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Why did Kapil Sibal praise PM Modi? What did he say about the 2026 BRICS Summit?
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कपिल सिब्बल ने क्यों की पीएम मोदी की तारीफ? ब्रिक्स समिट 2026 पर ऐसा क्या बोले?
दिल्ली में हुए BRICS शिखर सम्मेलन को लेकर विपक्ष की ओर से भी मोदी सरकार की तारीफ सामने आई है। वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने BRICS बैठक और सम्मेलन के घोषणापत्र की सराहना करते हुए इसे सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया। सिब्बल ने कहा कि BRICS की बैठक हुई, एक विस्तृत संयुक्त बयान जारी हुआ और सबसे अहम बात ये रही कि कोई बड़ा विवाद सामने नहीं आया।
कपिल सिब्बल के मुताबिक, भारत के लिए यह आसान स्थिति नहीं थी। BRICS में शामिल देशों के बीच कई गंभीर राजनीतिक और रणनीतिक मतभेद हैं। ऐसे में अगर सम्मेलन के दौरान किसी मुद्दे पर विवाद खड़ा होता, तो पूरे समूह के भीतर कड़वाहट बढ़ सकती थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और सभी देशों के बीच सहमति से संयुक्त बयान जारी किया गया। सिब्बल ने इसे मोदी सरकार के लिए वाकई एक उल्लेखनीय उपलब्धि बताया।
दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सिब्बल ने BRICS देशों के बीच मौजूद अलग-अलग विवादों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि संगठन के मंच पर सीमा विवादों को उठाना संभव नहीं है, क्योंकि ये मूल रूप से द्विपक्षीय मुद्दे हैं और ऐसे मंच के जरिए इनका समाधान नहीं किया जा सकता।
सिब्बल ने पश्चिम एशिया की स्थिति का उदाहरण देते हुए कहा कि BRICS में मिस्र जैसे देश हैं, जिनके अमेरिका के साथ करीबी संबंध हैं। वहीं ईरान का अमेरिका और इजरायल के साथ टकराव चल रहा है। ऐसी स्थिति में BRICS के भीतर ऐसा कोई प्रस्ताव पारित करना मुश्किल होगा, जिसमें अमेरिका या ईरान में से किसी एक को दोषी ठहराया जाए।
उन्होंने सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के अमेरिका के साथ गहरे संबंधों का भी उल्लेख किया। साथ ही शिया-सुन्नी विभाजन जैसी जटिलताओं की ओर इशारा करते हुए कहा कि जब संगठन में इतने अलग-अलग हित और मतभेद मौजूद हों, तो सभी देशों के बीच ठोस तालमेल बनाना आसान नहीं है।
यही वजह है कि सिब्बल ने BRICS के संयुक्त बयान को महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक, BRICS अब अलग-अलग राजनीतिक और रणनीतिक हित रखने वाले देशों का मिला-जुला समूह है। ऐसे में इससे किसी क्रांतिकारी या बेहद ठोस साझा प्रस्ताव की उम्मीद करना आसान नहीं है। लेकिन इसके बावजूद सभी देशों का एक संयुक्त बयान पर सहमत होना अपने आप में बड़ी कामयाबी है।
हालांकि कपिल सिब्बल ने BRICS की मौजूदा तस्वीर पर बात करते हुए इसका इतिहास भी याद दिलाया। उन्होंने कहा कि BRICS की शुरुआत 2006 में चार देशों- ब्राजील, भारत, रूस और चीन के साथ हुई थी। इसके बाद 2011 में दक्षिण अफ्रीका इसमें शामिल हुआ और ये देश BRICS के शुरुआती प्रमुख सदस्य बने। समय के साथ संगठन का विस्तार हुआ और अब इसमें 11 देश शामिल हैं।
सिब्बल ने BRICS के इतिहास में यूपीए सरकार के योगदान का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2012 में BRICS की बैठक यूपीए सरकार के दौरान हुई थी, जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे। इसी दौरान न्यू डेवलपमेंट बैंक बनाने का प्रस्ताव सामने आया था। सिब्बल ने कहा कि मनमोहन सिंह का इसमें योगदान था।
यानी BRICS सम्मेलन पर कपिल सिब्बल का बयान राजनीतिक रूप से भी खास है। विपक्ष के वरिष्ठ नेता ने जहां मोदी सरकार को सम्मेलन के सफल आयोजन और बिना विवाद संयुक्त बयान जारी होने के लिए बधाई दी, वहीं BRICS के विस्तार और न्यू डेवलपमेंट बैंक के संदर्भ में यूपीए सरकार और मनमोहन सिंह के योगदान को भी सामने रखा।
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