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रेलवे के संपत्ति मौद्रीकरण की रफ्तार पड़ी धीमी, केवल 7,000 करोड़ रुपये ही जुटाए

Fri, 25 Sep 2026 03:20 AM IST
Bhaskar Tiwari वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम

देश के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने और निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई रेलवे परिसंपत्ति मौद्रीकरण (Asset Monetisation) योजना की रफ्तार फिलहाल धीमी नजर आ रही है। पिछले वित्त वर्ष में भारतीय रेलवे ने विभिन्न परिसंपत्तियों के मौद्रीकरण के जरिए करीब 21,000 करोड़ रुपये जुटाए थे, लेकिन चालू वित्त वर्ष के शुरुआती महीनों में अब तक लगभग 7,000 करोड़ रुपये ही जुटाए जा सके हैं। यह आंकड़ा बताता है कि पिछले साल की तुलना में मौद्रीकरण की गति फिलहाल कम है। परिसंपत्ति मौद्रीकरण का मूल उद्देश्य मौजूदा सरकारी संपत्तियों से आर्थिक मूल्य हासिल करना है, ताकि उनसे मिलने वाले संसाधनों को नई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में लगाया जा सके। रेलवे के मामले में इसमें जमीन, माल ढुलाई से जुड़ी संपत्तियां, रेलवे स्टेशनों और अन्य वाणिज्यिक परिसंपत्तियों से राजस्व जुटाने जैसे प्रयास शामिल हो सकते हैं। सरकार ने वर्ष 2021 में नेशनल मॉनेटाइजेशन पाइपलाइन (NMP) की शुरुआत की थी। इसका मकसद सार्वजनिक क्षेत्र की मौजूदा परिसंपत्तियों का बेहतर इस्तेमाल करते हुए निजी निवेश को आकर्षित करना और उससे मिलने वाले संसाधनों को नई आधारभूत संरचना के निर्माण में लगाना है।

 इसके बाद NMP 2.0 को फरवरी 2026 में लॉन्च किया गया। इस दूसरे चरण के तहत वर्ष 2026 से 2030 के बीच देश के 12 प्रमुख क्षेत्रों से कुल 16.72 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। इस पूरी योजना में भारतीय रेलवे की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। रेलवे के लिए करीब 2.62 लाख करोड़ रुपये का मौद्रीकरण लक्ष्य निर्धारित किया गया है। ऐसे में चालू वित्त वर्ष में अब तक जुटाए गए 7,000 करोड़ रुपये की राशि को इस बड़े लक्ष्य के संदर्भ में देखा जाए तो रेलवे के सामने अभी लंबा रास्ता बाकी है। हालांकि, शुरुआती महीनों के आंकड़ों से पूरे वित्त वर्ष के अंतिम परिणाम का आकलन करना जल्दबाजी होगा, क्योंकि बड़ी परियोजनाओं और परिसंपत्तियों के मौद्रीकरण में प्रक्रिया पूरी होने में समय लग सकता है। सरकार के सामने अब प्रमुख चुनौती ऐसी परिसंपत्तियों की पहचान, निविदा प्रक्रिया, निजी निवेशकों की भागीदारी और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने की है। रेलवे के लिए मौद्रीकरण सिर्फ अतिरिक्त राजस्व जुटाने का माध्यम नहीं है, बल्कि इसका संबंध आधुनिक रेलवे ढांचे, बेहतर यात्री सुविधाओं, माल ढुलाई क्षमता और नई परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने से भी है। यदि मौद्रीकरण की गति बढ़ती है तो इससे रेलवे को अपनी मौजूदा परिसंपत्तियों से अधिक आर्थिक मूल्य हासिल करने और बुनियादी ढांचे में दोबारा निवेश करने में मदद मिल सकती है। वहीं, लक्ष्य की तुलना में धीमी प्रगति जारी रहने पर निर्धारित 2.62 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आने वाले वर्षों में अधिक सक्रियता की आवश्यकता होगी।

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