एचआरटीसी इंटक के पूर्व अध्यक्ष उमेश शर्मा ने बस चालक के निलंबन को लेकर निगम प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जिस चालक ने बस की ब्रेक फेल होने के बाद सूझबूझ और साहस का परिचय देते हुए यात्रियों की जान बचाई, उसे शाबाशी देने और सम्मानित करने के बजाय निलंबित कर दिया गया। उमेश शर्मा ने इस कार्रवाई को संदेह के घेरे में बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उमेश शर्मा ने कहा कि रक्षा बंधन के दिन ब्यासर सड़क पर चलती बस की ब्रेक फेल हो गई थी। ऐसी स्थिति में चालक ने घबराने के बजाय समझदारी से काम लिया और बस में सवार यात्रियों को सुरक्षित बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हादसे के बाद अधिकारियों ने भी चालक की सूझबूझ की सराहना की थी। उस समय उसकी पीठ थपथपाने के साथ सम्मानित करने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि हादसे के 12 दिन बाद चालक के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई। इतने अंतराल के बाद की गई कार्रवाई पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उमेश शर्मा के अनुसार, यदि चालक की भूमिका हादसे के समय सराहनीय थी तो बाद में उसके खिलाफ कार्रवाई करने का आधार क्या रहा, यह निगम प्रबंधन को स्पष्ट करना चाहिए। उमेश शर्मा ने आरोप लगाया कि जानकारी के अनुसार यही चालक मनाली में इलेक्ट्रिक बसों से जुड़े कथित घोटाले का मामला भी उठा चुका है और इसकी जांच की मांग कर चुका है। उन्होंने कहा कि रोहतांग के लिए संचालित इलेक्ट्रिक बस के मामले में भी निगम की ओर से करीब एक महीने बाद चालक को नोटिस जारी किया गया था। ऐसे में मौजूदा निलंबन की कार्रवाई को लेकर संदेह पैदा होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि तकनीकी जांच की रिपोर्ट सामान्य तौर पर कुछ दिनों में सामने आ जाती है। यदि जांच में कोई गंभीर लापरवाही सामने आई है तो निगम को उसकी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। वहीं, यदि चालक ने यात्रियों की जान बचाने के लिए तत्परता दिखाई थी तो उसके योगदान को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उमेश शर्मा ने निगम प्रबंधन से मांग की कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करवाई जाए। साथ ही चालक के निलंबन पर पुनर्विचार करते हुए यह स्पष्ट किया जाए कि कार्रवाई किन तथ्यों और जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है। उन्होंने कहा कि किसी भी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई राजनीतिक या व्यक्तिगत कारणों से नहीं, बल्कि तथ्यों और नियमों के आधार पर होनी चाहिए।