मां दुर्गा शक्ति की देवी हैं। शास्त्रों में इन्हें तंत्र, मंत्र और सामर्थ्य की देवी के रूप में बताया गया है। इनकी भक्ति करने से संसार में मौजूद हर तरह की सुख सुविधाएं भक्तों के सहज ही प्राप्त हो जाती है। ग्रहों दोषों के कारण जीवन में आने वाली परेशानी भी माता की कृपा से दूर हो जाती है। ग्रहों दोषों को दूर करने के लिए माता की भक्ति विशेष लाभप्रद है।
इस बात का प्रमाण यह है कि, ग्रहों की संख्या नौ है और माता के भी नौ रूप हैं। व्यक्ति को जिस ग्रह के कारण परेशानी आ रही है उस ग्रह से संबंधित माता के स्वरूप की पूजा करनी चाहिए। इससे ग्रह दोष का कुप्रभाव समाप्त हो जाएगा। मां दुर्गा का प्रथम रूप है शैलपुत्री का। माता का यह रूप चन्द्रा के अशुभ प्रभाव को दूर करने वाला है।
जिन लोगों का मन बहुत चंचल रहता है। निर्णय लेने में कठिनाई होती है। उन्हें देवी शैलपुत्री की पूजा करनी चाहिए। सर्दी-जुकाम एवं रक्त संबंधी रोग से मुक्ति तथा संपत्ति और वस्त्राभूषण में वृद्धि के लिए भी शैलपुत्री की भक्ति लाभप्रद होती है।
बुध ग्रह के कारण जीवन में आने वाली समस्याओं से मुक्ति के लिए मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप ब्रह्मचारिणी देवी की पूजा करनी चाहिए। माता के इस स्वरूप की पूजा करने से वाणी प्रभावशाली होती है। गले संबंधी रोग से मुक्ति मिलती है। संतान सुख की प्राप्ति के लिए भी मां ब्रह्मचारिणी पूजा कल्याणकारी रहती है।
मां का तीसरा रूप है चन्द्रघंटा का। माता का यह स्वरूप गुरू ग्रह के दोष से मुक्ति दिलाने में सहायक है। चन्द्रघंटा देवी की भक्ति करने से उन्नति एवं शिक्षा के क्षेत्र में आने वाली बाधा दूर होती है। सोना एवं धन-संपत्ति में वृद्धि होती है।
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