने वाला तथा राज्य लाभ, शत्रुओं के पराभव एवं मुकदमों में विजय तथा आकस्मिक धन लाभ के साथ-साथ पारिवारिक कलह देने वाला भी रहेगा।
वायु तत्व की राशियों मिथुन, तुला एवं कुंभ के लिए यह चतुर्ग्रही योग बड़े भाइयों से मतभेद, पारिवारिक कलह, प्रेम संबंधों में कटुता तथा व्यापार में अपेक्षाकृत कम लाभ दिलाने वाला रहेगा। कुंभ राशि के लिए विशेषतः साहस एवं पराक्रम बढ़ाने वाला होगा।