शादी
का सीजन शुरू हो गया है। बैंड बाजा और बारात को देखकर आपके भी अरमान जग उठे हैं तो
जरा संभल जाइये। विवाह की तैयारी से पहले देख लीजिए कि आपके लिए किस उम्र में शादी
करना उचित रहेगा। अगर आपकी आयु कुण्डली के हिसाब से सही नहीं है तो वैवाहिक जीवन
में तनाव और दूरियां आ सकती है। लाल किताब के नियम बहुत ही आसान हैं आप अपनी
कुण्डली खुद भी देखकर जान सकते हैं कि आपको किस उम्र में शादी नहीं करनी चाहिए।
इस किताब में बताया गया है कि जिनकी कुण्डली में सूर्य, बुध और राहु एक साथ
एक घर में बैठा होता है उनका वैवाहिक जीवन संघर्षपूर्ण होता है। ऐसे लोगों की एक से
अधिक शादी होने की संभावना रहती है। सूर्य जिनकी कुण्डली में छठे घर होता है और शनि
12 वें घर में उनकी भी एक से अधिक शादी हो सकती है। इस स्थिति में वैवाहिक जीवन के
सुख को बनाए रखने के लिए लाल किताब में उपाय बताया गया है कि विवाह के समय ससुराल
पक्ष से दो तांबे एवं चांदी के चौकोर टुकड़े लें। एक टुकड़ा पानी में बहा दें और
दूसरा अपने पास रखें।
जिनकी जन्मपत्री में राहु सातवें घर में बैठा होता है
उसे 21वें वर्ष में शादी नहीं करनी चाहिए। ऐसा करना से वैवाहिक जीवन तनावपूर्ण होता
है। पति-पत्नी एक दूसरे से अलग हो सकते हैं। कुण्डली में लग्न स्थान यानी पहले घर
में चन्द्रमा बैठा हो तो 25 वें वर्ष में शादी नहीं करनी चाहिए। 25 वां वर्ष
चन्द्रमा की आयु मानी जाती है। चन्द्रमा की दृष्टि सातवें घर पर होती है जो शुक्र
का घर है। शुक्र और चन्द्रमा में शत्रुता होने के कारण वैवाहिक जीवन का सुख
प्रभावित होता है।
कुण्डली में अगर सूर्य और शुक्र एक साथ एक घर में बैठे
हों तो विवाह के लिए 22 वां और 25वां वर्ष शुभ नहीं होता है। इस उम्र में विवाह
करने पर पति-पत्नी के संबंध अच्छे नहीं रहते हैं। शुभ ग्रहों का प्रभाव नहीं हो तो
अलगाव भी हो सकता है। इस किताब में विवाह के संबंध में बताया गया कि जिस व्यक्ति की
कुण्डली में बुध छठे घर में बैठा होता है उसे अपनी बेटी की शादी उत्तर दिशा में
रहने वाले व्यक्ति से नहीं करनी चाहिए। इससे विवाह के बाद बेटी को दुःख उठाना पड़ता
है।