रक्षाबंधन पर्व मनाने के बाद रविवार की छुट्टी पर अपने-अपने गंतव्य के लिए वापस लौट रहे भाई-बहनों और नौकरीपेशा लोगों के कारण टूंडला रेलवे स्टेशन पर यात्रियों का सैलाब उमड़ पड़ा। आलम यह था कि प्लेटफार्म पर पैर रखने तक की जगह नहीं बची और पूरा स्टेशन परिसर खचाखच भरा नजर आया। रविवार का दिन होने के कारण स्टेशन पर सुबह से ही रेल यात्रियों की भारी भीड़ जुटने लगी थी। जैसे-जैसे दिन ढलता गया, प्लेटफार्मों पर स्थिति और विकट होती गई। स्टेशन से गुजरने वाली तमाम ट्रेनें पहले से ही फुल होकर आ रही थीं। भीड़ का सबसे बुरा असर प्लेटफार्म पर खड़े यात्रियों पर पड़ा। ट्रेनों के कोच में अंदर पहले से मौजूद यात्रियों ने भीड़ के डर से कोच के दरवाजे अंदर से बंद कर लिए और प्लेटफार्म पर खड़े लोगों के लिए गेट ही नहीं खोले। इस वजह से ट्रेन का घंटों इंतजार करने के बाद भी कई यात्री ट्रेन में नहीं चढ़ पाए। हद तो तब हो गई जब कंफर्म रिजर्वेशन टिकट होने के बावजूद कई रेल यात्री बोगियों के भीतर दाखिल नहीं हो सके और उनकी ट्रेन छूट गई। सुरक्षा और व्यवस्था के मामले में रेलवे पुलिस (जीआरपी /आरपीएफ ) लगातार भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास करती दिखी, लेकिन यात्रियों की अत्यधिक संख्या के आगे सारे इंतजाम नाकाफी साबित हुए। कदाचित स्टेशन के साथ-साथ नगर के बस स्टैंड का हाल भी कुछ ऐसा ही था। ट्रेन न पकड़ पाने वाले यात्री जब बसों की ओर भागे, तो वहां भी उन्हें भारी निराशा हाथ लगी। बसों में भी चढ़ने को लेकर आपाधापी मची रही और यात्रियों को भीषण गर्मी व उमस में घंटों इंतजार करना पड़ा।