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नहर के पानी से रोशन होने लगा जंगलात
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रामनगर (नैनीताल)। नहरों के पानी से अब सिंचाई ही नहीं बल्कि बिजली उत्पादन भी किया जा सकेगा। रामनगर वन प्रभाग के पवलगढ़ में सिंचाई नहर में प्रदेश का पहला हाइड्रो काइनेटिक पावर प्लांट लगाया गया है। यहां बिजली का उत्पादन शुरू कर दिया गया है। इस पावर प्लांट के जरिये दूरस्थ वन क्षेत्रों को रोशन किया जाएगा, क्योंकि इन जगहों पर पावर ग्रिड से बिजली नहीं पहुंच पाती है। यह प्लांट 24 घंटे में 80 किलोवाट बिजली उत्पन्न कर रहा है।
पवलगढ़ रेस्ट हाउस के पास सिंचाई नहर में हाइड्रो काइनेटिक पावर प्लांट के तीन टरबाइन लगाए गए हैं। यह प्लांट 18 लाख रुपये की लागत से लग रहा है, जिसे दिल्ली की मैकलेक कंपनी लगा रही है। कंपनी के चीफ इंजीनियर डॉ. बलराम भारद्वाज के नेतृत्व में काम अब अंतिम दौर में चल रहा है। कंपनी मार्च से इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। इंजीनियर के अनुसार प्रत्येक टरबाइन से चार घंटे के भीतर पांच किलोवाट बिजली उत्पन्न हो रही है। यानी तीन टरबाइन से प्रति चार घंटे में 15 किलोवाट बिजली पैदा हो रही है। ऐसे में पावर प्लांट 80 किलोवाट 24 घंटे में उत्पन्न हो रही है।
रामनगर वन प्रभाग के डीएफओ चंद्रशेखर जोशी का कहना है कि हाइड्रो काइनेटिक पावर प्लांट 18 लाख रुपये की लागत से बन रहा है, जो अंतिम दौर में है। प्लांट से अब बिजली का उत्पादन शुरू हो रहा है। यह प्लांट प्रदेश का पहला प्लांट है। दूरस्थ वन क्षेत्र इस प्लांट से रोशन होंगे।
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रेस्ट हाउस, वन चौकी हो रही रोशन : डीएफओ
रामनगर। डीएफओ ने बताया कि अभी इस प्लांट से पवलगढ़ रेस्ट हाउस, रेंजर कार्यालय, वन चौकी और लाइब्रेरी रोशन हो रही हैं। आने वाले समय में ऐसे वन क्षेत्रों को रोशन किया जाएगा, जहां पर ऊर्जा निगम की बिजली नहीं पहुंच पाती है। भविष्य में इस तरह के प्लांट अन्य जगहों में लगाए जाएंगे, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों को रोशन किया जा सके।
गर्मियों में पानी कम होने पर भी चलेगा प्लांट
रामनगर। डीएफओ ने बताया कि गर्मियों के दिनों में पानी कम होने पर भी प्लांट की टरबाइनेें चलेंगीं और बिजली उत्पादन होगा। प्लांट की टरबाइन को घूमने के लिए 0.5 से 1 मीटर प्रति सेकेंड की गति से पानी चाहिए। गर्मियों के दिनों में नहर के अंदर 2 मीटर प्रति सेकेंड की गति से पानी रहता है। ऐसे में प्लांट लगातार चलेगा और बिजली उत्पादन होगा।
क्या है हाइड्रो काइनेटिक पावर प्लांट
नदी या महासागर के पानी से प्राप्त बिजली को हाइड्रो पावर कहा जाता है। पनबिजली संयंत्रों के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव के पर काम कर रहे हैं। पानी बांध या जलाशय में जमा है, इस पानी की आंतरिक ऊर्जा को काइनेटिक ऊर्जा के रूप लाया जाता है और काइनेटिक ऊर्जा का टरबाइन को घुमाने के लिए उपयोग किया जाता है।
