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पर्यावरण संरक्षण जिम्मेदारी, साझेदारी और भागीदारी के साथ करने की जरूरत
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गंगोलीहाट में आयोजित कार्यशाला में जानकारी देते विशेषज्ञ।
- फोटो : PITHORAGARH
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गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण संस्थान कोसी कटारमल अल्मोड़ा के निदेशक डॉ. आरएस रावल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से पानी की कमी हो रही है। खेती और मानव स्वास्थ्य पर भी इसका बुरा असर पड़ रहा है। जिम्मेदारी, साझेदारी और भागीदारी से ही पर्यावरण संरक्षण हो सकता है।
हिमालयन ग्राम विकास समिति के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला का विषय था अवकृमित भूमि का पुनर्स्थापन एवं आजीविका। इसमें संस्थान के निदेशक डॉ. रावल ने हिमालय को संवेदनशील बताया। कहा कि अगर विश्व का तापमान डेढ़ डिग्री बढ़ेगा, तो हिमालय का तापमान चार डिग्री बढ़ जाएगा।
उन्होंने कहा कि अब हमें समय गंवाए बिना प्रकृति का संरक्षण करना होगा तभी हम आने वाली पीढ़ियों के लिए कुछ बचा पाएंगे। संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आईडी भट्ट ने औषधीय प्रजातियों की खेती का आह्वान किया। नगर पंचायत अध्यक्ष जयश्री पाठक ने पर्यावरण संरक्षण में जनप्रतिनिधियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
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केंद्र के अध्यक्ष राजेंद्र बिष्ट ने आभार जताया। शोधार्थी विभाष ध्यानी ने संचालन किया। कार्यशाला में रेंजर मनोज सनवाल, पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. मंजू असवाल, प्रभारी उद्यान वीपी गोस्वामी समेत कई पंचायत प्रतिनिधि मौजूद रहे।
पिरूल से मिलेगा स्वरोजगार
गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. डीएस बिष्ट ने कहा कि पिरूल से स्वरोजगार मिलेगा। उन्होंने बताया कि युवाओं को पिरूल से बायोब्रिकेट बनाने का प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जंगल की आग के प्रमुख कारण पिरूल के कई उत्पाद बनाकर युवा स्वरोजगार कर सकते हैं।
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हिमालयन ग्राम विकास समिति के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला का विषय था अवकृमित भूमि का पुनर्स्थापन एवं आजीविका। इसमें संस्थान के निदेशक डॉ. रावल ने हिमालय को संवेदनशील बताया। कहा कि अगर विश्व का तापमान डेढ़ डिग्री बढ़ेगा, तो हिमालय का तापमान चार डिग्री बढ़ जाएगा।
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उन्होंने कहा कि अब हमें समय गंवाए बिना प्रकृति का संरक्षण करना होगा तभी हम आने वाली पीढ़ियों के लिए कुछ बचा पाएंगे। संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आईडी भट्ट ने औषधीय प्रजातियों की खेती का आह्वान किया। नगर पंचायत अध्यक्ष जयश्री पाठक ने पर्यावरण संरक्षण में जनप्रतिनिधियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
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केंद्र के अध्यक्ष राजेंद्र बिष्ट ने आभार जताया। शोधार्थी विभाष ध्यानी ने संचालन किया। कार्यशाला में रेंजर मनोज सनवाल, पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. मंजू असवाल, प्रभारी उद्यान वीपी गोस्वामी समेत कई पंचायत प्रतिनिधि मौजूद रहे।
पिरूल से मिलेगा स्वरोजगार
गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. डीएस बिष्ट ने कहा कि पिरूल से स्वरोजगार मिलेगा। उन्होंने बताया कि युवाओं को पिरूल से बायोब्रिकेट बनाने का प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जंगल की आग के प्रमुख कारण पिरूल के कई उत्पाद बनाकर युवा स्वरोजगार कर सकते हैं।