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कुदरत का संकेत: पूरे हिमालयी राज्यों को चेतावनी, विशेषज्ञ बोले- अनियंत्रित विकास की भेंट चढ़ रहे पहाड़ी राज्य
Sat, 29 Aug 2026 11:44 AM IST
Heera
शंकर पांडेय
शंकर पांडेय
Published by: Heera
Updated Sat, 29 Aug 2026 11:44 AM IST
सार
आपदा को प्रकृति ने विकास पर चेतावनी बताया, जो सभी हिमालयी राज्यों के लिए खतरे की घंटी है। बढ़ती आपदाओं से मैदान भी असुरक्षित हो गए हैं, और विशेषज्ञों के अनुसार अब सावधानी न बरती गई तो गंभीर परिणाम होंगे।
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पिथौरागढ़ नगर।
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विस्तार
अदानी में जलप्रलय के जरिये कुदरत ने प्रकृति से छेड़छाड़ कर किए जा रहे विकास कार्यों पर अंकुश लगाने की चेतावनी दी है। यह किसी एक देश की आपदा नहीं है, बल्कि सभी हिमालयी राज्यों के लिए सतर्क होने का समय है। हाल के वर्षों में कुदरत ने पहाड़ के पास बसे इलाकों में आपदा के रूप में तेजी से कहर बरपाना शुरू कर दिया है। इससे मैदानी क्षेत्रों के लिए भी खतरा बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब नहीं चेते तो बहुत देर हो जाएगी।
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...क्योंकि पानी का बहाव रास्ता नहीं भूलता
भारत मौसम विज्ञान केंद्र के पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक और प्रति कि नदी अनि बाढ़ जब भी आएगी, तब नदी अपने पुराने रास्ते पर लौटकर सब कुछ तबाह कर देगी। हमें विकास की जरूरत है, विनाश की नहीं। पहाड़ों से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक जिस तरह से नदियों, नालों को अतिक्रमण कर आवासीय योजनाएं बनाई जा रही हैं, उससे हम आफत निमंत्रण दे रहे हैं। विकास के लिए आंग्रेजों के शासन काल में बने निर्माण कार्यों से सीख लेने की जरूरत है। पहाड़ों में कंस्ट्रक्शन या सड़क निर्माण से पहले उस भूमि को प्रकृति को जानना होगा।
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ये मिले हैं संकेत
- 16 जून 2013, केदारनाथः आपदा ने ग्लेशियरों और संवेदनशील पहाड़ों पर बढ़ते मानव दखल और अंधाधुंध विकास कार्यों के दुष्परिणाम उजागर किए। त्रासदी में 5,000 से अधिक लोगों की मौत या वे लापता हो गए थे।
- 5 अगस्त 2025, धरालीः पिछले साल उत्तराखंड के धराली गांव में भी केदारनाथ जैसा मंजर दिखा। सैलाब की चपेट में आने से 20 लोगों की मौत हुई, जबकि 50 लोग लापता हो गए।
- 2025, हिमाचल प्रदेशः मानसून पर्वतीय राज्य के लिए आफत बनकर आया। भारी बारिश. बादल फट्ने और भूस्खलन की घटनाओं में 45 से अधिक लोगों की जान गई। राज्य को 4,500 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।
- 3 अक्तूबर 2023, सिक्किमः ग्लेशियर से बनी झील टूटने के बाद आई तबाही में 90 से अधिक लोगों की मौत हुई।
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