आगरा में स्कूली वाहनों की कमियां दूर करने के लिए संचालकों को 31 अगस्त तक का समय दिया गया था। मंगलवार एक सितंबर से जांच में कोई भी अनफिट स्कूली वाहन सड़क पर चलता मिला तो संचालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। स्कूलों के प्रधानाचार्य या संचालक को लेटरहेड पर प्रमाणपत्र देना होगा, जिसमें छात्र-छात्राओं को ले जाने के लिए लगे हुए वाहनों की संख्या और फिटनेस की जानकारी स्पष्ट करनी होगी। एआरटीओ प्रवर्तन आलोक कुमार ने बताया कि मिशन सेफ फ्यूचर 2.0 के तहत 11 से 25 अगस्त तक स्कूली वाहनों की फिटनेस और जरूरी दस्तावेज की जांच की गई थी। इस दौरान 187 वाहनों के चालान किए गए, 49 का संचालन बंद कराया गया और 52 अनफिट मिले थे। अनफिट वाहनों संचालकों को पंजीकृत डाक से नोटिस भेजे गए थे। विभागीय कर्मचारियों ने स्कूलों पहुंचकर भी नोटिस तामील कराए थे। स्कूलों में टीमें भेजकर वाहनों का भौतिक सत्यापन कराया गया था। संचालकों से खड़े वाहनों की गूगल फोटो प्रधानाचार्य के लेटरहैड पर लगाकर देने, वाहन कब से खड़ा है, कितने वाहन कट चुके हैं और कितने संचालित हो रहे हैं, इसकी प्रमाणित जानकारी भी मांगी गई थी। डीआईओएस और बीएसए को भी पत्र लिख अनफिट वाहनों का प्रयोग करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई करने को कहा गया था।