ये हैं इसके लाभ
- इसे तुरंत सेवा में उपयोग किया जा सकता है।
- इस प्रक्रिया के बाद सिंचाई और अन्य प्रयोजन के लिए पानी का उपयोग किया जा सकता है।
- लागत और रखरखाव की लागत कम है।
- कोई ईंधन परिवहन की जरूरत नहीं है।
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पवलगढ़ रेस्ट हाउस के पास सिंचाई नहर में हाइड्रो काइनेटिक पावर प्लांट के तीन टरबाइन लगाए गए हैं। यह प्लांट 18 लाख रुपये की लागत से लग रहा है, जिसे दिल्ली की मैकलेक कंपनी लगा रही है। कंपनी के चीफ इंजीनियर डॉ. बलराम भारद्वाज के नेतृत्व में काम अब अंतिम दौर में चल रहा है। कंपनी मार्च से इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। इंजीनियर के अनुसार प्रत्येक टरबाइन से चार घंटे के भीतर पांच किलोवाट बिजली उत्पन्न हो रही है। यानी तीन टरबाइन से प्रति चार घंटे में 15 किलोवाट बिजली पैदा हो रही है। ऐसे में पावर प्लांट 80 किलोवाट 24 घंटे में उत्पन्न हो रही है।
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रामनगर वन प्रभाग के डीएफओ चंद्रशेखर जोशी का कहना है कि हाइड्रो काइनेटिक पावर प्लांट 18 लाख रुपये की लागत से बन रहा है, जो अंतिम दौर में है। प्लांट से अब बिजली का उत्पादन शुरू हो रहा है। यह प्लांट प्रदेश का पहला प्लांट है। दूरस्थ वन क्षेत्र इस प्लांट से रोशन होंगे।
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रेस्ट हाउस, वन चौकी हो रही रोशन : डीएफओ
रामनगर। डीएफओ ने बताया कि अभी इस प्लांट से पवलगढ़ रेस्ट हाउस, रेंजर कार्यालय, वन चौकी और लाइब्रेरी रोशन हो रही हैं। आने वाले समय में ऐसे वन क्षेत्रों को रोशन किया जाएगा, जहां पर ऊर्जा निगम की बिजली नहीं पहुंच पाती है। भविष्य में इस तरह के प्लांट अन्य जगहों में लगाए जाएंगे, ताकि दूरस्थ क्षेत्रों को रोशन किया जा सके।
गर्मियों में पानी कम होने पर भी चलेगा प्लांट
रामनगर। डीएफओ ने बताया कि गर्मियों के दिनों में पानी कम होने पर भी प्लांट की टरबाइनेें चलेंगीं और बिजली उत्पादन होगा। प्लांट की टरबाइन को घूमने के लिए 0.5 से 1 मीटर प्रति सेकेंड की गति से पानी चाहिए। गर्मियों के दिनों में नहर के अंदर 2 मीटर प्रति सेकेंड की गति से पानी रहता है। ऐसे में प्लांट लगातार चलेगा और बिजली उत्पादन होगा।
क्या है हाइड्रो काइनेटिक पावर प्लांट
नदी या महासागर के पानी से प्राप्त बिजली को हाइड्रो पावर कहा जाता है। पनबिजली संयंत्रों के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव के पर काम कर रहे हैं। पानी बांध या जलाशय में जमा है, इस पानी की आंतरिक ऊर्जा को काइनेटिक ऊर्जा के रूप लाया जाता है और काइनेटिक ऊर्जा का टरबाइन को घुमाने के लिए उपयोग किया जाता है।
ये हैं इसके लाभ
- इसे तुरंत सेवा में उपयोग किया जा सकता है।
- इस प्रक्रिया के बाद सिंचाई और अन्य प्रयोजन के लिए पानी का उपयोग किया जा सकता है।
- लागत और रखरखाव की लागत कम है।
- कोई ईंधन परिवहन की जरूरत नहीं है।