टमाटर में लगा सड़न रोग, सब्जी मंडियों में कम पहुंच रही फसल
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हिमाचल में टमाटर की फसल को बकाई रोट सड़न रोग लग गया है। इससे किसान परेशान हैं। हालांकि, किसान टमाटर की फसल को सड़न रोग से बचाने के लिए कई तरह के प्रयास कर रहे हैं। माना जा रहा है कि पिछले कुछ दिन से सड़न रोग ने फसल को बुरी तरह प्रभावित किया है।इससे प्रदेश की सब्जी मंडियों में आने वाली टमाटर की खेप में भारी कमी आई है।
दूसरी ओर, टमाटर की डिमांड बढ़ने से इसके दाम में भी उछाल आया है। किसानों की मानें तो पिछले कुछ दिन से फल सड़न रोग बहुत ज्यादा बढ़ गया है। यह टमाटर के साथ ही अन्य पौधों में भी फैल रहा है। सड़न रोग के सबसे ज्यादा मामले शिमला, सोलन, ठियोग, कोटखाई से सामने आए हैं। कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे अपनी फसल को शीघ्र ही इस रोग से बचाएं।इसके लिए विभाग ने उपचार भी बताए हैं।
दो गुना कम हुई टमाटर की आमद
सोलन और शिमला मंडी के टमाटर व्यापारियों की मानें तो पिछले सप्ताह से टमाटर आना बहुत कम हो गया है। बाहरी राज्य की मंडियों से हिमाचली टमाटर की बहुत ज्यादा डिमांड है। टमाटर की खेप कम होने से किसानों को टमाटर के अच्छे दाम भी मिल रहे हैं। पिछले कुछ दिन से टमाटर के दामों में वृद्धि आई है।
ऐसे करें रोग की पहचान और ये है उपचार
बकाई रोट भी फल सड़न रोग का अंग है। इसकी पहचान टमाटर के फल में बकरे की आंख की तरह निशान से की जा सकती है। यदि फसल में पीलापन नजर आए तो इससे भी सड़न रोग का पता लगाया जा सकता है। पत्तों के पीले पड़ने से भी रोग की पहचान की जा सकती है।
ऐसे करें उपचार
टमाटर की फसल में सड़न रोग को दूर करने के लिए टमाटर की फसल में सिंचाई की सही व्यवस्था होना अनिवार्य है। यदि फल में सड़न रोग लग जाए तो कृषि विशेषज्ञों की सलाह से कीटनाशक का छिड़काव करें। कृषि विभाग ने बकाई रोट के लगने पर रिडोमिल एम जेड का छिड़काव करने की सलाह दी है।
टमाटर में फल सड़न रोग का खतरा आम बात है। यदि इसका उपचार समय पर न किया जाए तो यह रोग अधिक फैल सकता है। यह पूरी फसल को भी नष्ट कर सकता है। - मोहेंद्र सिंह भवानी, जिला कृषि अधिकारी