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Pithoragarh News: गेंदा की खेती से बढ़ सकती है किसानों की आय

Sun, 10 Sep 2023 10:51 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Sun, 10 Sep 2023 10:51 PM IST
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Farmers' income can increase through marigold cultivation
पिथौरागढ़। गेंदा सहित विभिन्न फूलों की खेती से किसानों की आय बढ़ सकती है। जंगली जानवरों के कारण खेती छोड़ने वाले किसान गेंदा की खेती करके प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपये तक कमा सकते हैं। इच्छुक किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) के वैज्ञानिक परामर्श देंगे।
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धार्मिक कार्य, शृंगार, विवाह, उद्घाटन समारोह, जन्म दिन सहित तमाम त्योहार के अवसर पर फूलों की मांग रहती है। माला, सजावट में गेंदे का फूल सबसे अधिक प्रयोग होता है। इस कारण बाजार में फूलों की मांग तेजी से बढ़ी है। यह एक उद्योग बन चुका है। केवीके के विशेषज्ञों का कहना है कि फूलों की खेती करना आसान है। गेंदा की फसल को जंगली जानवर भी नुकसान नहीं पहुंचाते। इसकी खेती करने पर अनाज की फसलों से कम समय में अधिक आय हो सकती है। पुष्प उत्पादक किसान फूलों से सुगंधित तेल, गुलाब जल या इत्र भी तैयार कर सकते हैं।
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इन फूलों की खेती कर सकते हैं किसान
गुलाब, गेंदा, एस्टर बेली, जरबेरा, रजनीगंधा, चमेली, ग्लेडियोलस, सुपर रोज, गुलदाउदी, सूरजमुखी, हाइड्रेंजिया, लैवेंडर, पेनी, डेजी, आर्किड, ट्यूलिप, लिली, डहेलिया, डैफोडिल, कार्नेशन, बेगोनिया, कॉर्नफ्लावर, कमल, अजेलिया, गुलबहार, साल्विया, रेनुनकुलस।
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पलायन रोकने में हो सकता है सहायक
पिथौरागढ़। फूलों से इत्र और सुगंध (खुशबू) बनाई जाती है। गुलाब से गुलकंद और गुलाब जल बनाया जाता है। कई फूलों से हर्बल चाय, शर्बत, जूस, स्क्वैश आदि पेय पदार्थ बनाए जाते हैं। फूलों से तेल, कॉस्मेटिक, क्रीम, फेस पैक, साबुन, टूथपेस्ट, डिटर्जेंट बनाए जाते हैं। धूप, अगरबत्ती भी फूलों से बनाई जाती है। कुछ फूलों से फिनाइल, कीटनाशक, फफूंद नाशक भी बनाई जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि पहाड़ की जलवायु फूलों के उत्पादन के लिहाज से उपयुक्त है। यदि लोग फूल उगाएं तो यह पहाड़ से पलायन रोकने में भी मदद मिलेगी।

फूलों की खेती शुरू करने से पहले किसान को अच्छी किस्म की वैज्ञानिक तकनीक जाननी चाहिए। एक हेक्टेयर खेत में गेंदा की खेती करने पर किसान एक लाख तक की कमाई कर सकता है। इच्छुक किसानों को केवीके की ओर से प्रशिक्षण और परामर्श दिया जाएगा। - डॉ. अभिषेक बहुगुणा, वैज्ञानिक, केवीके, पिथौरागढ़।
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