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शहीद बेटे का पार्थिव शरीर देख गर्व से भर गए पिता, आंखों में आंसू लिए बोले-मुझे नाज़ है वो देश के काम आया

Sun, 03 May 2020 07:51 PM IST
अमर उजाला लोकल ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिथौरागढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिथौरागढ़ Published by: अमर उजाला लोकल ब्यूरो Updated Sun, 03 May 2020 07:51 PM IST
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Uttarakhand: Martyr shankar father emotional, feel proud on his son martyr for india
- फोटो : अमर उजाला

यही विधाता को मंजूर होगा। यही होना होगा। मुझे गर्व है, मेरा बेटा देश के काम आया। यह बात शहीद शंकर सिंह के पिता मोहन सिंह ने कही। शंकर सिंह के शहीद होने की सूचना के बाद उनके आवास पर सुबह से ही लोग जुटने शुरू हो गए थे।

Uttarakhand: Martyr shankar father emotional, feel proud on his son martyr for india
- फोटो : अमर उजाला

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ स्थित शहीद के घर पर जैसे ही लोग सांत्वना देने आते, आंगन में बैठे पिता मोहन सिंह की आंखें नम हो जातीं। बेटे की शहादत की खबर सुनने के बाद से गुमसुम मोहन सिंह साहस जुटाकर बीच-बीच में बेटे के पार्थिव शरीर को लेकर आ रहे वाहनों की जानकारी पूछते रहते।

Uttarakhand: Martyr shankar father emotional, feel proud on his son martyr for india
- फोटो : अमर उजाला

इस बीच, जैसे ही कोई सांत्वना देने के लिए दो शब्द कहता तो बोल पड़ते कि मौत तो सभी की आनी है, इस बात का गर्व है कि मेरा बेटा देश के काम आया। उसके बाद फिर उनकी आंखों से आंसू गिरने लगते। उनको रोता देख सांत्वना देने के लिए पहुंचे लोगों की आंखें भी नम हो गईं।

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Uttarakhand: Martyr shankar father emotional, feel proud on his son martyr for india
- फोटो : अमर उजाला

जैसे ही शहीद शंकर सिंह महरा का पार्थिव शरीर दशाइथल हेलीपेड से पैतृक गांव नाली को रवाना हुआ लोग हाथ में फूल लेकर सेना के वाहन पर चढ़ाने लगे। गंगोलीहाट, कोठेरा, भंडारी गांव, भूलीगांव, बोकटा, चौनाला, चौड़ा, दूनी, नाली में सैकड़ों की संख्या में लोग सड़क पर आकर फूलों की वर्षा करने लगे और शहीद की जय-जयकार करने लगे। जब तक सूरज चांद रहेगा शंकर तेरा नाम रहेगा, भारत माता की जय के नारों से आसमान गूंज उठा।

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Uttarakhand: Martyr shankar father emotional, feel proud on his son martyr for india
- फोटो : अमर उजाला

पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही चारों ओर चीत्कार हो उठा। शहीद के पिता, माता और पत्नी पार्थिव शरीर से लिपटकर रोने लगे। गांव के लोग भी घरों की छतों से शंकर सिंह अमर रहे के नारे लगाते रहे। इसके बाद पार्थिव शरीर को रामेश्वर के पवित्र घाट पर सैन्य सम्मान के साथ विदाई दी गई।

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