{"_id":"5c5c9256bdec225eb27aa74a","slug":"191549570646-rishikesh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सांठगांठ कर अपने नाम चढ़ाया गृहकर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सांठगांठ कर अपने नाम चढ़ाया गृहकर
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। नगर निगम के कर विभाग में हेराफेरी का एक और मामला उजागर हुआ है। आदर्श नगर में एक सोसाइटी की जमीन पर मालिकाना हक का विवाद चल रहा था। इसी बीच एक पक्ष पर निगम अफसरों से साठगांठ कर गृहकर अपने नाम चढ़वाने का आरोप लगा है। इसको लेकर देर रात तक निगम क्षेत्र में चर्चाओं का दौर चलता रहा। इस मामले में मेयर अनिता ममगाईं ने मुख्य नगर आयुक्त, सहायक नगर आयुक्त और स्थानीय पार्षद सहित चार लोगों की जांच समिति गठित कर दी है।
जानकारी के मुताबिक आदर्श नगर स्थित बेशकीमती जमीन के मालिकाना हक को लेकर वर्षों से आदर्श नगर सोसाइटी ओर गंगा गिरि के बीच विवाद चल रहा था। बताया जा रहा है कि मामला हाई कोर्ट में भी लंबित है। आदर्श नगर सोसाइटी की ओर से राजीव सिंघल का कहना है कि वह कोर्ट से केस जीत चुके हैं और उनके नाम रजिस्ट्री भी हो चुकी है। आरोप है कि दूसरे पक्ष की ओर से गंगा गिरि नामक व्यक्ति ने कर विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर हाउस टैक्स के रूप में बिल अपने नाम कटवा लिया।
गंगा गिरि के नाम गृहकर दर्ज होने का मामला बीते मंगलवार का है। उधर, राजीव सिंघल ने जमीन पर कब्जा जमाए खोखों को पुलिस के माध्यम से हटवाकर बाउंड्रीवाल रखवा ली। राजीव सिंघल को जब गृहकर गंगा गिरि के नाम से दर्ज होने का मामला पता चला तो उनकी ओर से कई पैरोकारों ने मुद्दा मेयर अनिता ममगाईं के समक्ष रखा।
विज्ञापन
मेयर ने तत्काल स्थानीय पार्षद अजीत सिंह सहित पूर्व पार्षद हरीश तिवाड़ी और सहायक नगर आयुक्त उत्तम सिंह नेगी को बुलाया और मामले की हकीकत जानने का प्रयास किया। पूरे प्रकरण को सुनने के बाद मेयर ने मुख्य नगर आयुक्त, सहायक नगर आयुक्त, पार्षद अजीत सिंह सहित चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है। निर्देश दिया गया है कि जब तक जांच रिपोर्ट नहीं आ जाती है तब तक गृहकर दर्ज न माना जाए।
पनपने से पहले ही निगम को लगा साजिशों का घुन
ऋशिकेश। लगातार हो रहे घोटालों के खुलासे से यह साफ हो गया है कि नवनिर्मित निगम को साजिशों का घुन खोखला करने में जुट गया है। इसका ताजा मामला संदिग्ध तरीके से गृहकर दर्ज करना है, जहां आम लोगों को नाम स्थानांतरण और गृहकर दर्ज करवाने में सालों लग जाते हैं, वहीं रातों रात मलाईदार संपत्तियों का सारा कोरम पूरा कर दिया जाता है। अजीब बात तो ये है कि संदिग्ध तरीके से गृह कर के दायरे में लाई गई आदर्श नगर की जमीन के मामले में एक तरफ मेयर जांच समिति गठित करने की बात कह रही हैं वहीं मुख्य नगर आयुक्त अनभिज्ञता जाहिर कर रहे हैं। दूसरी ओर सहायक नगर आयुक्त कई बार फोन करने के बाद भी संपर्क नहीं हो पाया। सहायक नगर आयुक्त का पक्ष आने के बाद उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।
विज्ञापन
जानकारी के मुताबिक आदर्श नगर स्थित बेशकीमती जमीन के मालिकाना हक को लेकर वर्षों से आदर्श नगर सोसाइटी ओर गंगा गिरि के बीच विवाद चल रहा था। बताया जा रहा है कि मामला हाई कोर्ट में भी लंबित है। आदर्श नगर सोसाइटी की ओर से राजीव सिंघल का कहना है कि वह कोर्ट से केस जीत चुके हैं और उनके नाम रजिस्ट्री भी हो चुकी है। आरोप है कि दूसरे पक्ष की ओर से गंगा गिरि नामक व्यक्ति ने कर विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर हाउस टैक्स के रूप में बिल अपने नाम कटवा लिया।
विज्ञापन
गंगा गिरि के नाम गृहकर दर्ज होने का मामला बीते मंगलवार का है। उधर, राजीव सिंघल ने जमीन पर कब्जा जमाए खोखों को पुलिस के माध्यम से हटवाकर बाउंड्रीवाल रखवा ली। राजीव सिंघल को जब गृहकर गंगा गिरि के नाम से दर्ज होने का मामला पता चला तो उनकी ओर से कई पैरोकारों ने मुद्दा मेयर अनिता ममगाईं के समक्ष रखा।
विज्ञापन
मेयर ने तत्काल स्थानीय पार्षद अजीत सिंह सहित पूर्व पार्षद हरीश तिवाड़ी और सहायक नगर आयुक्त उत्तम सिंह नेगी को बुलाया और मामले की हकीकत जानने का प्रयास किया। पूरे प्रकरण को सुनने के बाद मेयर ने मुख्य नगर आयुक्त, सहायक नगर आयुक्त, पार्षद अजीत सिंह सहित चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है। निर्देश दिया गया है कि जब तक जांच रिपोर्ट नहीं आ जाती है तब तक गृहकर दर्ज न माना जाए।
पनपने से पहले ही निगम को लगा साजिशों का घुन
ऋशिकेश। लगातार हो रहे घोटालों के खुलासे से यह साफ हो गया है कि नवनिर्मित निगम को साजिशों का घुन खोखला करने में जुट गया है। इसका ताजा मामला संदिग्ध तरीके से गृहकर दर्ज करना है, जहां आम लोगों को नाम स्थानांतरण और गृहकर दर्ज करवाने में सालों लग जाते हैं, वहीं रातों रात मलाईदार संपत्तियों का सारा कोरम पूरा कर दिया जाता है। अजीब बात तो ये है कि संदिग्ध तरीके से गृह कर के दायरे में लाई गई आदर्श नगर की जमीन के मामले में एक तरफ मेयर जांच समिति गठित करने की बात कह रही हैं वहीं मुख्य नगर आयुक्त अनभिज्ञता जाहिर कर रहे हैं। दूसरी ओर सहायक नगर आयुक्त कई बार फोन करने के बाद भी संपर्क नहीं हो पाया। सहायक नगर आयुक्त का पक्ष आने के बाद उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।