हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन संबंधित सर्व कर्मचारी संघ ने शुक्रवार को डिपो में कर्मचारियों ने निजीकरण के विरोध में दो घंटे प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए निजी परमिट रद्द करने और रोडवेज के बेड़े में सरकारी बसों की संख्या बढ़ाने की मांग की। चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मांगों का समाधान बातचीत के माध्यम से नहीं किया तो जल्द ही निर्णायक आंदोलन शुरू किया जाएगा। यूनियन के प्रधान देवेंद्र घोड़ेला ने कहा कि सरकार रोडवेज के निजीकरण की दिशा में आगे बढ़ने की बजाय विभाग के बेड़े में 10 हजार सरकारी बसें शामिल करे। इससे करीब 60 हजार बेरोजगार युवाओं को रोजगार मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि 16 जून 2026 को परिवहन मंत्री के साथ हुई वार्ता में 500 नई बसें खरीदने की घोषणा की गई थी और कर्मचारियों की कई मांगों पर सहमति जताते हुए 40 दिन में दोबारा बैठक करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक मांगों को लागू नहीं किया गया। राज्य कैशियर सुशील ईक्कस और सचिव जयवीर तालू ने कहा कि सरकार सरकारी बसें बढ़ाने की बजाय निजी परमिट जारी कर कर्मचारियों की नाराजगी बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि रोडवेज का निजीकरण किसी भी सूरत में सहन नहीं किया जाएगा। सरकार समय रहते निजीकरण संबंधी फैसले वापस लेकर कर्मचारियों की मांगों पर बातचीत करे। उन्होंने चालक और परिचालक समेत सभी कर्मचारियों के वेतनमान की विसंगतियां दूर करने, बकाया बोनस और ओवरटाइम का भुगतान करने, खाली पदों पर पदोन्नति करने, कच्चे कर्मचारियों को कोर्ट के निर्णय के अनुसार पक्का करने, अर्जित अवकाश की पुरानी व्यवस्था लागू करने और रात्रि ठहराव का बकाया भुगतान करने की मांग की। इसके अलावा 2006 से पहले नियुक्त कर्मचारियों को कोर्ट के निर्णय के अनुसार पुरानी पेंशन योजना में शामिल करने, खाली पदों पर नियमित भर्ती करने और गांवों में रात्रि ठहराव की व्यवस्था करने की भी मांग उठाई। देवेंद्र घोड़ेला ने कहा कि सभी यूनियनों को एकजुट कर आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। यदि सरकार ने जल्द मांगों का समाधान नहीं किया तो हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन बैठक बुलाकर निर्णायक आंदोलन का फैसला लेगी। प्रदर्शन में सुनील धोड़ी, धर्मबीर, दिनेश, पवन, ओमप्रकाश, रमेश, बलजीत मान मौजूद रहे।