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Pithoragarh News: ढाई किमी दूर से पानी ढो रहे बेलपट्टी क्षेत्र के लोग
Mon, 24 Apr 2023 11:01 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Mon, 24 Apr 2023 11:01 PM IST
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गंगोलीहाट/पिथौरागढ़। गंगोलीहाट के बेलपट्टी क्षेत्र के गांव जंगलों से घिरे हैं। बावजूद इसके यहां के ग्रामीणों को गर्मी के सीजन में पानी के लिए दो से ढाई किमी की दौड़ लगानी पड़ती है। इस कारण ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
बेलपट्टी क्षेत्र के नाली, टिमटा, चहज, बड़ैना, भामा, पाभें, जाखनी, ड्यूल और पव्वाधार के लोग गर्मी में पेयजल किल्लत को लेकर परेशान रहते हैं। इनमें से कई गांव अधिक ऊंचाई पर होने की वजह से वहां पानी के स्रोत सूख जाते हैं। बांज, बुरांस, काफल के जंगल से घिरे गांवों के लोगों को दूर स्थित स्रोतों से पानी ढोना पड़ता है।
सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र बिष्ट ने बताया कि जब वह अपने साथी भूपेश पंत के साथ जंगल जा रहे थे तो उन्हें रास्ते में भामा गांव का 18 वर्षीय सौरभ सिंह मिला। उसके हाथ में 40 लीटर का जार था। सौरभ ने उनसे लिफ्ट मांगी। करीब ढाई किमी के बाद उसने वाहन रोकने को कहा। सौरभ ने उन्हें बताया कि वह सुबह-शाम वैष्णवी मंदिर के पास स्थित धारे से पानी कंधे पर ढोकर घर ले जाता है।
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कभी उसके पिता भी पानी लेने आते हैं। सौरभ ने उन्हें बताया कि पाइप लाइन की पोस्ट पर तीसरे दिन थोड़ा पानी आता है। गांव के अन्य युवा भी सौरभ की तरह ही पानी ढोते हैं। ग्रामीणों का अधिकतर समय पानी जुटाने में ही बीत जाता है।
बेलपंपिंग योजना का इंतजार
पिथौरागढ़। गंगोलीहाट के सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र बिष्ट ने बताया कि यह स्थिति उन गांवों की है जो घने जंगल से घिरे हैं। नीचे के गांवों में पानी की प्रचुरता इतनी अधिक है कि वह गधेरे में बहकर बेकार हो जाता है जबकि ऊंचाई वाले स्थानों पर पानी की किल्लत बनी है। ग्रामीणों को पानी के लिए बेलपंपिंग योजना का इंतजार अगले साल तक करना होगा।
44 करोड़ की लागत से बन रही बेलपट्टी पंपिंग योजना का कार्य फरवरी 2024 तक पूरा हो जाएगा। इससे क्षेत्र के 27 ग्राम पंचायतों के 49 राजस्व गांव लाभान्वित होंगे। -रवि सामंत, जेई उत्तराखंड पेयजल निगम गंगोलीहाट।
बेलपट्टी के चहज में 21 अप्रैल से टैंकर से दो दिन पानी दिया है। टैंकर चालक की अचानक तबियत खराब होने के कारण टैंकर नियमित नहीं जा रहा है। विभाग ने पानी बंटवाने के लिए टेंडर निकाले हैं। टैंकर चालक के स्वस्थ होने और वाहन की व्यवस्था होने के बाद प्रभावित गांव में लगातार पानी दिया जाएगा। -रुपेश आर्य, जेई जल संस्थान।
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बेलपट्टी क्षेत्र के नाली, टिमटा, चहज, बड़ैना, भामा, पाभें, जाखनी, ड्यूल और पव्वाधार के लोग गर्मी में पेयजल किल्लत को लेकर परेशान रहते हैं। इनमें से कई गांव अधिक ऊंचाई पर होने की वजह से वहां पानी के स्रोत सूख जाते हैं। बांज, बुरांस, काफल के जंगल से घिरे गांवों के लोगों को दूर स्थित स्रोतों से पानी ढोना पड़ता है।
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सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र बिष्ट ने बताया कि जब वह अपने साथी भूपेश पंत के साथ जंगल जा रहे थे तो उन्हें रास्ते में भामा गांव का 18 वर्षीय सौरभ सिंह मिला। उसके हाथ में 40 लीटर का जार था। सौरभ ने उनसे लिफ्ट मांगी। करीब ढाई किमी के बाद उसने वाहन रोकने को कहा। सौरभ ने उन्हें बताया कि वह सुबह-शाम वैष्णवी मंदिर के पास स्थित धारे से पानी कंधे पर ढोकर घर ले जाता है।
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कभी उसके पिता भी पानी लेने आते हैं। सौरभ ने उन्हें बताया कि पाइप लाइन की पोस्ट पर तीसरे दिन थोड़ा पानी आता है। गांव के अन्य युवा भी सौरभ की तरह ही पानी ढोते हैं। ग्रामीणों का अधिकतर समय पानी जुटाने में ही बीत जाता है।
बेलपंपिंग योजना का इंतजार
पिथौरागढ़। गंगोलीहाट के सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र बिष्ट ने बताया कि यह स्थिति उन गांवों की है जो घने जंगल से घिरे हैं। नीचे के गांवों में पानी की प्रचुरता इतनी अधिक है कि वह गधेरे में बहकर बेकार हो जाता है जबकि ऊंचाई वाले स्थानों पर पानी की किल्लत बनी है। ग्रामीणों को पानी के लिए बेलपंपिंग योजना का इंतजार अगले साल तक करना होगा।
44 करोड़ की लागत से बन रही बेलपट्टी पंपिंग योजना का कार्य फरवरी 2024 तक पूरा हो जाएगा। इससे क्षेत्र के 27 ग्राम पंचायतों के 49 राजस्व गांव लाभान्वित होंगे। -रवि सामंत, जेई उत्तराखंड पेयजल निगम गंगोलीहाट।
बेलपट्टी के चहज में 21 अप्रैल से टैंकर से दो दिन पानी दिया है। टैंकर चालक की अचानक तबियत खराब होने के कारण टैंकर नियमित नहीं जा रहा है। विभाग ने पानी बंटवाने के लिए टेंडर निकाले हैं। टैंकर चालक के स्वस्थ होने और वाहन की व्यवस्था होने के बाद प्रभावित गांव में लगातार पानी दिया जाएगा। -रुपेश आर्य, जेई जल संस्थान।